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15 घंटे की वार्ता के एक दिन बाद पैंगोंग झील पर बातचीत करने को तैयार हुआ चीन, फिंगर-4 और फिंगर-8 पर भी नरमी के संकेत

भारत और चीन के बीच यह सैन्य स्तर की वार्ता का चौथा दौर रहा, रिपोर्ट्स के मुताबिक पहले चीन पैंगोंग सो पर बातचीत के लिए तैयार ही नहीं था।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Published on: July 16, 2020 9:19 AM
India China, India China Border,India China Faceoff: भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव सुलझाने के लिए लगातार सैन्य स्तर पर तीन बैठकें हो चुकी हैं। (फाइल फोटो-ANI)

भारत और चीन के बीच लद्दाख से लगी सीमा पर पिछले करीब दो महीने से तनाव जारी है। हालांकि, सैन्य और राजनयिक स्तर पर वार्ता के बाद अब विवाद कुछ हद तक कम होते दिखाई दे रहे हैं। चीन ने बुधवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव दूर करने के लिये भारत और चीनी सेनाओं के बीच कमांडर स्तर की बातचीत के चौथे दौर की जो वार्ता हुई, उसमें सैनिकों के बीच तनातनी को कम करने और उनकी वापसी की प्रक्रिया को शुरू करने पर बात हुई।

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की वार्ता करीब 15 घंटे तक चली थी। इस चर्चा में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को सीमा पर उन क्षेत्रों से अवगत कराया, जहां घुसना तनाव भड़काने जैसा है। साथ ही यह भी जता दिया कि क्षेत्र में स्थिति में सुधार काफी हद तक चीन पर निर्भर करता है।

सुरक्षा विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि पहले चीन पैंगोंग सो पर बात करने के लिए भी तैयार नहीं था। लेकिन अब वह फिंगर-4 से लेकर फिंगर-8 तक पर बातचीत के लिए तैयार है। इस चर्चा के नतीजे काफी सकारात्मक रहे हैं। बता दें कि पैंगोंग सो वह इलाका है, जहां भारत फिंगर-8 पर एलएसी मानता है। हालांकि, चीन अब तक उस क्षेत्र से 8 किमी अंगर आ चुक है और कुछ समय पहले तक उसने फिंगर-4 का इलाका अपने कब्जे में कर लिया था। चीन का मानना है कि एलएसी भारत की तरफ फिंगर-2 से होकर गुजरती है।

मंगलवार को हुई सैन्य स्तरीय वार्ता के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनंयिंग ने यहां एक मीडिया ब्रीफ्रिंग में कहा कि पश्चिमी क्षेत्र में सीमावर्ती सैनिकों की और वापसी को बढ़ावा देने के लिये दोनों पक्षों में सहमति पर प्रगति हुई है।
उन्होंने कहा, “14 जुलाई को चीन और भारत की सेनाओं के बीच चौथे दौर की कमांडर स्तरीय बातचीत हुई जिसमें पिछले तीन दौर की बातचीत के दौरान बनी सर्वसम्मति तथा इस दिशा में हुए प्रासंगिक काम के क्रियान्वयन के बाद सीमा के पश्चिमी सेक्टर में सैनिकों की और वापसी को बढ़ावा देने तथा तनाव कम करने की दिशा में प्रगति हुई।” हुआ ने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारत चीन के साथ वास्तविक कार्यों के साथ हमारी सहमति को लागू करने के लिये काम कर सकता है और सीमा क्षेत्रों में शांति को सुरक्षित रख सकता है।”

सैन्य स्तर की बातचीत में भारतीय पक्ष का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह कर रहे थे, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता दक्षिण शिनजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर मेजर जनरल लियु लिन कर रहे थे। गतिरोध स्थलों से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया के पहले चरण के क्रियान्वयन के कुछ दिन बाद लेफ्टिनेंट जनरल स्तरीय यह वार्ता हुई।

पीएलए पहले ही बीते एक हफ्ते के दौरान भारत की मांग के अनुरूप गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स और गलवान घाटी से अपने सैनिकों की वापसी पूरी कर चुका है और पैंगोंग सो इलाके के फिंगर-4 क्षेत्र में भी उसने अपने सैनिकों की संख्या में कमी की है। हालांकि, इसके बावजूद भारत ने अब तक सीमा पर चौकसी कम नहीं की है। खासकर 15-16 जून को गलवान घाटी में हुई भारतीय-चीन सैनिकों की मुठभेड़ के बाद, जिसमें भारत के 20 जवानों की जान चली गई थी। वहीं, चीन के बीच कई सैनिक हताहत होने की खबर थी।

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