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VIDEO: चीन से तनातनी के बीच बोले पूर्व मेजर ज.जीडी बख्शी- ‘ड्रैगन’ के खिलाफ नाथुला जैसी कार्रवाई करने का समय आ गया है

मेजर जनरल (रिटायर्ड) जीडी बख्शी ने कहा कि कोविड के चलते हमने इस साल अपनी रुटीन एक्सरसाइज नहीं की थी, जिसकी वजह से चीन की घुसपैठ से हम हैरान हुए।

indian army, india china tension, gd bakhshiसीमा पर भारत चीन के बीच अभी भी तनाव बना हुआ है। (फाइल फोटो)

भारत चीन के बीच सीमा पर अभी भी तनाव बना हुआ है। रविवार को राजनाथ सिंह ने अपने एक बयान में कहा है कि ‘भारत चीन सीमा पर तनाव चल रहा है और भारत इसे खत्म करना चाहता है लेकिन हमारी सेना के जवान किसी भी सूरत में एक इंच जमीन भी दूसरे के हाथों में नहीं जाने देंगे।’ इसी मुद्दे पर आज तक चैनल पर टीवी डिबेट कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें बतौर पैनलिस्ट मौजूद रिटायर्ड मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा कि चीन के खिलाफ नाथुला जैसा एक्शन लेने की जरुरत है।

दरअसल एंकर ने सवाल किया कि चीन सीमा पर क्या स्थिति इतनी तनावपूर्ण है जिसके चलते सच्चाई हमारे सामने नहीं आ पा रही है। इस पर जीडी बख्शी ने कहा कि ये तो सभी को मालूम है कि क्या हो रहा है। रिटायर्ड मेजर जनरल ने कहा कि चीन एक्सरसाइज के बहाने अपनी दो डिवीजन पूर्वी लद्दाख की सीमा पर लाया और फिर उसने सीमा के पांच विवादित पॉइंट पर अपने सैनिकों की तैनाती कर दी और हमारे क्षेत्र में घुसने की कोशिश की।

इस दौरान झड़पें हुई, जिनमें गलवान की भीषण झड़प भी शामिल है। मेजर जनरल जीडी बख्शी ने दावा किया कि चीन के 60 सैनिक मारे गए। हमारे लड़कों ने वहां से चीन को खदेड़ दिया और उनके निगरानी करने के ठिकाने को तबाह कर दिया।

मेजर जनरल (रिटायर्ड) जीडी बख्शी ने कहा कि कोविड के चलते हमने इस साल अपनी रुटीन एक्सरसाइज नहीं की थी, जिसकी वजह से चीन की घुसपैठ से हम हैरान हुए लेकिन अगस्त तक हमारी सेना ने वहां जबरदस्त तरीके से सैनिकों की तैनाती कर दी और फिर पूरी कैलाश रेंज की कई महत्वपूर्ण चोटियों पर कब्जा कर लिया। चीन को करारा जवाब मिला है।

मेजर जनरल (रिटायर्ड) जीडी बख्शी ने कहा कि मेरी व्यक्तिगत राय ये है कि चीन हर साल ये तमाशा करता है। इसलिए हमें एक बार कड़ा जवाब दे देना चाहिए, जिस तरह से हमने नाथुला में दिया था।

बता दें कि साल 1967 में नाथुला इलाके में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में भारत की सेना चीन पर भारी पड़ी थी। दरअसल 1962 की हार के बाद सैनिकों में चीन के खिलाफ गुस्सा था और शायद इसी गुस्से की वजह से भारतीय सैनिक बड़ी बहादुरी और जज्बे से लड़े और चीन की सेना पर भारी पड़े थे। नाथुला की लड़ाई में 300 सैनिक मारे गए थे, जिसमें से भारत के 65 सैनिक ही शहीद हुए थे और चीन को दोगुने से भी ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा था।

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