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चीन के मसले पर पीएम मोदी ने दिखाया जवाहर लाल नेहरू जैसा रवैया: रामचंद्र गुहा

रामचंद्र गुहा कहते हैं कि छह सालों से मोदी के देश के प्रधानमंत्री हैं और इस बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी 18 बार से कम मुलाकात नहीं हुई है।

इतिहासकार रामचंद्र गुहा। (Kerala Literature Festival/Twitter)

मशूहर इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने अपने एक लेख में दावा किया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने लद्दाख में चीन से तनाव के मसले पर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जैसा रवैया अपनाया है। उन्होंने लेख में कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कम्युनिस्ट चीन के नेताओं से अपने निजी संबंधों के दम पर मसले को सुलझाने की कोशिश की है। पूर्व पीएम नेहरू ने भी ऐसा ही किया था। इतिहासकार गुहा का ये लेख एनडीटीवी की अंग्रेजी वेबसाइट मे छपा है।

इतिहासकार ने कहा कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए। अब चीन के प्रति नीति पर हमारी सरकार को नए सिरे से विचार करना होगा। एक इतिहासकार के रूप में मैं हमारे पहले पीएम पंडित नेहरू और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच चीन के प्रति नीति में समानता पर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।

रामचंद्र गुहा ने कहा कि राजनीतिक विचारधारा के संदर्भ में जवाहरलाल नेहरू और नरेंद्र मोदी अलग-अलग हैं। मोदी हिंदू-मुस्लिम सद्भाव या वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा में उनकी रुचि के बारे में नेहरू की प्रतिबद्धता को साझा नहीं करते हैं। इसके अलावा अपने आलोचकों के प्रति मोदी का रवैया नेहरू की तुलना में कहीं अधिक अक्खड़ है। फिर भी नेहरू और मोदी हमारे सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली पड़ोसी के साथ कैसे पेश आए, इसमें उल्लेखनीय समानताएं हैं।

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वापस चलते हैं साल 1954 में, जब जवाहरलाल नेहरू ने माओत्से तुंग और झोउ एनलाई से चर्चा करने के लिए चीन का दौरा किया। उनके मेजबान द्वारा उनकी चापलूसी के लिए एक लाख लोगों को बीजिंग की सड़कों पर लाया गया। चीनी की जबरदस्त भावनात्मक प्रतिक्रिया से मैं चकित रह गया। इधर भारत लौटने पर नेहरू ने कलकत्ता के मैदान में एक बड़ी सार्वजनिक रैली को संबोधित किया। उन्होंने जनता से कहा कि चीन की जनता युद्ध नहीं चाहती है। वो स्पष्ट रूप से अपने देश को एकजुट करने और गरीबी से छुटकारा पाने में बहुत व्यस्त थे।

चीन में मिले ‘शक्तिशाली स्वागत’ पर बोलते हुए नेहरू ने कहा था ये इसलिए नहीं हुआ क्योंकि मैं जवाहरलाल हूं, इसलिए हुआ क्योंकि मैं भारत का प्रधानमंत्री हूं। जिसके लिए चीनी नागरिक अपने दिलों में स्नेह रखते हैं और जिसके साथ वो संबंधों को बनाए रखना चाहते हैं। गुहा लिखते हैं कि ये संभावना नहीं है कि हमारे मौजूदा पीएम ने इस भाषण को पड़ा या सुना है। छह सालों से मोदी के देश के प्रधानमंत्री हैं और इस बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी 18 बार से कम मुलाकात नहीं हुई है।

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