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भारत की कूटनीतिक और सैन्य कामयाबी, आंख दिखाई तो पैंगोंग त्सो और गोगरा प्वाइंट से पीछे हटने को तैयार हुआ चीन

वहीं चीनी विदेश मंत्रालय ने भी अपने एक बयान में कहा है कि 'दोनों पक्ष सीमा पर मौजूद सैनिकों को पीछे हटाने की दिशा में सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखा रहे हैं।

Translated By नितिन गौतम नई दिल्ली | Updated: July 25, 2020 8:08 AM
भारत और चीन के बीच एलएसी से पीछे हटने की प्रक्रिया पर सहमति बन गई है।

चीनी सेना द्वारा लद्दाख के पैंगोंग त्सो और पेट्रोलिंग पॉइंट गोगरा 17ए से पीछे हटने में अनिच्छा जाहिर की जा रही थी लेकिन शुक्रवार को भारत और चीनी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के बाद नई दिल्ली ने एक बयान में कहा है कि ‘दोनों पक्ष जल्दी और पूरी तरह से पीछे हटने को तैयार हो गए हैं।’ इसे भारत की कूटनीतिक और सैन्य कामयाबी माना जा रहा है।

वहीं चीनी विदेश मंत्रालय ने भी अपने एक बयान में कहा है कि ‘दोनों पक्ष सीमा पर मौजूद सैनिकों को पीछे हटाने की दिशा में सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखा रहे हैं। दोनों पक्ष सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के जरिए सीमा पर विवाद का निपटारा करेंगे।’ दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के निपटारे के लिए बनायी गई वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कॉर्डिनेशन की बैठक में कोर कमांडर लेवल की एक और बैठक होने का रास्ता साफ हो गया है।

बता दें कि दोनों देशों के बीच कोर कमांडर लेवल की 6 जून से लेकर अब तक 4 मीटिंग हो चुकी हैं। कोर कमांडर की बैठक में भी दोनों सेनाओं के पीछे हटने पर सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। चीन सीमा पर गलवान घाटी के पीपी14 और हॉट स्प्रिंग के पीपी15 पॉइंट से चीनी सेना पीछे हट चुकी है लेकिन पैंगोंग त्सो और पीपी17ए से पीछे हटने में चीन सेना द्वारा अनिच्छा जाहिर की जा रही थी लेकिन अब चीनी सेना इन दोनों पॉइंट से भी पीछे हटने को तैयार हो गई है।

दोनों देशों ने सीमा के मामलों पर विचार- विमर्श करने एवं समन्वय के कार्यकारी ढांचे के तहत ऑनलाइन माध्यम से हुई ताजा राजनयिक वार्ता के दौरान क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा की। बैठक करीब तीन घंटे तक चली। दोनों देशों की यह बैठक ऐसे समय हुई, जब इस तरह की खबरें आ रही थी कि पीछे हटने की प्रक्रिया आगे की ओर नहीं बढ़ पा रही है, जैसा कि 14 जुलाई की कोर कमांडर स्तर की पिछले दौर की वार्ता के बाद उम्मीद की जा रही थी।

गौरतलब है कि पांच जुलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने टेलीफोन पर करीब दो घंटे तक पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिये चर्चा की थी । दोनों पक्षों ने इस वार्ता के बाद छह जुलाई के बाद पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू की थी।

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