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सीमा विवाद पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, कहा-चीन के साथ बातचीत में पूर्व की यथास्थिति की बहाली पर जोर क्यों नहीं दिया गया

अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में अपने दो विमान वाहक पोत भेजे है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मिशन यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया यह जाने कि हमारे पास अब भी दुनिया का उत्कृष्ट बल है।’’चीन, दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में क्षेत्रीय विवादों में लिप्त है।

GST, COVID-19कांग्रेस नेता राहुल गांधी। (PTI Photo)

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चल रहे गतिरोध के बीच चीनी सैनिकों के पीछे हटने के लिए सहमति बनने की पृष्ठभूमि में मंगलवार को सवाल किया कि सरकार की तरफ से पूर्व की यथास्थिति बहाल करने पर जोर क्यों नहीं दिया गया और सरकारी बयान में गलवान घाटी पर भारत की संप्रभुता का उल्लेख क्यों नहीं है। उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय और चीनी विदेश मंत्रालय के बयानों को शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘‘ राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होता है। भारत सरकार का कर्तव्य है कि वह इसकी रक्षा करे।’’ कांग्रेस नेता ने सवाल किया, ‘‘पूर्व की यथास्थिति बहाल करने पर जोर क्यों नहीं दिया गया? हमारे क्षेत्र में 20 निहत्थे जवानों की हत्या को चीन को सही ठहराने क्यों दिया गया? गलवान घाटी पर हमारी भूभागीय संप्रभुता का उल्लेख क्यों नहीं किया गया?’’

COVID-19 cases in India LIVE News and Updates

व्हाइट हाउस के एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी सेना भारत और चीन के बीच या कहीं और भी संघर्ष के संबंध में उसके साथ ‘‘मजबूती से खड़ी रहेगी।’’ नौसेना द्वारा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को बढ़ाने के लिए दक्षिण चीन सागर में दो विमान वाहक पोत तैनात किये जाने के बाद अधिकारी का यह बयान आया है। व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टॉफ मार्क मीडोज ने एक सवाल के जवाब में ‘फॉक्स न्यूज’ को बताया, ‘‘संदेश स्पष्ट है। हम खड़े होकर चीन को या किसी और को सबसे शक्तिशाली या प्रभावी बल होने के संदर्भ में कमान नहीं थामने दे सकते, फिर चाहे वह उस क्षेत्र में हो या यहां।’’

 

Live Blog

Highlights

    12:44 (IST)07 Jul 2020
    लवान घाटी पर हमारी भूभागीय संप्रभुता का उल्लेख क्यों नहीं, बोले राहुल

    कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि हमारे क्षेत्र में 20 निहत्थे जवानों की हत्या को चीन को सही ठहराने क्यों दिया गया? गलवान घाटी पर हमारी भूभागीय संप्रभुता का उल्लेख क्यों नहीं किया गया?’’

    11:16 (IST)07 Jul 2020
    दोनों देशों के बीच 8 सप्ताह से जारी है गतिरोध

    भारत और चीन के सैनिकों के बीच पैंगोंग सो, गलवान घाटी और गोग्रा हॉट स्प्रिंग सहित पूर्वी लद्दाख के कई इलाकों में आठ सप्ताह से गतिरोध जारी है। हालांकि, स्थिति तब बिगड़ गई जब 15 जून को गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़प में भारत के 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए।

    10:24 (IST)07 Jul 2020
    डोवाल और वांग यी के बीच बातचीत जारी रहेगी

    मंत्रालय के मुताबिक, भारत-चीन सीमा पर द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल के तहत शांति और अमन की बहाली के लिए डोवाल और वांग यी के बीच बातचीत जारी रहेगी। इस बीच, केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अध्यक्ष लोबसांग सांगे ने कहा कि भारत तिब्बत का सबसे बड़ा समर्थक रहा है। सीमा पर तैनाात सभी सैनिकों के लिए हमारे दिलों में सहानुभूति है। हम चाहते हैं कि वे सुरक्षित रहें और भारत सुरक्षित और मजबूत हो।

    09:44 (IST)07 Jul 2020
    सोमवार सुबह गलवान घाटी से अपने तंबुओं को हटाने और पीछे हटने की शुरुआत

    सरकारी सूत्रों ने कहा कि चीनी सैनिकों ने सोमवार सुबह गलवान घाटी से अपने तंबुओं को हटाने और पीछे हटने की शुरुआत कर दी। सरकारी सूत्रों ने कहा कि गोग्रा हॉट स्प्रिंग में भी चीनी सैनिकों और वाहनों की वापसी देखी गई, लेकिन पैंगोंग सो क्षेत्र से चीनी सैनिकों के इसी तरह पीछे हटने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि चीनी सैनिक गलवान घाटी में गश्ती बिन्दु ‘प्वाइंट 14, 15 और 17’ से लगभग एक किलोमीटर पीछे चले गए हैं।

    09:07 (IST)07 Jul 2020
    NSA के साथ दो घंटे चली बातचीत, शांति बनाए रखने पर सहमति

    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल और चीन के विदेश मंत्री और स्टेट काउंसलर वांग यी ने रविवार को वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की। इस बातचीत के बाद चीन बैकफुट पर दिखा। सूत्रों के मुताबिक, दो घंटे तक चली बातचीत के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने माना कि सीमा पर शांति बनाए रखना आवश्यक है।

    08:14 (IST)07 Jul 2020
    पैंगोंग सो क्षेत्र से चीनी सैनिकों के इसी तरह पीछे हटने की कोई पुष्टि नहीं

    सरकारी सूत्रों ने कहा कि गोग्रा हॉट स्प्रिंग में भी चीनी सैनिकों और वाहनों की वापसी देखी गई, लेकिन पैंगोंग सो क्षेत्र से चीनी सैनिकों के इसी तरह पीछे हटने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि चीनी सैनिक गलवान घाटी में गश्ती बिन्दु ‘प्वाइंट 14, 15 और 17’ से लगभग एक किलोमीटर पीछे चले गए हैं।

    07:19 (IST)07 Jul 2020
    विवादित क्षेत्र में नहीं होगी एकतरफा कार्रवाई

    भारत और चीन ने इस बात पर सहमति जताई कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव जल्द खत्म करने के साथ ही विवादित सीमा क्षेत्र में ऐसी कोई एकतरफा कार्रवाई नहीं होगी, जिससे वास्तुस्थित बदले। भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी। बता दें कि सोमवार को चीनी सेना गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो इलाके में पीछे हट गई है। इससे एलएसी पर तनाव में कुछ कमी आयी है और बफर जोन बना है।

    06:16 (IST)07 Jul 2020
    डोभाल ने वांग के साथ वार्ता के दौरान ‘समयबद्ध और प्रत्यक्ष कार्रवाई’ पर जोर दिया

    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ अपनी दो घंटे की बातचीत के दौरान ‘‘समयबद्ध और प्रत्यक्ष कार्रवाई’’ पर बल दिया। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। भारत-चीन सीमा मुद्दे पर 1968 बैच के एक आईपीएस अधिकारी डोभाल भारत के विशेष प्रतिनिधि हैं। अधिकारियों ने बताया कि वार्ता का मुख्य विषय शांति की बहाली और भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए बेहतर समन्वय बनाना था।

    06:00 (IST)07 Jul 2020
    गुजरात ''भारत में चीनी निवेश का केंद्र'' बन गया है : कांग्रेस

    कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य गुजरात ''भारत में चीनी निवेश का केंद्र बन गया है'' और कहा कि चीनी सैनिकों द्वारा 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद इस देश के साथ पहले की तरह व्यापार नहीं किया जा सकता। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि गुजरात ने पिछले पांच साल में 43,000 करोड़ रुपये के निवेश वाले तीन बड़े एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें चीन के छोटे एवं मध्यम उद्योग के लिए एक औद्योगिक पार्क भी शामिल है।

    05:35 (IST)07 Jul 2020
    चीन के कारण अमेरिका और बाकी दुनिया को भारी क्षति पहुंची : ट्रंप

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि चीन के कारण अमेरिका और बाकी दुनिया को भारी क्षति पहुंची। पिछले कुछ महीनों से ट्रंप पूरी दुनिया में फैले घातक कोरोना वायरस के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। दुनियाभर में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण से 5,33,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से सबसे अधिक 1,32,000 मौत अकेले अमेरिका में हुई हैं। अमेरिका करीब 30 लाख मामलों के साथ संक्रमण के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर है।

    05:16 (IST)07 Jul 2020
    व्हाइट हाउस के अधिकारी ने दिया संकेत: अमेरिकी सेना चीन के साथ संघर्ष में भारत के साथ खड़ी रहेगी 

    व्हाइट हाउस के एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी सेना भारत और चीन के बीच या कहीं और भी संघर्ष के संबंध में उसके साथ ‘‘मजबूती से खड़ी रहेगी।’’ नौसेना द्वारा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को बढ़ाने के लिए दक्षिण चीन सागर में दो विमान वाहक पोत तैनात किये जाने के बाद अधिकारी का यह बयान आया है। व्हाइट हाउस के चीफ आॅफ स्टॉफ मार्क मीडोज ने एक सवाल के जवाब में ‘फॉक्स न्यूज’ को बताया, ‘‘संदेश स्पष्ट है। हम खड़े होकर चीन को या किसी और को सबसे शक्तिशाली या प्रभावी बल होने के संदर्भ में कमान नहीं थामने दे सकते, फिर चाहे वह उस क्षेत्र में हो या यहां।’’  

    04:22 (IST)07 Jul 2020
    चीनी कंपनी का पीओके में जलविद्युत परियोजना के लिए पाकिस्तान के साथ 150 करोड़ डॉलर का करार

    पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जलविद्युत परियोजना स्थापित करने के लिए चीन की एक कंपनी ने पाकिस्तान के साथ 150 करोड़ अमेरिकी डॉलर के समझौते पर सोमवार को हस्ताक्षर किए। यहां एक समारोह में ''''आजाद पत्तन जलविद्युत परियोजना'''' के लिए चीन की जेझुबा के साथ समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान प्रधानमंत्री इमरान खान भी मौजूद रहे। यह परियोजना पीओके के सुधनोती जिले में झेलम नदी पर है और इसके 2026 में पूरा होने की उम्मीद है। यह परियोजना महत्वाकांक्षी चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का हिस्सा है।

    23:22 (IST)06 Jul 2020
    आठ सप्ताह से पूर्वी लद्दाख में जारी है तनातनी

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि डोवाल और वांग इस पर भी सहमत हुए हैं कि दोनों पक्षों को एलएसी से पीछे हटने की जारी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करना चाहिए और भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों को चरणबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। दोनों विशेष प्रतिनिधि इस बारे में सहमत हुए कि कूटनीतिक और सैन्य अधिकारियों को अपनी चर्चा जारी रखनी चाहिए। आपस में बनी समझ को समयबद्ध तरीके से क्रियान्वित करना चाहिए। भारत-चीन सीमा मामलों पर चर्चा और समन्वय के लिए स्थापित तंत्र के ढांचे के तहत भी चर्चा जारी रहनी चाहिए। बता दें कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच पिछले आठ सप्ताह से पूर्वी लद्दाख में कई जगहों पर तनातनी जारी है। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच गत 30 जून को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की तीसरे दौर की वार्ता हुई थी जिसमें दोनों पक्ष गतिरोध खत्म करने के लिए ‘प्राथमिकता’ के रूप में तेजी से और चरणबद्ध तरीके से कदम उठाने पर सहमत हुए थे।

    22:28 (IST)06 Jul 2020
    पहली बार हुई है डोवाल और वांग के बीच बातचीत

    बता दें कि यह पहली बार है जब डोवाल और वांग ने जारी गतिरोध पर बात की है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारत इस पर कड़ी नजर रख रहा है कि क्या चीन गतिरोध वाले बिंदुओं से सैनिकों को हटा रहा है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि भारत को वैश्विक समर्थन और पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लद्दाख दौरे का बीजिंग पर अपनी सेना को हटाने के लिए कुछ असर पड़ा हो। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में ‘नेताओं के बीच बनी सहमति से दिशा-निर्देश लेने’ पर रजामंदी बनी कि द्विपक्षीय संबंधों में आगे के विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है और दोनों पक्षों को मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए।

    21:34 (IST)06 Jul 2020
    भारत को तनाव खिंचने की आशंका

    चीन लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भले ही 2 किलोमीटर पीछे हट गया है, लेकिन भारतीय सेना को लगता है कि पड़ोसी मुल्क के साथ यह तनाव लंबा खिंच सकता है। यही वजह है कि वह अपनी तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। शायद इसी के चलते भारतीय सेना अपनी बेहतरीन अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप (एम-777) के लिए ज्यादा गोले खरीदेगी। यह तोप काफी हल्की होती है। इसे आसानी से एक से दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सकता है। वहीं, लद्दाख में तैनात जवानों को ठंड से बचाने के लिए स्पेशल टेंट्स के इमरजेंसी ऑर्डर दिए जाएंगे। सेना के सीनियर अफसरों का मानना है कि चीन से तनाव लंबा चल सकता है, इसलिए स्पेशल टेंट्स की जरूरत पड़ेगी। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि चीन ने भी अपने सैनिकों को खास तरह के टेंट्स में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।

    21:30 (IST)06 Jul 2020
    20 सैनिक हुए थे शहीद

    हालांकि, 15 जून की हिंसक झड़प के बाद सेना ने तीन अतिरिक्त ब्रिगेड को तैनात किया है। हर ब्रिगेड में लगभग 3,000 सैनिक और सहायक होते हैं। चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में एक कमांडर सहित 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे और 70 से अधिक सैनिक घायल हुए थे। सूत्रों ने बताया कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश से तीन अतिरिक्त ब्रिगेड के लगभग 10,000 सैनिकों को लाया गया है। एलएसी पर अभी 14 कोर कमांड के तहत सेना की तीन डिविजन मौजूद हैं।

    21:17 (IST)06 Jul 2020
    लंबा चल सकता है चीन से तनाव

    चीन भले ही लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर 2 किलोमीटर पीछे हटने को तैयार हो गया है, लेकिन भारतीय सेना उसे लेकर सतर्क है। यही वजह है कि भारतीय सेना अपनी बेहतरीन अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप (एम-777) के लिए ज्यादा गोले खरीदेगी। यह तोप काफी हल्की है, इसे एक से दूसरी जगह आसानी से शिफ्ट किया जा सकता है। यही नहीं, लद्दाख में तैनात जवानों को ठंड से बचाने के लिए स्पेशल टेंट्स के इमरजेंसी ऑर्डर दिए जाएंगे। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि चीन से तनाव लंबा चल सकता है, इसलिए स्पेशल टेंट्स की जरूरत पड़ेगी। चीन ने भी अपने सैनिकों को खास तरह के टेंट्स में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है

    20:41 (IST)06 Jul 2020
    भारत ने तैनात की 3 अतिरिक्त ब्रिगेड

    वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ जारी तनातनी के बीच भारतीय सेना ने लद्दाख में करीब 30 हजार जवानों को तैनात किया है। पिछले महीने चीन के साथ हिंसक झड़प के बाद बढ़े तनाव के बीच भारत ने तीन अतिरिक्त ब्रिगेड की तैनाती की है। उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि सामान्य तौर पर 6 ब्रिगेड यानी 2 डिवीजनों को लद्दाख में एलएसी पर रखा जाता है। यहां पर सैनिकों को रोटेशन के आधार पर तैनात किया जाता है। 

    20:00 (IST)06 Jul 2020
    काम आया कूटनीतिक दबाव

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सप्ताहांत में हुए लद्दाख के अग्रिम इलाकों के दौरे और लगातार बनाए जा रहे कूटनीतिक दबाव के चलते लगता है कि भारत-चीन सीमा गतिरोध का कोई समाधान निकल आया है। यह बात ऐसे समय में सामने आई है, जब एक दिन पहले लद्दाख में एलएसी पर चार टकराव बिंदुओं में से तीन पर सेनाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। यह बात ऐसे समय में सामने आई है, जब एक दिन पहले लद्दाख में एलएसी पर चार टकराव बिंदुओं में से तीन पर सेनाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। भारत और चीन में सीमा पर जारी तनाव के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल ने रविवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ टेलीफोन पर बातचीत की। भारत और चीन के बीच लंबे वक्त से सीमा विवाद चल रहा है। इसे सुलझाने के लिए दोनों देशों की ओर से प्रतिनिधि तय किए गए हैं। भारत की ओर से अजीत डोवाल स्थायी प्रतिनिधि हैं।

    18:52 (IST)06 Jul 2020
    यह है कारण

    भारत से लगी सीमा पर स्थित गांवों में नेपाल अपने टेलीकॉम नेटवर्क को अपग्रेड कर रहा है। भारतीय खुफिया एजेंसियों का कहना है कि नेपाल चीन की एक दूरसंचार कंपनी की मदद से अपने सीमावर्ती गांवों में 4जी सेवाओं की शुरुआत करने पर काम कर रहा है। भारत-नेपाल सीमा पर अपने देश की ओर अधिकांश स्थानीय लोग नेपाली सिम कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। दरअसल, उन्हें भारतीय दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की तुलना में नेपाल से बेहतर गुणवत्ता वाली दूरसंचार सेवाएं मिलती हैं। वहीं, नेपाल सरकार के अधिकारी ने बताया है कि आगामी 2-3 महीनों में गावों में 4जी नेटवर्क के लिए मोबाइल टावर लगा दिए जाएंगे।

    18:23 (IST)06 Jul 2020
    एक ब्रिगेड में हैं 3000 सैनिक

    भारत ने गलवान की झड़प के बाद लद्दाख में सैनिकों की 3 एक्स्ट्रा ब्रिगेड तैनात की हैं। एक ब्रिगेड में 3000 सैनिक हैं। यानी अब लद्दाख में करीब 30,000 सैनिक तैनात हैं। जो अतिरिक्त जवान तैनात किए गए उन्हें पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तरप्रदेश से बुलाया गया है। एलएसी पर 14वीं कॉर्प्स कमांड के अंडर में आर्मी के डिवीजन हैं।

    18:02 (IST)06 Jul 2020
    राजनयिक और सैन्य स्तरीय वार्ता के बाद माना चीन

    15 जून की झड़प के बाद चीन रविवार को पीछे हटने को तैयार हुआ। भारत ने भी अपने सैनिक पीछे हटाए। दोनों ने मिलकर 4 किलोमीटर का नो-मैन जोन बना लिया है। 30 जून को दोनों देशों के सैन्य अधिकारयिों के बैठक में विवादित इलाकों से सेना को पीछे हटाने पर सहमति बनी थी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुक्रवार को लद्दाख दौरे के बाद तनाव कम करने की कोशिशें तेज हो गई थीं। 

    17:59 (IST)06 Jul 2020
    ये हैं वे विवादित पॉइंट्स

    गलवान की झड़प के 20 दिन बाद चीनी सेना एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर 2 किलोमीटर पीछे हट गई है। उसने टेंट और अस्थायी निर्माण हटा लिए हैं। हालांकि, गलवान के गहराई वाले इलाकों में चीन की बख्तरबंद गाड़ियां अब भी मौजूद हैं। लद्दाख में भारत-चीन के बीच 4 और बिंदुओं पर विवाद हैं। ये पॉइंट- पीपी-14 (गलवान रिवर वैली), पीपी-15, हॉट स्प्रिंग्स और फिंगर एरिया हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन प्वाइंट्स से भी जवान वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

    17:18 (IST)06 Jul 2020
    कमांडर स्तर पर हुई थी वार्ता

    चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा, 30 जून को चीन और भारतीय सेना के बीच कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी। दो दौर की वार्ता में बनी सहमित पर दोनों पक्ष अमल कर रहे हैं। लियियान से भारतीय मीडिया में आई उन खबरों पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी, जिनमें कहा गया है कि चीनी सैनिक पीछे हटे हैं।

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