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मनमोहन फार्मूले पर ही चल रही मोदी सरकार, पर राहुल ने दागे सवाल- ‘LAC पर हो क्या रहा है? चुप्पी तोड़े सरकार’

India-China border dispute: पूर्वी लद्दाख में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब करीब 250 चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच पांच मई को झड़प हो गई और इसके बाद स्थानीय कमांडरों के बीच बैठक के बाद दोनों पक्षों में कुछ सहमति बन सकी।

rahul gandhiकांग्रेस नेता राहुल गांधी। (वीडियो स्क्रीन शॉट)

India-China border dispute: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार (29 मई, 2020) को भारत-चीन सीमा विवाद पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चीन के साथ सीमा पर मौजूदा हालात को लेकर सरकार की ‘चुप्पी’ से अटकलों को बल मिल रहा है और ऐसे में सरकार को सही स्थिति के बारे में देश को बताना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने ट्वीट कर कहा कि चीन के साथ सीमा पर हालात को लेकर सरकार की चुप्पी से संकट के समय बड़े पैमाने पर अटकलों एवं अनिश्चितता को बल मिल रहा है। सरकार को सामने आकर स्पष्ट करना चाहिए और जो प्रयास हो रहे हैं, उसके बारे में देशवासियों को बताना चाहिए। कुछ दिनों पहले भी कांग्रेस नेता ने कहा था कि भारत-चीन सीमा पर मौजूदा गतिरोध को लेकर पारदर्शिता की जरूरत है।

दरअसल पूर्वी लद्दाख में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब करीब 250 चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच पांच मई को झड़प हो गई और इसके बाद स्थानीय कमांडरों के बीच बैठक के बाद दोनों पक्षों में कुछ सहमति बन सकी। इस घटना में भारतीय और चीनी पक्ष के 100 सैनिक घायल हो गए थे। इस घटना पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। नौ मई को उत्तरी सिक्किम में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी।

हालांकि भारत और चीन कूटनीतिक स्तर पर आठ साल पुराने फार्मूले के तहत विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि रिश्ते सामान्य करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा सकें। इस कूटनीतिक फॉर्मूले की स्थापना 2012 में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान हुई थी। तब बीजिंग में तत्कालीन भारतीय राजदूत एस. जयशंकर ने उस पर हस्ताक्षर किए थे। एस. जयशंकर वर्तमान की मोदी सरकार में विदेश मंत्री हैं। बता दें कि ये प्रयास मिलिट्री लेवेल पर होने वाली बातचीत से हटकर है और जमीनी स्तर पर तनाव को घटाने के लिए है।

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भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC) जनवरी 2012 में तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और उनके चीनी समकक्ष दाई बिंजुओ के बीच सीमा वार्ता के बाद स्थापित किया गया था। दोनों पक्षों की तरफ से संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों ने इसकी अध्यक्षता की थी। तब एक विशेष प्रतिनिधि को सीमा वार्ता के लिए मदद करने पर सहमति बनी थी, जो वर्तमान में एनएसए अजीत डोभाल के पास है।

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