India-China Talks: अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तकसिंग क्षेत्र में तनाव की खबरों के बीच भारत और चीन के बीच आने वाले दिनों में कोर कमांडर स्तर की वार्ता होने की संभावना है। इसके जरिए दोनों ही देश तनाव को कम करने के प्रयास शुरू कर सकते हैं। यह सब ऐसे वक्त में हो रहा है, जब कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री वांग यी के बीच मुलाकात हुई थी।

जानकारी के मुताबिक, भारतीय सेना के तृतीय कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया जल्द ही अपने चीनी समकक्ष और अन्य अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे। उनका मुख्यालय नागालैंड के दीमापुर के पास रंग पहाड़ में स्थित है। स्पीयर कोर वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में अभियानों के लिए जिम्मेदार है।

सेना प्रमुख धीरज सेठ ने की थी समीक्षा

हाल के हफ्तों में दोनों पक्षों के स्थानीय कमांडरों के बीच मुद्दों को सुलझाने के लिए कई दौर की बातचीत हुई है। इस सप्ताह की शुरुआत में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी स्पीयर कोर का दौरा किया ताकि सभी इकाइयों की परिचालन तत्परता और चल रही सीमा विकास पहलों की समीक्षा की जा सके।

सेना ने X पर एक पोस्ट में कहा, “साथ ही यह भी बताया कि उन्हें क्षमता विकास के सभी पहलुओं और युद्ध क्षमता को और मजबूत करने के लिए की गई पहलों के बारे में जानकारी दी गई थी।”

अजीत डोभाल और वांग-यी की मुलाकात

25 अगस्त को सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में मुलाकात की थी। एक दिन बाद यह घोषणा की गई कि भारत और चीन ने सीमांकन और प्रबंधन का जल्द समाधान निकालने की कोशिश की है।

वहीं पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में दो नई सीमा सैन्य हॉटलाइन, सैन्य कमांडर-स्तर की बैठकों के लिए दो नए बैठक स्थल और सितंबर में सीमा पर नदीं के पास बैठक आयोजित करने पर सहमति व्यक्ति की है।

कहां-कहां होगी बैठक

पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में दो सैन्य हॉटलाइन संभवतः लखनऊ और कोलकाता में सेना कमान मुख्यालय में होंगी। वरिष्ठ कमांडर स्तर की वार्ताओं के लिए उत्तराखंड के जोशीमठ में एक सीमा कर्मी बैठक (BPM) केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। अरुणाचल प्रदेश के तवांग और लद्दाख के चुशुल में पहले से ही ऐसे बैठक केंद्र मौजूद हैं। गौरतलब है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने की उम्मीद है।

नई दिल्ली और बीजिंग उन संबंधों को बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं, जो 2020 में पूर्वी लद्दाख में एलएसी के साथ सैन्य गतिरोध शुरू होने के बाद बुरी तरह बिगड़ गए थे। शी जिनपिंग ने आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत का दौरा किया था, जब वे नेताओं के दूसरे अनौपचारिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए चेन्नई के पास मामल्लापुरम गए थे।

यह भी पढ़ें: ‘भारत से किसी भी प्रकार के मुआवजे की मांग नहीं की’, नेपाली विदेशी मंत्री का बयान

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद जलवायु संबंधी आपदा को लेकर दावे किए जा रहे हैं। इस बीच नेपाली विदेश मंत्री शिसिर खनाल ने स्पष्ट किया कि काठमांडू ने भारत से किसी प्रकार का वित्तीय मुआवजा नहीं मांगा है। एएनआई से बातचीत में शिसिर खनाल ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि नेपाल ने अपने पड़ोसी देश से जलवायु क्षतिपूर्ति की औपचारिक मांग की है। पढ़िए पूरी खबर…