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अक्षय : 20 साल की उम्र में पीएचडी, गणित में फील्ड्स मेडल

अक्षय को 2007 में सलेम पुरस्कार, 2008 में शास्त्र रामानुजन पुरस्कार, 2016 में इंफोसिस पुरस्कार और 2017 में ओस्ट्रोवस्की पुरस्कार मिला है। उन्होंने नंबर थ्योरी, आॅटोमॉर्फिक फॉर्म्स, रिप्रेंजेंटेशन थ्योरी, लोकली सिमैट्रिक स्पेक्स और इर्गोडिक थ्योरी में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

अक्षय वेंकटेश की फाइल फोटो। (Image Source: Facebook/@AkshayVenkateshMathematician)

तेरह साल की उम्र में अक्षय वेंकटेश ने पत्रकारों से कहा था कि वह भौतिक शास्त्र में शोध या गणितज्ञ बनना चाहते हैं। दिल्ली में जन्मे अक्षय दो साल की उम्र में ही अपने अभिभावकों के साथ आॅस्ट्रेलिया के पर्थ शहर चले गए थे। बचपन से गणित की गुत्थियों को चुटकी में हल करने वाले अक्षय को पिछले दिनों फील्ड्स मेडल दिया गया। इस पुरस्कार को गणित के क्षेत्र का नोबेल भी कहा जाता है। वह अभी स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। असाधारण प्रतिभा के धनी अक्षय के हिस्से यह पहली उपलब्धि नहीं है। गणित और भौतिक शास्त्र के क्षेत्र में उन्होंने स्कूली दिनों से ही मेडल जीतने शुरू कर दिए थे। 1993 में जब अक्षय 11 साल के थे तो उन्होंने वर्जिनिया में आयोजित हुए 24वें अंतरराष्ट्रीय भौतिक ओलंपियाड में भाग लिया और कांस्य पदक जीता। इसके अगले साल हांगकांग में आयोजित हुए अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड में भी उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया। यानी 12 साल की उम्र में उन्होंने भौतिक और गणित के अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में पदक जीत लिए थे और ऐसा करने वाले वह अकेले भारतीय मूल के आॅस्ट्रेलियाई भी हैं।

जब 13 साल की उम्र थी, तब यूनिवर्सिटी आॅफ वेस्टर्न आॅस्ट्रेलिया में दाखिला लेने वाले वह सबसे कम उम्र के छात्र बने। 2002 में उन्होंने 20 साल की उम्र में प्रिंसटन विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी पूरी की। अमेरिका के मैस्साच्युसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (एमआइटी) से पोस्ट डॉक्ट्रल उपाधि हासिल करने के बाद न्यूयॉर्कविश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में काम करने लगे थे। अक्षय को 2007 में सलेम पुरस्कार, 2008 में शास्त्र रामानुजन पुरस्कार, 2016 में इंफोसिस पुरस्कार और 2017 में ओस्ट्रोवस्की पुरस्कार मिला है। उन्होंने नंबर थ्योरी, आॅटोमॉर्फिक फॉर्म्स, रिप्रेंजेंटेशन थ्योरी, लोकली सिमैट्रिक स्पेक्स और इर्गोडिक थ्योरी में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

फील्ड्स मेडल: यह पुरस्कार 40 साल से कम के गणितज्ञों को चार साल में एक बार दिया जाता है। अक्षय दूसरे आॅस्ट्रेलियाई और दूसरे ही भारतीय मूल के व्यक्ति हैं जिन्हें इस पुरस्कार से नवाजा गया है। आॅस्ट्रेलिया के टेरेंस टाओ को 2006 में संयुक्त रूप से यह पुरस्कार दिया गया था जबकि 2014 में भारतीय मूल के मंजुल भार्गव को यह पुरस्कार मिला था। अक्षय को फील्ड्स मेडल पुरस्कार के रूप में एक सोने का तमगा और 15000 कनाडाई डॉलर मिले। इस पुरस्कार की स्थापना कनाडा के गणितज्ञ जॉन चार्ल्स फील्ड्स के नाम पर 1936 में की गई थी।

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