बीते दिन कराची शहर में आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान के आरोपों पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि आतंकवाद को पालने वाला देश हम पर उंगली न उठाए।
कराची में सिंध रेंजर्स के एक कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा ने हमले के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है।
भारत ने आरोपों को किया खारिज
पाकिस्तान के आरोपों के बारे में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने कराची में हाल ही में हुई घटना को लेकर भारत पर पाकिस्तान के बेबुनियाद आरोपों वाली रिपोर्ट देखी हैं। हम उन्हें पूरी तरह से खारिज करते हैं।”
विदेश मंत्रालय ने कहा, “दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय, पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने गिरेबान में झांके, अपनी जमीन पर मौजूद आतंकी ढांचे के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे और राज्य की नीति के तौर पर आतंकवाद का सहारा लेने की अपनी आदत को छोड़े।”
पैरामिलिट्री हेडक्वार्टर पर हमला
ISPR के मुताबिक, 27 जून की रात कराची स्थित पाकिस्तानी पैरामिलिट्री सिंध रेंजर्स के हेडक्वार्टर के मुख्य गेट पर धमाका किया गया। इसके बाद हमलावरों ने कैंप की सुरक्षा घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए तीन आतंकियों को मार गिराया गया और एक घायल हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया।
पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि गिरफ्तार किया गया घायल आतंकी अफगान नागरिक है। इस हमले में पाकिस्तानी पैरामिलिट्री के तीन जवान भी मारे गए, जबकि चार घायल बताए गए।
पाकिस्तान ने क्या लगाए थे आरोप?
ISPR ने अपने बयान में आगे कहा कि हमलावर प्रतिबंधित संगठन जमात-उल-अहरार से जुड़े थे, जिसे पाकिस्तान ने भारत समर्थित संगठन बताया। पाकिस्तान ने कहा कि इस हमले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
जमात-उल-अहरार को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का एक अलग गुट माना जाता है। यह गुट अतीत में लाहौर और पाकिस्तानी शहरों में धमाके के लिए जिम्मेदार रहा है। ऐसा माना जाता है कि इस संगठन के बागडोर उमर खोरासानी के हाथों में है।
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