INDIA गठबंधन ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को लिखे पत्र को सार्वजनिक किया है। इसमें चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप लगाया है। साथ चेतावनी भी दी कि अगर न्यायपालिका ऐसी चिंताओं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देती है, तो यह लोकतंत्र के पूरी तरह से खत्म होने के संकेत हैं।

23 विपक्षी राजनीतिक पार्टी के शीर्ष नेताओं और एक निर्दलीय सांसद के साइन वाले छह पेज का यह पत्र में 28 जून को लिखा गया था। इसमें कहा गया कि आम तौर चीफ जस्टिस को पत्र नहीं लिखते। पत्र में कहा गया, “हमारी लोकतंत्र व्यवस्था खतरे में है, इसलिए हमने यह असामान्य रास्ता चुना है।”

लोकतंत्र अराजकता में बदल रहा है- INDIA गठबंधन

न्यायपालिका से इस मामले पर विचार करने का आग्रह करते हुए विपक्षी दलों ने कहा, “जब हर संभव रास्ता बंद हो जाता है तब भी लोग कोर्ट पर भरोसा करते हैं, इसलिए जब कोर्ट काई प्रतिक्रिया नहीं करती तो यह गणतंत्र के पूर्ण पतन का संकेत है। संस्थागत तंत्रों की फेल होने के कारण की लोकतंत्र अराजकता में बदल रहा है।”

आगे पत्र में लिखा, “यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि संस्थाओं में लोगों का भरोसा बना रहे और इसके लिए संस्थाओं को अपनी भूमिका निभानी होगी। हम न्यायपालिका पर सवाल नहीं उठा रहे। असल में, जब सभी सिस्टम फेल हो जाते हैं तो हम कोर्ट का सहारा लेते हैं। जब यह भी काम नहीं आता तो यह सवाल उठने लगता है कि अब हम किस ओर जाएं?”

‘जनता की इच्छा इस विश्वासघात का शिकार बन जाती है’

विपक्षी दलों ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संवैधानिक आवश्यकता है, “जब यह प्रक्रिया किसी न किसी रूप से खराब होती है तो परिणाम संदिग्ध हो जाता है। जनता की इच्छा इस विश्वासघात का शिकार बन जाती है।”

आप और डीएमके ने भी किए साइन

इस पत्र पर AAP और DMK ने भी हस्ताक्षर किए हैं, जो हाल ही में INDIA गंठबंधन से दूर रहे हैं। पत्र में कहा गया, “विपक्ष की गंभीर चिंता चुनाव आयोग, विशेष रूप से मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खुलेआम पक्षपात रवैये को लेकर है।”

पत्र में आगे कहा गया, “चुनाव प्रक्रिया के दौरान और उसके रिजल्ट में भाजपा का खुलेआम और बिना डरे समर्थन किया गया। चुनाव आयोग ने निष्पक्षता नहीं बरती है क्योंकि उसने सत्ताधारी दल से आचार संहिता (एमसीसी) के उल्लंघन के मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है, जबकि विपक्ष को ही निशाना बनाया जा रहा है।”

एसआईआर के मुद्दे को उठाया

INDIA गठबंधन के दलों ने आगे कहा कि सबसे अन्याय तब किया गया जब चुनाव आयोग और विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कथित तौर पर हर एक राज्य में वोटर लिस्ट को ठीक करने का फैसला किया। इसका मकसद यह पक्का करना था कि लिस्ट में सच में उन्हीं लोगों के नाम हों जो वोट देने के हकदार हैं, जैसा कि संविधान और जनिप्रतिनिधत्व अधिनियम 1951 के प्रावधानों में बताया गया है।

पत्र में आगे कहा गया, मुख्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक, वोटर लिस्ट को ठीक करने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया में जरूरत थी ताकि उनकी विश्वसनीयता बनी रहे, लेकिन नतीजा बिल्कुल विपरीत निकला है।

एसआईआर को गलत समय पर उठाया गया कदम और बड़ी आपदा बताते हुए विपक्ष ने कहा, “पहली बार अपनाई गई डाक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया मूल रूप से लोगों को बाहर रखने वाली और राजनीतिक मकसद से प्रेरित थी। फॉर्म भरने और डॉक्यूमेंट्स दिखाने के आधार पर वोटरों के सत्यापन और नागरिकता पर सवाल उठाने से वोटर्स अपने वोटिंग के अधिकार से वंचित हो गए।”

किन बड़े नेताओं ने किए दस्तखत?

दस्तखत करने वालों में राज्यसभा विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा के प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, TMC प्रमुख ममता बनर्जी, DMK के नेता तिरुचि शिवा, RJD के तेजस्वी यादव, AAP के संजय सिंह और गठबंधन के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे।

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