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मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने का मामला, भारत ने संरा और चीन को सुनाई खरी-खरी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्य चीन ने इस साल 31 मार्च को अजहर पर प्रतिबंध लगाने के भारत के कदम में रोड़ा डाला था।

Author नई दिल्ली | October 6, 2016 8:24 PM
संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप और संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन। (PTI Photo/9 September, 2016)

भारत ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने पर लगी ‘तकनीकी रोक’ को बढ़ाए जाने पर गुरुवार (6 अक्टूबर) को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अगर संयुक्त राष्ट्र मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की भारत की मांग पर कार्रवाई नहीं करता तो यह एक खतरनाक संदेश देगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने चीन का नाम लिए बिना कहा कि केवल एक देश ने तकनीकी रोक लगाई थी और पाबंदी पर अवरोध तीन और महीने के लिए बढ़ा दिया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति द्वारा किसी को आतंकवादी घोषणा करने के तरीके को पूरी तरह अपारदर्शी बताते हुए उसकी आलोचना की। स्वरूप ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति पहले ही पाकिस्तान के जैश-ए-मोहम्मद को निषिद्ध कर चुकी है। हालांकि उन्होंने कहा कि आयोग ने संगठन के मुख्य सरगना के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी जो निर्बाध अपनी आतंकी गतिविधियां करता रहता है।

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रोक बढ़ाए जाने पर प्रतिक्रिया में स्वरूप ने कहा, ‘समिति पहले ही पिछले छह महीने तक हमारी दलील पर मंथन कर चुकी है। वह तीन महीने और सोचने के लिए लेगी। लेकिन इससे आतंकी संगठन घोषित करने वाली समिति को लेकर अजीब हालात नहीं बदलेंगे बल्कि संगठन के सर्वाधिक सक्रिय और खतरनाक आतंकी को प्रतिबंधित घोषित करने की जरूरत की अनदेखी होगी।’ उन्होंने कहा, ‘हमने समिति को बताया कि हमारी दलील के आधार पर 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत अजहर को आतंकवादी घोषित करने की अपेक्षा की जाती है। इस तरह की घोषणा से दुनियाभर में सभी आतंकी समूहों को कड़ा संदेश जाएगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब और आतंकवाद को लेकर चुनिंदा दृष्टिकोण नहीं रखेगा या नहीं सहेगा।’

प्रवक्ता ने कहा, ‘अच्छे और बुरे आतंकवाद के बीच अंतर गलत और प्रतिकूल है। इसके साथ ही अगर वह भारत के तर्क पर कार्रवाई नहीं करता तो खतरनाक संदेश जाएगा।’ स्वरूप ने कहा कि चीन की सरकार के साथ भी इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ऐसे किसी भी कदम का स्वागत करेगा जो संयुक्त राष्ट्र की समिति के कामकाज को इस तरह से कराना सुनिश्चित करता हो जहां ज्ञात आतंकवादियों पर प्रतिबंध राजनीतिक विचार-विमर्श से बाधित नहीं हों और इस प्रक्रिया में पूरी तरह अपारदर्शिता की व्यवस्था बदले।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्य चीन ने इस साल 31 मार्च को अजहर पर प्रतिबंध लगाने के भारत के कदम में रोड़ा डाला था। 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में भारत की अर्जी पर अवरोध पैदा करने वाला केवल चीन था और बाकी 14 देशों ने अजहर को ‘1267 प्रतिबंध सूची में’ डालने के भारत के प्रयासों को समर्थन जताया था। चीन की तकनीकी रोक सोमवार को समाप्त हो गई थी और उसने शनिवार (1 सितंबर) को तकनीकी रोक बढ़ाने की घोषणा कर दी थी। अगर चीन आगे और आपत्ति नहीं जताता तो अजहर को आतंकवादी घोषित करने वाला प्रस्ताव स्वत: ही पारित हो गया होता।

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