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LAC विवाद के बीच भारत ने चीन को हराया! बना UN की ECOSOC का सदस्य, जानें क्या है यह संस्था और इसके मायने

यूनाइटेड नेशंस में भारत के परमानेंट प्रतिनिधि टीएस त्रिमूर्ति ने बताया है कि 'भारत ने सम्मानित ECOSOC की सीट जीत ली है। यह लिंग समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण के हमारे समर्पण का उदाहरण है।

united nations CHINA ECOSOCभारत, चीन को पछाड़कर यूनाइटेड नेशंस के प्रतिष्ठित ECOSOC का सदस्य चुना गया है। (रायटर्स/फाइल इमेज)

सीमा पर जारी विवाद के बीच भारत ने यूनाइटेड नेशन में हुए एक चुनाव में चीन को पटखनी दे दी है। दरअसल भारत यूनाइटेड नेशंस के स्टेटस ऑफ वूमेन कमीशन का सदस्य चुना गया है। यह कमीशन यूनाइटेड नेशंस के इकोनॉमिक एंड सोशल काउंसिल (ECOSOC) का हिस्सा है। बता दें कि इस कमीशन का सदस्य बनने के लिए भारत ने चीन को पछाड़ा है।

यूनाइटेड नेशंस में भारत के परमानेंट प्रतिनिधि टीएस त्रिमूर्ति ने बताया है कि ‘भारत ने सम्मानित ECOSOC की सीट जीत ली है। यह लिंग समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण के हमारे समर्पण का उदाहरण है। हम समर्थन के लिए सदस्य देशों का आभार व्यक्त करते हैं।’  गौरतलब है कि इस कमीशन का सदस्य बनने की रेस में भारत के अलावा चीन और अफगानिस्तान भी थे। 54 सदस्यों के बीच भारत और अफगानिस्तान ने मत प्रक्रिया में जीत हासिल की लेकिन चीन तो आधा रास्ता भी पार नहीं कर पाया और पहले ही रेस से बाहर हो गया।

भारत स्टेटस ऑफ वूमेन कमीशन का अगले 4 साल यानि कि 2021 से 2025 तक सदस्य रहेगा। एशिया पैसिफिक क्षेत्र की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में भारत और अफगानिस्तान ने बाजी मारी है। चुनाव के दौरान अफगानिस्तान को 39 और भारत को 38 वोट मिले हैं। यूनाइटेड नेशंस की सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन को इस चुनाव में सिर्फ 27 वोट मिले और वह बहुमत पाने के लिए जरूरी 28 सीटे भी नहीं पा सका।

स्टेटस ऑफ कमीशन में चीन की हार को वहां महिलाओं के सशक्तिकरण और समानता के खराब रिकॉर्ड के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। भारत और अफगानिस्तान के अलावा स्टेटस ऑफ वूमेन आयोग के अन्य सदस्य देशों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रिया, डोमिनिकन रिपब्लिक, इजरायल, लाटविया, नाइजीरिया, टर्की और जांबिया शामिल हैं।

भारत की यह जीत इस मायने में भी खास है क्योंकि इन दिनों सीमा पर चीन के साथ तनातनी जारी है। दुनिया के कई देश जिस तरह से भारत के साथ खड़े दिखाई दिए हैं, उससे भी वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता का पता चलता है। बीते करीब 5 माह से भारत चीन की सेनाएं लद्दाख में आमने-सामने खड़ी हैं। हालांकि बातचीत से विवाद को हल करने की कोशिशें जारी हैं लेकिन यदि हालात जल्द ही नहीं संभले तो विवाद बढ़ने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

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