India-Bangladesh Border Fencing: पश्चिम बंगाल की नई सरकार के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी मंत्रियों के साथ पहली बैठक कई अहम बड़े फैसले लिए, जिनमें से एक बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग को लेकर बीएसएफ को जमीन देने से भी जुड़ा है। यह वो मुद्दा है, जिसको लेकर केंद्र की मोदी सरकार और पूर्व की ममता बनर्जी की सरकार के बीच लंबे समय तक टकराव रहा था। इसके चलते ही बीजेपी ममता बनर्जी और टीएमसी पर बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों की मदद करने का आरोप लगाती थी।
दरअसल, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ऐलान किया कि अब पश्चिम बंगाल से लगी बांग्लादेश की सीमा पर बाड़ेबंदी (फेंसिंग) के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन दी जाएगी। सीएम ने कहा कि भूमि एवं राजस्व विभाग और मुख्य सचिव को अगले 45 दिनों के अंदर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
अदालतों के आदेशों की अनदेखी तक का आरोप
बीजेपी की सरकार के गठन के बाद नए सीएम शुभेंदु अधिकारी की तरफ से यह भी कहा गया कि पिछली सरकार (ममता बनर्जी की टीएमसी सरकार) ने अवैध घुसपैठियों के हित में केंद्र और अदालतों के निर्देशों की अनदेखी की थी। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि यह मुद्दा कोई नया नहीं है, बल्कि भारत अपनी सबसे लंबी सीमा बांग्लादेश से ही शेयर करता है।
इस सीमा का अधिकतर इलाका खुला है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी BSF के पास है। यह वो क्षेत्र है, जहां घने जंगल, नदी, तालाब, दलदल, आदि होने की वजह से यह क्षेत्र असुरक्षित ही रहते हैं। ऐसे में कई बार बांग्लादेश में रहने वाले लोग इस सीमा के जरिए भारत में घुसपैठ भी करते हैं। इसे लेकर केंद्र सरकार से लेकर अदालतों ने समय-समय पर चिंता जाहिर की है।
5 राज्यों की लगती है सीमा
देश के 5 राज्य और बांग्लादेश के 6 डिवीजन यानी प्रभाग इस सीमा के दोनों ओर स्थित हैं। इनमें पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा शामिल हैं। बांग्लादेश से सीमा साझा करते हैं। दूसरी तरफ बांग्लादेश के मैमनसिंह, खुलना, राजशाही, रंगपुर, सिलहट और चटगांव डिवीजन इस अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए भारत से जुड़ते हैं।
सुरक्षा के इंतजामों को लेकर बता दें कि भारत और बांग्लादेश की 4,096.7 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा में से भारत सरकार की तरफ से 2024 तक 3180 किलोमीटर के हिस्से पर पूरी तरह से बाड़ेबंदी की जा चुकी है। दिसंबर 2025 को संसद में दी गई जानकारी में भारत ने बांग्लादेश से लगती करीब 80 फीसदी सीमा पर बाड़े लगा लिए थे। तब फेंसिंग का आंकड़ा बढ़कर 3239.92 किमी हो चुका था।
कितनी हो चुकी है बाड़ेबंदी
इस मामले में सरकार का कहना था कि अब करीब 20 फीसदी यानी 856 किमी सीमा ही बिना बाड़े के है। पीआईबी द्वारा जारी की गई अगस्त की प्रेस रिलीज के अनुसार भारत और बांग्लादेश के बीच जो सबसे बड़ा बिना बाड़े का हिस्सा था, वह पश्चिम बंगाल में है। राज्य की कुल 2216.7 किमी की सीमा में से अब तक 1647.69 किमी सीमा पर बाड़ेबंदी की जा चुकी है, जबकि करीब 569 किमी का दायरा अब भी बिना बाड़े के है।
मतलब ये कि भारत-बांग्लादेश के बीच बिना बाड़े वाली सीमा का 67 प्रतिशत केवल पश्चिम बंगाल का ही है। इसमें से 112.78 किमी के हिस्से को ऐसे क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है, जहां घने जंगल, पहाड़, जलाशय, आदि होने की वजह से बाड़ेबंदी नहीं की जा सकती है। इसीलिए यहां स्मार्ट फेंसिंग के तरीके अपनाने की बातें कहीं गई हैं, लेकिन उस कदम में काफी समय लग रहा है।
केंद्र राज्य के बीच टकराव
बांग्लादेश और भारत के बीच एक बड़े क्षेत्र में बाड़ेबंदी न हो पाने के पीछे भौगोलिक परिस्थितियां बताई जाती रही हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार के लंबे समय तक असहयोग की वजह से यहां सीमाई क्षेत्रों में बाड़े नहीं लगाए जा सके। इसके अलावा भारत-बांग्लादेश का एक सीमा समझौता भी इसमें अड़चनें पेश करता रहा है। कोर्ट के आदेशों के बावजूद इस मामले का कोई निस्तारण नहीं हो पाता है।
क्या कहती हैं सुरक्षा एजेंसियां?
इस मुद्दे पर रक्षा एजेंसियों कई बार यह चेतावनी दी है कि सीमा पर बाड़ेबंदी से मवेशियों और बाकी प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी के अवैध व्यापार को भारी नुकसान पहुंचता है। इस व्यापार से जुड़े लोगों को भारी नुकसान होता है, जिसके कारण वे भी जानबूझकर फेंसिंग के काम में रुकावटें डालते हैं। कई बार सीमा पर गश्त कर रहे सुरक्षा बलों को स्थानीय लोगों से टकराव का भी सामना करना पड़ा है।
ऐसे में अब बीजेपी सरकार का कहना है कि बीएसएफ को बाड़ाबंदी करने में सहूलियत मिलेगी, तो बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ को रोकने मदद मिलेगी। हालांकि, अभी इस प्रक्रिया में भी समय लगेगा, क्योंकि यह त्वरित कार्रवाई वाला नहीं बल्कि एक लंबा काम है।
बंगाल कैबिनेट विभागों का बंटवारा: शुभेंदु सरकार में दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल को बड़ी जिम्मेदारी, यहां देखें किसे क्या मिला
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को नबन्ना में आयोजित अपनी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक के बाद नव नियुक्त मंत्रियों को मंत्रिमंडल के विभागों का आवंटन किया। शुक्रवार को नवगठित बीजेपी सरकार में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ पांच नेताओं दिलीप घोष, अशोक कीर्तनिया, क्षुदिराम टुडू, अग्निमित्रा पॉल और निसीथ प्रमाणिक ने मंत्री पद की शपथ ली। पढ़िए पूरी खबर…
