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विदेशियों को भाड़े की कोख पर लगी लगाम

सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि भारत में विदेशी नागरिक किराए की कोख नहीं ले सकते हैं। सरकार ने अदालत में दाखिल एक हलफनामे में कहा है..

Author नई दिल्ली | Published on: October 29, 2015 1:43 AM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है।

सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि भारत में विदेशी नागरिक किराए की कोख नहीं ले सकते हैं। सरकार ने अदालत में दाखिल एक हलफनामे में कहा है कि किराए के कोख की सेवा सिर्फ भारतीय दंपतियों के लिए ही उपलब्ध है। सरकार किराए की कोख के व्यवसायीकरण का समर्थन नहीं करती है। सरकार ने अदालत से कहा कि उसने विदेशियों के लिए व्यावसायिक किराए की कोख की खातिर मानव भ्रूण आयात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय किया है।

हाल ही में विदेशी व्यापार महानिदेशालय ने कृत्रिम गर्भाधान के लिए भारत में मानव भ्रूण आयात की अनुमति देने संबंधी अपनी 2013 की अधिसूचना वापस लेने का निर्णण किया था। केंद्र ने स्पष्ट किया कि अनुसंधान कार्य के लिए भ्रूण के आयात पर प्रतिबंध नहीं होगा। हलफनामे में कहा गया है कि किराए के कोख की सेवाओं के व्यवसायीकरण पर प्रतिबंध लगाने और इसे दंडित करने के लिए पर्याप्त प्रावधान किए जाएंगे। इस बीच पीठ ने उस खबर पर अप्रसन्नता जताई जिसमें कहा गया था कि सरकार दूसरे देशों के दंपतियों को भारत में किराए की मां के माध्यम से बच्चे की अनुमति नहीं देगी।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एनवी रमण ने शीर्ष अदालत में जवाब दाखिल होने से पहले एक अखबार में किराए की कोख के व्यवसायीकरण के बारे में सरकार के दृष्टिकोण का विवरण प्रकाशित होने पर नाराजगी जाहिर की। शीर्ष अदालत में हलफनामा दाखिल होने से पहले ही इसके प्रमुख अंश एक अंग्रेजी समाचार पत्र में लीक होने को गंभीरता से लेते हुए जजों ने तल्ख शब्दों में कहा-हमें आपसे कोई स्पष्टीकरण नहीं चाहिए। आप हलफनामा रजिस्ट्री में दाखिल कीजिए। पीठ ने महान्यायवादी रंजीत कुमार से कहा कि यह जवाब अदालत में दाखिल करने की बजाय इसे रजिस्ट्री में दाखिल कीजिए।

इस समाचार के अनुसार केंद्र सरकार अपने हलफनामे में किराए की कोख के व्यवसायीकरण पर प्रतिबंध लगाएगी और दूसरे देशों के दंपतियों को किराए की कोख के माध्यम से बच्चे प्राप्त करने की अनुमति नहीं देगी। इससे पहले अदालत ने किराए की कोख के व्यवसायीकरण को कानून के दायरे में लाने का निर्देश देते हुए मानव भू्रण के कारोबार पर चिंता व्यक्त की और सरकार से कहा था कि मानव भ्रूण के आयात की नीति पर फिर से गौर किया जाए।

अदालत ने कहा था कि आप मानव भ्रूण के कारोबार की अनुमति दे रहे हैं जबकि किराए की कोख के व्यवसायीकरण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। परंतु देश में किसी कानूनी मान्यता के बगैर ही यह कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। केंद्र ने 2013 में एक अधिसूचना जारी करके कृत्रिम गर्भाधान के लिए मानव भ्रूण के आयात की अनुमति दी थी। इस अधिसूचना ने विदेशी दंपतियों को जमा (फ्रोजेन) मानव भ्रूण भारत लाकर उसे किराए की कोख को देने का मार्ग प्रशस्त कर दिया था।
इस मामले को लेकर वकील जयश्री वाड ने अदालत में जनहित याचिका दायर कर रखी है। इस याचिका में कहा गया है कि भारत एक तरह से बच्चा पैदा करने वाली फैक्ट्री बन गया है क्योंकि बड़ी संख्या में विदेशी दंपति किराए की कोख की तलाश में यहां आ रहे हैं।

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