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29000 करोड़ रुपये कम कीमत पर मोदी सरकार ने पक्की की Rafale डील, भारत के पास होगा पाकिस्तान से ज्यादा ताकतवर जहाज

फ्रांस की ओर से मई 2015 में इस सौदे के लिए 89000 करोड़ रूपये की रकम का आॅफर दिया गया था, जिसे सरकार बातचीत के जरिए 29000 करोड़ रुपए कम कराकर 59000 करोड़ तक ले आयी है।

Author नई दिल्ली | September 22, 2016 1:08 PM
राफेल लड़ाकू विमान जमीनी सैन्य ठिकाने के साथ विमानवाहक पोत से भी उड़ान भर सकता है।

भारत और फ्रांस के बीच अत्याधुनिक रॉफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर दोनों देशों के बीच अंतिम रजामंदी बन चुकी है। इस डील पर 23 सितंबर को दोनों देश हस्ताक्षर करेंगे। फ्रांस के साथ 7.8 बिलियन यूरो यानि करीब 59 हजार करोड़ रुपये के इस सौदे के तहत भारत को 36 रॉफेल लड़ाकू विमान हासिल होगा। भारत ने इसके लिए फ्रांस के साथ सौदे की पूरी रूपरेखा तय कर ली है और फ्रांस के रक्षा मंत्री ज्यां यीव ली ड्रियान की गुरुवार से शुरू हो रही नई दिल्ली यात्रा के दौरान इस खरीद सौदे पर मुहर लग जाएगी। सौदे के बाद भारतीय वायुसेना को तीन साल के भीतर पहला रॉफेल लड़ाकू विमान मिल जाएगा। इस करार के साढ़े पांच साल के भीतर फ्रांस भारत को सभी 36 विमानों की आपूर्ती करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति की बुधवार को हुई बैठक में रॉफेल विमान सौदे पर हुई चर्चा में सरकार ने वायुसेना की जरूरतों को देखते हुए इस सौदे को अपनी अंतिम मंजूरी देने का निर्णय लिया।

रॉफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण करने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसाल्ट करार के तहत इन विमानों के साथ हवा से दुश्मन पर अचूक निशाना साधने वाली हथियार प्रणाली भी भारतीय वायुसेना को मुहैया कराएगी। रॉफेल लड़ाकू विमान में मीटीअर मिसाइल और माइका MICA मिसाइल प्रणाली से लैस होगा। यह मिसाइल सिस्टम पाकिस्तान के पास मौजूद मिसाइल सिस्टम से ज्यादा घातक और संहारक होगा। सरकार ने रक्षा सौदों में होने वाली दलाली पर रोक लगाने के लिए डसाल्ट कंपनी की जगह फ्रांस सरकार के माध्यम से करीब 60 करोड़ के रॉफेल सौदे को अमलीजामा पहनाने का फैसला लिया था। मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान इस पर दोनों देशों के बीच समझौता हुआ था लेकिन, विमानों की कीमत और सौदे की शर्तों को लेकर बातचीत चल रही थी।

रॉफेल खरीद समझौते के तहत डसाल्ट भारतीय वायुसेना और उसके पायलटों को प्रशिक्षण भी देगी। समझौते में यह प्रावधान भी होगा कि विमानों के साथ मिलने वाले हथियारों और मिसाइलों के रख रखाव का डिपो तैयार नहीं होने की स्थिति में फ्रांस छह माह तक अपने यहां इन सामनों को रखेगा और कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेगा। इतना ही नहीं कंपनी विमान के कल पुर्जे सात साल तक शुरुआती मूल्य पर ही मुहैया कराएगी।

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2007 में यूपीए सरकार के दौरान भारत फ्रांस के साथ 126 रॉफेल विमानों का सौदा करना चाहता था। इस करार के तहत 36 रॉफेल विमानों को सीधे कंपनी डसाल्ट-एवियशन से खरीदा जाना तय हुआ था और बाकी के 90 विमान भारत में तैयार होने थे। नरेंद्र मोदी सरकार ने पुराने सौदे को रद्द कर नई डील सीधे फ्रांस सरकार से कर डाली। गौरतलब है कि शुरुआती समझौते के तहत पहले यह प्रावधान पांच साल का था। लेकिन कीमतों पर भारत की फ्रांस से हुई डील में इसे दो साल और बढ़ाया गया। गौरतलब है कि फ्रांस की ओर से मई 2015 में इस सौदे के लिए 89000 करोड़ रूपये की रकम का आॅफर दिया गया था, जिसे सरकार बातचीत के जरिए 29000 करोड़ रुपए कम कराकर 59000 करोड़ तक ले आयी है।

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प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस में घोषणा के बावजूद नई डील में कीमत और ऑफसेट क्लॉज को लेकर कईं रुकावटें थीं। फ्रांस नए सौदे की कीमत करीब 65 हजार करोड़ रुपये चाहता था। फ्रांस 30% प्रतिशत ऑफसेट क्लॉज चाहता था। लेकिन, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर सौदे की कीमत कम कराना चाहते थे। अब ये सौदा 59 हजार करोड़ में तय हुआ है। फ्रांस 50 % ऑफसेट क्लॉज़ के लिए भी तैयार हो गया है। इस क्लॉज़ के तहत फ्रांस सौदे का 50 प्रतिशत भारत में निवेश करेगा।

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