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लद्दाख में भारत-चीन के बीच और बढ़ी तनातनी, भारतीय जवानों पर चीनी सीमा में घुसपैठ के आरोप, दोनों ने तैनात किए अतिरिक्त जवान

भारत ने लद्दाख के पूर्व में स्थित गलवन रिवर एरिया के पास सड़क निर्माण चालू रखा है, जिस पर चीनी सेना लगातार आपत्ति जताती आ रही है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: May 21, 2020 8:44 AM
भारत-चीन के बीच सीमा विवाद से उपजे तनाव को लेकर अब तक दो बार कमांडर स्तर की बातचीत हो चुकी है।

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बढ़ता ही जा रहा है। चीनी और भारतीय सेना के स्थानीय मिलिट्री कमांडरों के बीच हाल ही में पांगोंग सो में दोनों सेनाओं के बीच सीमा पर हुई तनातनी को लेकर बैठक हुई। बताया गया है कि इस बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला और बीजिंग ने भारत पर अपनी सीमा के अंदर निर्माण कार्य का आरोप लगाते हुए जरूरी कार्रवाई की बात कही है। पांगोंग सो वही इलाका है, जहां दो हफ्ते पहले दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं।

चीन का कहना है कि भारतीय सेना लद्दाख के पास चीनी सीमा में स्थित बाइजिंग और लुजिन दुआन सेक्शन में अवैध रूप से प्रवेश कर गई, जिससे चीन की बॉर्डर पैट्रोल टीम को गश्त करने में दिक्कते आई हैं। चीन का आरोप है कि भारत खुद ही सीमाई इलाकों की यथापूर्व स्थिति बदलना चाहता है।

इस मामले पर जहां सेना और विदेश मंत्रालय की ओर से चुप्पी साधी गई है, वहीं नई दिल्ली के अफसरों ने इसे कोरोना से लड़ाई के मद्देनजर अति-संवेदनशील स्थिति बताया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को मिली जानकारी के मुताबिक, भारत ने अपनी सीमा के अंदर आने वाले गलवन रिवर एरिया में निर्माण कार्य जारी रखा है, जिस पर चीन कई बार आपत्ति जता चुका है और अब दोनों ही तरफ से इस जगह से लगी सीमाओं पर सेना की तैनाती की जा रही है।

बता दें कि भारत इस वक्त श्योक और गलवन नदी के संगम पर निर्माण कार्य कर रहा है, जो कि पांगोंग सो लेक से 200 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। सूत्रों के मुताबिक, चीन ने डब्रुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (चीन से लगी आधिकारिक सीमा) की तरफ निर्माण करने पर आपत्ति जताई है। चीन ने इस इलाके के पास बड़ी संख्या में टुकड़ियां पहुंचाई हैं और 70-80 टेंट लगाए हैं। साथ ही कई बड़े वाहन भी तैनात किए हैं। यह इलाका भारतीय सीमा के काफी करीब है।

एक सूत्र ने बताया कि पांगोंग सो के उलट गलवन इलाका भारत और चीन के बीच विवादित नहीं है। दोनों ही पक्ष इस जगह LAC को मानते हैं और अपनी तरफ गश्त करते हैं। इस इलाके में पिछले दो सालों से कोई घुसपैठ की घटा भी नहीं हुई। मुद्दा सिर्फ सड़क निर्माण है, जो कि हमारे क्षेत्र में है। इसलिए चीन की तरफ से कोई भी आपत्ति समझना भारत के लिए मुश्किल है।”

दोनों देशों की सेनाओं की मंगलवार को हुई बैठक के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा था कि चीन की सीमाई टुकड़ियां बॉर्डर पर शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इस दौरान हम अपनी स्वायत्ता और सुरक्षा को भी मजबूती से रखेंगे।

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