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दुनिया की छह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एक भारत, पर यहां की स्थिति अच्छी है क्या? आरएसएस महासचिव ने उठाया गरीबी, बेरोजगारी का मुद्दा

आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि देश में गरीबी दानव की तरह हमारे सामने खड़ी है, जिसको खत्म करना बहुत जरूरी है।

दुनिया की छह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एक भारत, पर यहां की स्थिति अच्छी है क्या? आरएसएस महासचिव ने उठाया गरीबी, बेरोजगारी का मुद्दा
आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबले (फोटो- एएनआई)

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने रविवार (2 अक्टूबर, 2022) को देश में गरीबी, बेरोजगारी और बढ़ती असमानता के मुद्दे को उठाया। आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि बढ़ती आर्थिक असमानता एक प्रमुख मुद्दा है। उन्होंने सवाल किया कि भारत दुनियाभर की 6 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन क्या यहां की स्थिति अच्छी है। उन्होंने देश में गरीबी और बेरोजगारी पर चिंता जताई और साथ ही उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत की शीर्ष 1 प्रतिशत आबादी के पास देश की आय का पांचवां (20%) हिस्सा है। वहीं, देश की 50 फीसदी आबादी के पास देश की आय का महज 13 फीसदी है। गरीबी और विकास पर संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणियों का हवाला देते हुए होसाबले ने कहा, “देश के एक बड़े हिस्से में अभी भी स्वच्छ पानी और पौष्टिक भोजन नहीं है। नागरिक संघर्ष और शिक्षा का खराब स्तर भी गरीबी का एक कारण है। इसीलिए एक नई शिक्षा नीति की शुरुआत की गई है। यहां तक ​​कि जलवायु परिवर्तन भी गरीबी का एक कारण है और कई जगहों पर सरकार की अक्षमता गरीबी का कारण है।

उन्होंने कहा कि देश में गरीबी दानव की तरह हमारे सामने खड़ी है, जिसको खत्म करना बहुत जरूरी है। उन्होंने देश में गरीबी को लेकर चिंता जताते हुए कहा, “20 करोड़ लोग अभी भी गरीबी रेखा से नीचे हैं, यह एक ऐसा आंकड़ा है जो दुख पहुंचाता है। 23 करोड़ लोगों की प्रतिदिन की आय 375 रुपये से कम है। देश में चार करोड़ बेरोजगार हैं।”

आरएसएस पिछले एक साल से स्थानीय और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देकर उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ाने के लिए एक अभियान चला रहा है। सूत्रों ने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच सहित आरएसएस से जुड़े छह संगठनों की भागीदारी के साथ लगभग 700 जिलों में आंदोलन को सक्रिय किया गया है।

होसाबले ने कहा, “कोरोना काल में हमने सीखा कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार और स्थानीय प्रतिभाओं का उपयोग करके ग्रामीण स्तर पर रोजगार पैदा करने की संभावना है। इसीलिए स्वावलंबी भारत अभियान शुरू किया गया था। हमें सिर्फ अखिल भारतीय स्तर की योजनाओं की ही नहीं, बल्कि स्थानीय योजनाओं की भी जरूरत है। यह कृषि, कौशल विकास, विपणन आदि के क्षेत्र में किया जा सकता है। हम कुटीर उद्योग को पुनर्जीवित कर सकते हैं। इसी प्रकार चिकित्सा के क्षेत्र में भी स्थानीय स्तर पर बहुत सी आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण किया जा सकता है। हमें स्वरोजगार और उद्यमिता में रुचि रखने वाले लोगों को खोजने की जरूरत है।”

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First published on: 02-10-2022 at 10:56:29 pm