अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को शांति समझौता (MoU) हुआ था। शांति समझौते के बाद के तीन हफ्तों में भारत उन शीर्ष देशों में शामिल है जिसकी ओर से जहाजों के होर्मुज जलमार्ग को पार करने के लिए सबसे ज्यादा आवेदन किए गए।
ईरान की ओर से जारी किए गए आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। होर्मुज जलमार्ग को पार करने के लिए ईरान के द्वारा ही रास्ते तय किए गए थे।
ईरान की ओर से होर्मुज जलमार्ग में जहाज के आने-जाने को नियंत्रित करने के लिए पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) बनाई गई थी। पीजीएसए के मुताबिक, इन तीन हफ्तों के दौरान 200 से ज्यादा गैर ईरानी जहाजों ने परमिट और बीमा कवरेज हासिल किया।
फारस की खाड़ी से जहाजों के बाहर निकलने के लिए सबसे ज्यादा आवेदन चीन ने किया और यह आंकड़ा 21% था। इसके बाद 20% के साथ भारत दूसरे नंबर पर रहा। एशिया के बाकी देशों की इसमें हिस्सेदारी 29% थी।
जहां तक फारस की खाड़ी में आने वाले जहाजों का सवाल है, 21% हिस्सेदारी के साथ भारत पहले नंबर पर और चीन 19% के साथ दूसरे नंबर पर रहा। एशिया के बाकी देशों की हिस्सेदारी 20% थी।
ईरान का दावा- होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह बंद
पीजीएसए की ओर से जारी आंकड़ों में वे जहाज शामिल नहीं हैं जिन्होंने होर्मुज जलमार्ग पार किया या ऐसा करने की कोशिश की और ईरान से इसकी अनुमति नहीं ली। अमेरिका और ईरान के बीच MoU होने के बाद तीन हफ्ते तक हालात सामान्य रहे लेकिन उसके बाद इस इलाके में तनाव बढ़ गया। इस वजह से समुद्र से होने वाले यातायात में काफी कमी आई है। ईरान और पीजीएसए का दावा है कि होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह बंद है।
ये आंकड़े कारोबार से मेल खाते हैं क्योंकि भारत और चीन होर्मुज जलमार्ग से आने वाली ऊर्जा (तेल और गैस) के सबसे बड़े खरीदार हैं।
होर्मुज जलमार्ग पर कब्जे को लेकर जंग
भारत के लिए होर्मुज जलमार्ग बेहद अहम है क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 40%, एलएनजी का 60% और LPG का 90% आयात इसी रास्ते से करता है। फरवरी के आखिर में जब अमेरिका-ईजरायल और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी, तब तक होर्मुज जलमार्ग से तेल और एलएनजी का 20% हिस्सा आता था लेकिन बीते दिनों होर्मुज जलमार्ग पर कब्जे को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई तेज हुई है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की मुख्य वजह यह है कि MoU की शर्तों को लेकर कुछ साफ नहीं है। पिछले सप्ताह ईरान ने होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले कुछ जहाजों को निशाना बनाया। MoU के बाद भी ईरान ने फिर से यह कहा कि जहाज उसके द्वारा तय किए गए रास्तों से ही होर्मुज जलमार्ग को पार करे और इसके लिए पीजीएसए से अनुमति जरूर ले लें।
कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी नौसेना सुरक्षित रास्ता देगी और इसके लिए 20% शुल्क लगाएगी हालांकि बाद में वे पीछे हट गए।
बाजार के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली फर्म Kpler की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में गिरावट आई है। 12 जुलाई को सिर्फ 14 जहाज होर्मुज जलमार्ग से गुजरे जबकि 11 जुलाई को यह आंकड़ा 24 और 10 जुलाई को 19 था।
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ईरान-अमेरिका के बीच 4 महीने से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध के बीच यूएई ने होर्मुज जलमार्ग को बाईपास करने की योजना बनाई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यूएई अपने पूर्वी तट पर गहरे पानी के बंदरगाह (Deepwater Port) की योजना बना रहा है जिससे होर्मुज जलमार्ग को बाईपास किया जा सकेगा। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
