INDIA Alliance Meeting: चुनाव आयोग (EC) के भीतर कथित अंदरूनी कलह और मतभेदों को लेकर जारी विवाद के बीच, ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने बुधवार को संयुक्त प्रदर्शन और विरोध की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए एक अहम बैठक की।
इस बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने सहयोगियों को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष का मुख्य दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि भारत के नागरिक ही हमारे लोकतंत्र में अंतिम और निर्विवाद प्राधिकार बने रहें।
विपक्षी दलों के इस गठबंधन की बैठक में 19 घटक दलों के नेता शामिल हुए। इस दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्ष की ओर से छह प्रमुख मांगें रखीं और दोटूक शब्दों में कहा कि विपक्ष पारदर्शिता की जगह गोपनीयता को कभी स्वीकार नहीं करेगा।
क्या हैं प्रमुख डिमांड?
मल्लिाकार्जुन खड़गे ने जोर देकर कहा कि हम अपने गणतंत्र के मूल सिद्धांत, एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य को कमजोर नहीं होने देंगे। मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा पेश की गई विपक्ष की छह प्रमुख मांगों में यह बात भी शामिल थी कि आगामी चुनावों में केवल ‘पूर्व-एसआईआर’ (SIR) मतदाता सूची का ही उपयोग किया जाना चाहिए। खड़गे ने मांग की कि मतदाता सूची के हर एक संशोधन में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए, जिसमें नामों को जोड़ने, हटाने और उनमें सुधार करने से जुड़ी निर्वाचन क्षेत्र-वार और बूथ-वार जानकारी शामिल हो।
विपक्ष की दूसरी मुख्य मांग यह थी कि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसे उचित नोटिस दिया जाना चाहिए, हटाने के ठोस कारण बताए जाने चाहिए और एक प्रभावी अपील तंत्र भी उपलब्ध होना चाहिए। खड़गे ने कहा कि प्रशासनिक विफलता, अपर्याप्त दस्तावेजों या जागरूकता की कमी के कारण पात्र मतदाताओं को उनके मताधिकार से बाहर होने से बचाना बेहद जरूरी है।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
चौथी बड़ी मांग के रूप में खड़गे ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) के बजाय पारंपरिक मतपत्रों (Ballot Papers) के माध्यम से मतदान कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही विपक्ष ने यह भी मांग की कि संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और चुनाव आयोग ऐसा होना चाहिए जिस पर राजनीतिक स्पेक्ट्रम के सभी दलों का भरोसा हो।
इस बैठक के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अन्य सहयोगियों को जानकारी दी कि हाल ही में चलाई गई पूरी एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया बेहद गड़बड़ी और कुप्रबंधन के साथ पूरी की गई थी। ममता बनर्जी ने चुनाव के बाद की स्थिति और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कथित तानाशाही पर रोशनी डालते हुए कहा कि इस माहौल में अब उनके लिए घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।
विपक्ष की 6 मांगें क्या?
- आगामी चुनावों में ईवीएम (EVM) के बजाय केवल पारंपरिक मतपत्रों (Ballot Papers) के माध्यम से मतदान कराया जाए।
- भविष्य के सभी चुनावों के लिए केवल ‘पूर्व-एसआईआर’ (SIR) मतदाता सूची का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
- मतदाता सूची के हर एक संशोधन में पूरी पारदर्शिता हो, जिसमें नाम जोड़ने, हटाने और सुधारने की बूथ-वार जानकारी शामिल हो।
- किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसे उचित नोटिस, कारण और एक प्रभावी अपील तंत्र उपलब्ध कराया जाए।
- प्रशासनिक विफलता या जागरूकता की कमी के कारण पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित होने से बचाया जाए।
- संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और चुनाव आयोग ऐसा हो जिस पर सभी दलों का भरोसा हो।
कौन-कौन बैठक में शामिल?
बुधवार को हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी की पूर्व प्रमुख सोनिया गांधी और राहुल गांधी, एआईसीसी (AICC) के महासचिव जयराम रमेश और के.सी. वेणुगोपाल, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के अलावा समाजवादी पार्टी (SP), सीपीआई (CPI), सीपीएम (CPM), एनसीपी (NCP-SP) और शिवसेना (UBT) जैसे कई प्रमुख दलों के शीर्ष नेता मौजूद रहे।
कांग्रेस पार्टी की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि पूरा विपक्ष मोदी सरकार द्वारा भारतीय संविधान पर बार-बार किए जा रहे हमलों के खिलाफ एकजुट है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार सत्ता में बने रहने के लिए ‘वोट चोरी गेमप्लान’ जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर रही है, जिसका डटकर मुकाबला किया जाएगा।
कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक शुरू हो चुकी है, जिसमें कांग्रेस, सपा, टीएमसी, एनसीपी, शिवसेना, राजद, सीपीएम, सीपीआई, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, जेएमएम, सीपीआई-एमएल, आईयूएमएल, एमडीएमके और वीसीके समेत लगभग 19 विपक्षी दल शामिल हैं।
13 करोड़ नामों के काटने की बात
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पिछले कुछ हफ्तों से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं और मसौदा मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामलों को लेकर लगातार विपक्ष के निशाने पर हैं। इसी के चलते विपक्षी दल पिछले कई हफ्तों से लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
इससे पहले ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार लिखित रूप से आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि ये आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना ही जारी किए गए थे। दो चुनाव आयुक्तों द्वारा एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बाद चौतरफा घिरे चुनाव आयोग ने बुधवार को उन राज्यों से फॉर्म-6 के डिजिटल पोर्टल से एसआईआर घोषणा को हटा लिया, जहां यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
पिछले साल हुई थी बैठक?
विपक्षी गठबंधन की इससे पहले की आखिरी बैठक इसी साल जून के महीने में हुई थी। उस दौरान भाजपा के खिलाफ एकजुटता का संकल्प लेते हुए ‘इंडिया’ गठबंधन के सदस्यों ने नीट-सीबीएसई (NEET-CBSE) विवाद को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने का एकदिशीय फैसला किया था। जून की उस बैठक के बाद से देश के राजनीतिक परिदृश्य में कई बड़े बदलाव और हलचलें देखने को मिली हैं, जिसमें दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में पेपर लीक के खिलाफ हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन भी शामिल हैं।
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इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर तंज कसा है। शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को राजधानी नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में कहा कि इंडी गठबंधन और कांग्रेस पार्टी के कुछ लोग ही राहुल गांधी को नेता मानने के लिए तैयार नहीं है। पढ़िए पूरी खबर…
