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जब दुनिया कोरोना से जंग में चीन से जता रही थी सहानुभूति, तब ड्रैगन ने भारत की जासूसी के लिए हिंद महासागर के अंदर तैनात कर दिए ड्रोन्स

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने दिसंबर में हिंद महासागर में अंडरवॉटर ड्रोन छोड़े थे, पिछले महीने ही उसने यह ड्रोन वापस लिए।

चीन पहले भी कई बार हिंद महासागर में प्रभुत्व कायम करने के लिए अपने शिप भेज चुका है। (फाइल)

पूरी दुनिया पिछले करीब 5 महीनों से कोरोनावायरस से जूझते चीन के साथ हमदर्दी जता रही है। कई देशों ने संक्रमण से जूझते चीन की मदद के लिए व्यवस्थाएं भी कीं। इनमें भारत भी शामिल रहा। हालांकि, चीन इतनी बड़ी महामारी से जूझने के बाद संकट के समय भी दूसरे देशों को परेशान करने की अपनी नीतियों से बाज नहीं आया। इंटरनेशनल बिजनेस मैगजीन फोर्ब्स ने हाल ही में दावा किया कि चीन ने अपने रिसर्च शिप शियांगग्यांघोंघ 06 से दिसंबर के मध्य में करीब एक दर्जन अंडरवॉटर ड्रोन्स हिंद महासागर में छोड़े थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले महीने ही उसने यह ‘सी विंग’ ड्रोन वापस इकट्ठा कर लिए। बताया गया है कि इन ड्रो्स ने हिंद महासागर में करीब 3400 से ज्यादा जगहों की निगरानी रखी।

भारत ने अब चीन की इस हरकत का संज्ञान लिया है। आमतौर पर इस तरह के अंडरवॉटर सर्वे समुद्र में खदान ढूंढने और अन्य व्यापारिक कार्यक्रमों के लिए किए जाते हैं। लेकिन चीन अब तक इस क्षेत्र में अपना प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि उसका यह सर्वे सबमरीन और एंटी सबमरीन वॉरफेयर ऑपरेशन के लिए भी हो सकता है।

गौरतलब है कि चीन का प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ओशियन और इकोलॉजी रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए यह सर्वे करता रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी अंडरवॉटर ड्रोन जाहिर तौर पर समुद्र विज्ञान से जुड़े डेटा को जुटाने में लगे थे। वे इस डेटा को लगातार शिप पर भेज रहे थे। आमतौर पर यह डेटा नौसैना की खुफिया जानकारी के तौर पर भेजा जाता है।

भारतीय नौसेना के सूत्रों ने कहा है कि वे फोर्ब्स की इस रिपोर्ट की विश्वसनीयता का दावा नहीं कर सकते, लेकिन नौसेना लगातार हिंद महासागर में चीनी रिसर्च शिप को ट्रैक करने में जुटी है। इसके लिए पी-8आई लॉन्ग रेंज मैरीटाइम पैट्रोल एयरक्राफ्ट के साथ युद्धपोतों की भी सहायता ली जा रही है।

एक सूत्र ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया- “किसी भी समय 4 से 5 चीनी रिसर्च शिप हिंद महासागर की निगरानी के लिए तैयार रहते हैं। वे लगातार समुद्र विज्ञान से जुड़ा डेटा जुटाने में लगे रहते हैं। जैसे यहां का तापमान, इसमें नमक की मात्रा। यह जानकारियां नेविगेशन (समुद्री यात्रा) और सबमरीन से जुड़े ऑपरेशन में अहम होती हैं। इन जानकारियों से कोई देश अपनी सबमरीन के लिए सबसे बेहतर रूट तलाश सकता है।”

एक अन्य सूत्र के मुताबिक, “अगर कोई चीनी रिसर्च शिप भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन) में आता है और संदिग्ध सैन्य गतिविधियां करता पाया जाता है, तो उसे चेतावनी के साथ सीमा से बाहर कर दिया जाता है।” बता दें कि भारत का ईईजेड 200 नॉटिकल मील में फैला है। दिसंबर 2019 में ही नेवी चीफ एडमिरल करमबीर सिंह ने बताया था कि नौसेना ने सितंबर में चीन के शी यान-1 रिसर्च शिप को अंडमान-निकोबार से पीछा कर बाहर कर दिया था।

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