दिल्ली अब एआई के इर्द-गिर्द वैश्विक चर्चा का केंद्र बन जाएगी। ऐसा इस वजह से क्योंकि भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की मेजबानी कर रहा है। इसमें देश रियल वर्ल्ड एआई सॉल्यूशन में अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने, ग्लोबल साउथ में एआई पर अग्रणी आवाज बनने और टेक्नोलॉजिकल लीडरशिप के मंच पर एक जगह सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है।

ग्लोबल साउथ में पहली बार आयोजित होने वाला यह शिखर सम्मेलन 16 से 20 फरवरी तक तय है। पीएम नरेंद्र मोदी 16 फरवरी सोमवार शाम 5 बजे भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन करेंगे।

यह शिखर सम्मेलन एआई गवर्नेंस और इनोवेशन पर चल रही अंतरराष्ट्रीय चर्चा का नवीनतम अध्याय है। इसकी शुरुआत नवंबर 2023 में ब्रिटेन के ब्लेचली पार्क में एआई सेफ्टी समिट के तौर पर हुई थी। यहां पर 28 देशों ने एआई सेफ्टी रिस्क की पहचान ऐतिहासिक ब्लेचली घोषणा पर साइन किए थे। तब से इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मई 2024 में सियोल शिखर सम्मेलन में सेफ्टी के साथ-साथ इनोवेशन को भी शामिल किया गया। वहीं, फरवरी 2025 में पेरिस एआई एक्शन शिखर सम्मेलन में व्यावहारिक कार्यान्वयन और आर्थिक अवसरों पर जोर दिया गया, हालांकि सुरक्षा और संरक्षा के मुद्दों को काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया गया।

भारत का दृष्टिकोण कुछ अलग है। जहां पिछले शिखर सम्मेलनों में विनाशकारी जोखिमों और नियामक ढांचों पर चर्चा हुई, वहीं दिल्ली का ध्यान उस मुद्दे पर केंद्रित है जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सचिव एस. कृष्णन पीपुल, प्लेनेट एंड प्रोग्रेस कहते हैं। यानी जमीनी मुद्दों पर केंद्रित एआई समाधान विकसित करना। यह दृष्टिकोण भारत की उभरती हुई एआई पावर और वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में उसकी स्थिति को दिखाता है।

इस शिखर सम्मेलन पर दुनिया भर की नजरें टिकी रहेंगी क्योंकि यह ऐसे समय में हो रहा है जब इस बात की चिंताएं हैं कि एआई पहले से मौजूद आर्थिक कारकों को मौलिक रूप से बदल सकता है और विश्व और कॉर्पोरेट जगत के नेता इस तकनीक के लिए अपनी योजनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।

20 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष होंगे शामिल

सरकारें, उद्योगपति, रिसर्चर्स, सिविल सोसायटी ऑर्गेनाइजेशन और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले हैं। इसमें 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें 20 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल हैं। इस लिस्ट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज पेरेज, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय परमेलिन, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री डिक शूफ और एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस शामिल हैं।

45 से ज्यादा देशों के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भाग लेंगे

इस शिखर सम्मेलन में 45 से ज्यादा देशों के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भाग लेंगे। भारत द्वारा बीजिंग को औपचारिक निमंत्रण भेजे जाने के बाद एक चीनी प्रतिनिधिमंडल भी इसमें शामिल हो रहा है। इस कार्यक्रम में गूगल के सुंदर पिचाई, ओपनएआई के सैम अल्टमैन, एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई, माइक्रोसॉफ्ट के ब्रैड स्मिथ, एडोब के शांतनु नारायण और क्वालकॉम के क्रिस्टियानो अमोन सहित 40 से ज्यादा प्रमुख वैश्विक और भारतीय कंपनियों के सीईओ शामिल होंगे। मोदी डिनर की मेजबानी भी करेंगे और सीईओ की गोलमेज बैठक को संबोधित करेंगे।

इंडिया एआई मिशन के सीईओ अभिषेक सिंह के अनुसार, शिखर सम्मेलन के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में से एक एआई का लोकतंत्रीकरण होगा, इसके अलावा स्वास्थ्य सेवा, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में रियल वर्ल्ड के एआई समाधानों को प्रदर्शित करना होगा जिन्हें भारतीय इंजीनियर और प्रतिभाएं स्थानीय स्तर पर विकसित कर रहे हैं।

सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “इस समय में हम जिस एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह कुछ ही देशों में विकसित किया गया है और दुनिया का ज्यादातर हिस्सा केवल एआई यूजर्स है। अगर डेटासेट समावेशी नहीं हैं, तो परिणामों में पूर्वाग्रह होगा। कंप्यूट, मॉडल, एल्गोरिदम के डेटासेट के रूप में एआई संसाधनों के लोकतंत्रीकरण से संबंधित मुद्दा शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख विषय बन जाता है।”

ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधियों द्वारा सह-अध्यक्षता में गठित सात विषयगत कार्य समूह, एआई कॉमन्स, भरोसेमंद एआई टूल और एआई उपयोग मामलों के क्षेत्र सहित ठोस परिणाम पेश करने होंगे।

500 से ज्यादा सेशन होंगे

यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया में बड़े-बड़े बदलाव हो रहे हैं। एआई के प्रसार ने काम के भविष्य और वर्तमान नौकरियों पर इसके प्रभाव को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। भारत का आईटी क्षेत्र, एआई के कारण अपनी कई सेवाओं के अप्रचलित हो जाने के खतरे से जूझ रहा है और अब तक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का सामना कर रहा है। ऊर्जा और जल जैसे संसाधनों पर एआई का बढ़ता दबाव भी लोगों के मन में चिंता का विषय बना हुआ है।

आगामी पांच दिनों के दौरान शिखर सम्मेलन में 500 से ज्यादा सेशन का आयोजन किया जाएगा ताकि एक ऐसा रोडमैप तैयार किया जा सके जिसके जरिये इनमें से कुछ मूलभूत आशंकाओं का समाधान किया जा सके। इन सत्रों में एआई सिक्योरिटी, गवर्नेंस, एथिकल यूज, डेटा सिक्योरिटी के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर चर्चा की जाएगी।

एआई लैंग्वेज मॉडल लॉन्च किए जाने की भी संभावना

इस शिखर सम्मेलन में इस बात पर भी गहन चर्चा होगी कि एआई किस तरह व्यवसायों और उद्योगों को प्रभावित कर रहा है, बदलते नौकरी बाजार के लिए नई स्किल जरूरतें क्या हैं और किसानों, छोटे व्यवसायों और व्यक्तियों को मदद देने में एआई की क्या भूमिका है। भारत में कुछ कंपनियों द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित एआई लैंग्वेज मॉडल लॉन्च किए जाने की भी संभावना है। भारत ने बड़े और छोटे भाषा मॉडल बनाने के लिए 12 आवेदनों को मंजूरी दी है। इनमें से कुछ के आधिकारिक रूप से लॉन्च होने की उम्मीद है। इनमें सर्वम एआई और भारतजेन द्वारा विकसित किए जा रहे स्वतंत्र एआई मॉडल शामिल हैं। सुंदर पिचाई, सैम ऑल्टमैन से जेन्सेन हुआंग तक, जानें कौन-कौन होंगे शामिल और क्या है पूरा कार्यक्रम