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मलक्का स्ट्रेट से लेकर हॉर्न ऑफ अफ्रीका तक इंडियन नेवी ने चीन के खिलाफ अपनाया आक्रामक रुख, पूर्वी और पश्चिमी दोनों तरफ समंदर में तैनात किए युद्धपोत, पनडुब्बी

चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में मौजूदा सीमा विवाद के बीच भारतीय सेना और वायुसेना अक्साई चीन में पूरी तरह से मुस्तैद है। नौसेना ने समुंदर में पूर्वी और पश्चिमी दोनों तरफ युद्धपोत और पनडुब्बियां तैनात कर दी हैं।

India china border dispute, Indian navyचीन के साथ पूर्वी लद्दाख में मौजूदा सीमा विवाद के बीच भारतीय नौसेना समुद्री निगरानी को लेकर पूरी तरह अलर्ट है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारत समुद्र में चीन के खतरे से निपटने के लिए आक्रामक रुख अपना रहा है। भारतीय नौसेना मलक्का स्ट्रेट से लेकर हॉर्न ऑफ अफ्रीका तक चौकस है। नौसेना ने समुंदर में पूर्वी और पश्चिमी दोनों तरफ युद्धपोत और पनडुब्बियां तैनात कर दी हैं।

चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में मौजूदा सीमा विवाद के बीच भारतीय सेना और वायुसेना अक्साई चीन में पूरी तरह से मुस्तैद है। हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि गलवान में चीनी सैनिकों के साथ झड़प के बाद से भारतीय नौसेना के युद्धक विमान और पनडुब्बियां अरब सागर के साथ ही बंगाल की खाड़ी में निगरानी बढ़ा दी है।

खबर में एक वरिष्ठ कमांडर के हवाले से बताया गया किएक चीनी युद्धपोत जो हिंद महासागर की ओर इंडोनेशिया के माध्यम से प्रवेश कर रहा था, वह भी वापस आ गया क्योंकि भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार थी।  चीनी रुख को साफ रूप से समझते हुए देश के लिए सुरक्षा योजनाओं को बनाने वाले अपनी संप्रभुता के तहत 1062 द्वीपों में से कुछ में एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं।

भारत अधिक विमान वाहक खरीदने के बजाय, अंडमान निकोबार द्वीप समूह में सैन्य सुविधाओं को पूरी तरह से अपग्रेड करने के साथ-साथ पश्चिमी समुद्री तट पर लक्षद्वीप पर भी फोकस कर रहा है। चीनी खतरे का मुकाबला करने के लिए, योजना का उद्देश्य अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में इन द्वीपों पर भारतीय एयरबेस का एक नेटवर्क होना है ताकि दक्षिण चीन सागर की तरह नेविगेशन और ऊपर से उड़ान भरने की स्वतंत्रता को बनाए रखा जा सके।

चीन की नौसेना एक के बाद एक  म्यांमार, श्रीलंका, पाकिस्तान, ईरान और पूर्वी अफ्रीका में बंदरगाह हासिल कर लिए है। इसका उद्देश्य न केवल भारतीय नौसेना को नियंत्रित करना है बल्कि अमेरिकी मध्य कमान बलों के साथ-साथ फ्रांसीसी और ब्रिटिश नौसेना की उपस्थिति को भी चुनौती देना है।

हाल के समय में चीनी पीएलए नेवी के युद्धपोत एंटी-पायरेसी ऑपरेशन कवर का प्रयोग कर रहे हैं। चीनी नौसेना ने बलूचिस्तान और लाल सागर के मुहाने पर जिबूती नेवल बेस का अधिग्रहण किया है। पीएलए युद्धपोत मलक्का स्ट्रेट के जरिये से हिंद महासागर में प्रवेश करते हैं और अंतर्राष्ट्रीय जल में अपने अभियानों को संचालित करते हैं

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