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साल के अंत तक 216 करोड़ वैक्सीन डोज़ उपलब्ध होंगे, इस दावे के सामने कई चुनौतियां

सच्चाई यह है कि यह उपलब्धि दो बातों पर निर्भर करेगी। पहली, वैक्सीन उत्पादन बढ़ाना होगा। और दूसरे निर्माता की ओर से वैक्सीन के प्रभाव और सेफ्टी के बारे में डाटा की उपलब्धता।

कोरोना टीकाकरण की तस्वीर। (फोटो क्रेडिट- एक्सप्रेस, By पवन खेंगड़े)

कोविड टास्क फोर्स के हेड डॉ वीके पॉल का अनुमान है कि अगस्त से दिसंबर के बीच देश में 216 करोड़ वैक्सीन डोज़ उपलब्ध होंगे। यह अनुमान कोविड वैक्सीन बनाने वाली आठ कंपनियों द्वारा सौंपे गए आंकड़ों पर आधारित है। डॉ पॉल ने बताया कि सरकार ने वैक्सीन बनाने वालों से संपर्क किया है और उनसे अगस्त-जनवरी के बीच वैक्सीनों की उपलब्धता पर जानकारी मांगी है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन सबके लिए उपलब्ध होगी।

216 करोड़ वैक्सीन!
यह संख्या कागज पर बड़ी सुंदर दिखती है। इसका मतलब होता है दिसंबर तक देश की समस्त बालिग आबादी का टीकाकरण। सच्चाई यह है कि यह उपलब्धि दो बातों पर निर्भर करेगी। पहली, वैक्सीन उत्पादन बढ़ाना होगा। और दूसरे निर्माता की ओर से वैक्सीन के प्रभाव और सेफ्टी के बारे में डाटा की उपलब्धता।

डॉ पॉल ने बताया कि सीरम इंस्टीट्यूट अगस्त से दिसंबर के बीच 75 करोड़ डोज़ कोविशील्ड के और 20 करोड़ नोवावैक्स के बनाएगा। दोनों को मिला दें तो संख्या हुई 95 करोड़। केंद्र सरकार का कहना है कि उसने सीरम इंस्टीट्यूट से कोविशील्ड के 27.6 करोड़ डोज़ लिए है। इनमें 16 करोड़ डोज़ मई और जुलाइ के बीच सप्लाइ होंगे। सीरम इंस्टीट्यूट राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों को 16 करोड़ अतिरिक्त डोज़ देगी।

डॉ पॉल ने बताया कि हैदराबाद की भारत बायोटेक अपनी कोवैक्सीन के 55 करोड़ डोज़ देगी। इसके अलावा यह कंपनी दस करोड़ डोज़ नेज़ल वैक्सीन भी देगी। कंपनी को केंद्र की ओर से आठ करोड़ डोज़ का ऑर्डर मिला है। इसमें से पांच करोड़ दिया जाना बाकी है, जो कि मई और जुलाई के बीच दिया जाएगा। भारत बायोटेक को 65 करोड़ डोज़ देने के लिए अपनी उत्पादन क्षमता जोरदार ढंग से बढ़ानी होगी। कोवैक्सीन के उत्पादन में तीन पीएसयू भी जुड़ेगे। सो, उत्पादन में वृद्धि इस बात पर भी निर्भर है कि ये पीएसयू कैसा काम करते है। यहां यह जानना भी जरूरी है कि नेज़ल वैक्सीन के अभी ट्रायल पूरे नहीं हुए हैं।

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डॉ पॉल ने बताया कि बायलॉजिकल ई कंपनी की सबयूनिट वैक्सीन तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल से गुजर रही है। ट्रायल खत्म होते ही वह उत्पादन शुरू कर देगी और अगस्त से दिसंबर के बीच 30 करोड़ डोज़ बना डालेगी। कोविड टास्क फोर्स के हेड ने माना कि उन्हें आशावादी कहा जा सकता है। तो क्या कोई खतरा नहीं है? हल्का सा डर तो रहता ही है लेकिन काम भी तो शुरू हो चुका है। बायलॉजिकल ई की वैक्सीन की उपलब्धता क्लीनिकल ट्रायल के डाटा पर निर्भर करेगी। पिछले साल 26 अक्टूबर को इससे ½ फेज़ के ट्रायल शुरू करने को कहा गया था। अप्रैल में ये ट्रायल पूरे हो गए। अब इस वैक्सीन के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल होंगे। यह ट्रायल 15 स्थानों में किए जाएंगे।

डॉ ने बताया कि ज़ायडुस कैडिला शीघ्र ही अपनी डीएनए वैक्सीन के लिए लाइसेंस मांगेगी। यह वैक्सीन तीसरे चरण के ट्रायल पर है। लेकिन ट्रायल का काम धीमा चल रहा है। उधर, जेन्नोवा अपनी एमआरएनए वैक्सीन के लिए भी शीघ्र लाइसेंस की मांग करने वाली है। अंदाज है कि यह कंपनी वैक्सीन के छह करोड़ डोज़ उत्पादित कर सकेगी। इसका भी काम धीमा है।

रूस की स्पूतनिक वैक्सीन की चर्चा करते हुए डॉ पॉल ने बताया कि इसकी खेप भारत आ गई है। खेप छोटी है। अगले हफ्ते से ये सीमित डोज़ में उपलब्ध होगी। बाजार में यह अगले हफ्ते से उपलब्ध होगी। जुलाई से इसका उत्पादन होने लगेगा। कंपनी को आशा है कि वह अगस्त-दिसंबर के बीच 15.6 करोड़ डोज़ तैयार कर पाएगी।

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