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लाल किले की प्राचीर पर फिर साफे में आए PM नरेंद्र मोदी, पहले से लुक में इस बार क्या था अलग?

गणतंत्र दिवस समारोहों में भी कच्छ के लाल बंधनी साफे से लेकर पीले राजस्थानी साफे तक, मोदी के साफे लोगों का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं।

PM Modi, Independence day,लाला किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते प्रधानमंंत्री मोदी। (फोटो-PTI)

देश के 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया। इस दौरान पीएम मोदी अलग अंदाज में नजर आए। रंग बिरंगे साफे की बजाय इस बार उन्होंने केसरिया और क्रीम रंग का साफा पहना था। प्रधानमंत्री ने इसके साथ आधी बाजू का कुर्ता और चूड़ीदार पायजामा पहना हुआ था। वे केसरिया किनारे वाला सफेद गमछा भी लिए हुए थे।

लाल किले की प्राचीर से बतौर प्रधानमंत्री पहली बार भाषण देते हुए 2014 में नरेन्द्र मोदी ने गहरे लाल और हरे रंग का जोधपुरी बंधेज साफा पहना था। वहीं,  साल 2015 में उन्होंने पीले रंग का साफा पहला था जिसपर अलग-अलग रंगों की धारियां थीं, जबकि 2016 में उन्होंने गुलाबी और पीले रंग का लहरिया ‘टाई एंड डाई’ साफा चुना था। इसके बाद, उन्होंने 2017 में गहरे लाल और पीले रंग का साफा पहना, जिसे पर सुनहरी धारियां थी। उन्होंने 2018 में केसरिया साफा पहना था।

साल 2019 की शानदार जीत के बाद दूसरी बार सत्ता में आने के बाद मोदी ने पिछले साल लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस पर अपना छठा भाषण देते समय भी रंग-बिरंगा साफा पहना था। गणतंत्र दिवस समारोहों में भी कच्छ के लाल बंधनी साफे से लेकर पीले राजस्थानी साफे तक, मोदी के साफे लोगों का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं।

कोरोना के साए के बीच आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस बार पहले की तरह चहल-पहल नहीं थी। महामारी का संकट देखते हुए इससे बचाव के लिए कई एहतियात बरते गए। मसलन, सभी कुर्सियों पर कोरोना किट रखी हुई थी। कुर्सियों पर बैठने के लिए उचित दूरी का पालन किया गया था और इन्हें कतार में उचित दूरी के साथ रखा गया था।

बता दें कि पीएम मोदी ने इस बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराते ही बतौर गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री सबसे ज्यादा बार झंडा फहराने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उन्होंने इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वह सातवीं बार लाल किले की प्राचीर से झंडा फहरा रहे थे जबिक अटल बिहारी वाजपेयी ने छह बार ऐसा किया था।

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