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कृषि कानून पर बढ़ता जा रहा विरोध! हरियाणा में BJP दफ्तर के भूमि पूजन के ऐन बाद किसानों ने उखाड़ी नींव; विधायक से 1 रात पहले खुद कर दिया पार्क का उद्घाटन

भाजपा-जजपा विधायकों के घेराव के बाद अब किसान 26 जून को चंडीगढ़ में राजभवन का घेराव करेगें और राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपकर कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग करेगें।

मोदी सरकार के लाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है। (express file photo)

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन बढ़ता ही जा रहा है। हरियाणा में कई जगहों पर बीजेपी के नेताओं को किसानों के गुस्से का सामने करना पड़ रहा है। झज्जर में किसानों ने शिलान्यास के कुछ देर बाद ही भाजपा दफ्तर की नींव उखाड़ दी। वहीं भयाना में विधायक द्वारा पार्क के उद्धाटन से पहले ही किसानों ने उद्धाटन कर दिया।

खबरों के अनुसार रविवार सुबह सात बजे झज्जर में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ ने जिला कार्यालय का भूमि पूजन कर शिलान्यास किया। धनखड़ के जाने के कुछ ही देर बाद संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े लोगों ने आकर ईंटे उखाड़ दी और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। इस घटना पर बीजेपी की तरफ से कहा गया है कि ऐसा करने वालों के खिलाफ केस दर्ज करवाया जाएगा। इधर हांसी में लाला हुक्मचंद जैन स्मृति पार्क के पुननिर्माण के बाद विधायक को उसका उद्धाटन करना था लेकिन किसानों ने एक रात पहले पार्क का उद्धाटन कर दिया। किसानों ने रात में स्वामी इच्छापुरी से पार्क का उद्धाटन करवाया।

इधर हरियाणा में भाजपा-जजपा विधायकों के घेराव के बाद अब किसान 26 जून को चंडीगढ़ में राजभवन का घेराव करेगें और राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपकर कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग करेगें। किसान नेता  बलवीर सिंह ने यह जानकारी देते हुए दावा किया है कि नरवाना क्षेत्र से भारी संख्या में किसान राजभवन का घेराव करने के लिए जाएगें।

उन्होने यह भी बताया कि इससे पहले 14 जून को प्रदेश भर मे किसान धरना स्थलों पर सिख पंथ के गुरू अर्जुन देव का शहादत दिवस मनाकर एकता का परिचय देगें। रविवार को भी बदोवाल टोल प्लाजा पर 171 वें दिन भी किसानों का धरना जारी रहा। उसमें इस्माइलपुर , खानपुर ,खरड़वाल ,ढाबी टेकसिंह , नारायणगढ़ ,रेवर ,डूमरखां कलां एवं खुर्द ,झील तथा आस पास के अनेक गाँवों के किसान पहुचें।

गौरतलब है कि तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले कई महीनों से किसान दिल्ली बॉर्डर पर बैठे हुए हैं। सरकार के साथ 11 दौर की वार्ता के बाद भी दोनों पक्ष के बीच कोई फैसला नहीं हो पाया। जिसके बाद से सरकार और किसानों के बीच डेडलॉक जारी है। दोनों ही पक्षों के बीच अंतिम बार वार्ता 22 जनवरी को हुई थी।

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