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किसान आंदोलन: फल और सब्जियों की आवक 50 फीसद घटी

दिल्ली व एनसीआर के राज्य फल व सब्जियों के लिए आजादपुर मंडी पर निर्भर हैं। इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करीब 12 हजार टन से लेकर 14 हजार टन तक माल की आवश्यकता होती है। एक सप्ताह पहले तक यह आपूर्ति दिल्ली को मिल रही थी लेकिन सीमाएं बंद होने के बाद यह आपूर्ति एकाएक घट गई है।

farmers protestकिसान आंदोलन की वजह से दिल्ली के सूने पड़े राजमार्ग पर खेलते बच्चे।

किसान आंदोलन का असर देश की सबसे बड़ी मंडी आजादपुर पर भी है। इस आंदोलन की वजह से आसपास के राज्यों से आने वाली फल व सब्जियों की आवक पर असर हुआ है और यह घटकर 50 फीसद रह गई है। हालांकि माल दिल्ली के बाहर के राज्यों में नहीं जा पा रहा है, इसलिए दिल्ली वालों के लिए फल व सब्जियों की उपलब्धता पर कोई असर नहीं है। इसके अतिरिक्त मौसम की सब्जियों के दाम में भी इसका कोई असर नहीं है।

दिल्ली व एनसीआर के राज्य फल व सब्जियों के लिए आजादपुर मंडी पर निर्भर हैं। इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करीब 12 हजार टन से लेकर 14 हजार टन तक माल की आवश्यकता होती है। एक सप्ताह पहले तक यह आपूर्ति दिल्ली को मिल रही थी लेकिन सीमाएं बंद होने के बाद यह आपूर्ति एकाएक घट गई है। आजादपुर मंडी के अध्यक्ष आदिल खान बताते हैं कि पड़ोसी राज्यों से आने वाली फल व सब्जियों की आवक घट कर आधी हुई है। प्रतिदिन मंडी में 6 हजार से लेकर 7500 टन तक सामान पहुंच रहा है।

उन्होंने बताया कि इस हालत में भी दिल्ली में दाम स्थिर है और माल की भी कोई कमी नहीं है। कुछ बार्डर खुले होने का लाभ मंडियों को मिल रहा है और इनके माध्यम से दूसरे राज्यों से सामान आ रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर किसानों की मांग जायज है और हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि इन मांगों को जल्द से जल्द पूर्ण किया जा सके ताकि किसानों के इस आंदोलन को खत्म कराया जा सके।

उत्तर भारत को नारियल पानी पिलाती है मंडी
उत्तर भारत के राज्यों में मिलने वाला नारियल पानी, कीनू व सेब आदि सबसे पहले आजादपुर मंडी में पहुंचते हैं। इसके बाद दिल्ली से सारा माल पड़ोसी राज्यों तक जाता है। आजादपुर मंडी के मुताबिक इन राज्यों में भेजे जाने वाली आपूर्ति अभी प्रभावित चल रही है। केवल ऐसे इलाके जहां पर बार्डर पर कोई असर नहीं है। उन इलाकों में भी माल भेजा जा रहा है। यातायात पुलिस के मुताबिक इन दिनों चिल्ला के पास नोएडा लिंक रोड, गाजीपुर बार्डर, टिकरी बार्ड, झड़ौदा बार्डर व राजमार्ग 44 इस आंदोलन की वजह से प्रभावित चल रहे हैं।

भारत बंद का एसटीए एकता मंच भी करेगा समर्थन
किसान आंदोलन के तहत आठ दिसंबर को होने वाले भारत बंद का वाहन चालक मंच भी समर्थन करेगा। मंच के महासचिव श्याम लाल गोला ने बताया कि आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस यूनियन ने किसानों के भारत बंद का समर्थन किया है। उधर, मोटर यूनियन शनिवार को विज्ञान भवन पहुंची और शांतिपूर्ण तरीके से यूनियन नेताओं ने किसानों की कृषि बिल के खिलाफ मांगों का समर्थन किया। यूनियन के अध्यक्ष किशन वर्मा ने कहा कि देश के अन्नदाता को अपना समर्थन आठ दिसंबर को देने का फैसला लिया गया है।

किसानों की सुविधा के लिए लगाया वाई-फाई
अपनी मांगों को लेकर किसान कड़ाके की ठंड में भी बॉर्डरों पर डटे हुए हैं। यहां पर इंटरनेट की समस्या को देखते हुए एक संस्था द्वारा बॉर्डर के दोनों तरफ मुफ्त वाई-फाई लगाया गया है। इसके जरिए आंदोलन कर रहे किसान परिवार से बातचीत कर सकेंगे और साथ ही सोशल मीडिया तक भी आसानी से पहुंच पाएंगे।

पोस्टर आंदोलन शुरू
बॉर्डर पर किसानों ने अब पोस्टर आंदोलन की शुरुआत कर दी है। पुलिस ने एहतियातन टिकरी, सिंघू, गाजीपुर और चिल्ली बॉर्डर को बंद कर दिया है। इसके साथ ही मरेठ एक्सप्रेस वे और नोएडा लिंक रोड पर भी आवाजाही पूरी तरह से बंद है। सिंघू बॉर्डर पर किसान गृह मंत्री अमित शाह, पूंजीपति अंबानी और अडानी के मालिकों के पोस्टर लेकर पहुंचे थे।

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