स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो सकते हैं वेदों के सार, बीजेपी सांसद की अगुवाई वाली समिति ने की सिफारिश

भाजपा के राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि इस प्रकार से पाठ्य पुस्तिकाओं को भारत की विविधता में एकता के भाव को प्रदर्शित करना चाहिए।

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संसदीय समिति ने वेदों के सार को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया। (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

संसद की एक समिति ने सुझाव दिया है कि स्कूली पाठ्य पुस्तिकाओं में देश के विभिन्न राज्यों एवं जिलों के ऐसे अनाम स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन को रेखांकित किया जाना चाहिए जिन्होंने देश के राष्ट्रीय इतिहास एवं अन्य पहलुओं पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। समिति ने यह भी कहा है कि स्कूल की किताबों में स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी को जैसे प्रस्तुत किया जा रहा है, उसकी समीक्षा की जानी चाहिए। समिति ने वेदों के सार को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया।

भाजपा के राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि इस प्रकार से पाठ्य पुस्तिकाओं को भारत की विविधता में एकता के भाव को प्रदर्शित करना चाहिए। उनका मानना है कि प्राचीन भारत में बहुत सी ऐसी चीजें रही हैं जो बच्चों को पढ़ाने की जरूरत है। वेद हमारे देश के स्वर्णिम काल को इंगित करते हैं। वेदों के सार को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने से प्राचीन भारत की सामर्थ्य का पता चलेगा।

संसद के दोनों सदनों में पेश स्कूली पाठ्य पुस्तिकाओं की सामग्री एवं डिजाइन विषय पर समिति ने कहा कि इसके लिए सामग्री तैयार करने वाली टीम को अध्ययन कर जानकारी जुटाने की जरूरत होगी । इसके साथ ही स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर इनसे जुड़े संबंधों की पहचान भी करनी पड़ सकती है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार- राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के निदेशक ने समिति को बताया कि पाठ्य पुस्तकों में इतिहास से परे तथ्यों को हटाने व राष्ट्रीय विभूतियों के बारे में बातों को तोड़ मरोड़ की पेश करने के मुद्दे पर समिति गठित की जा रही है, जिससे विवादित मुद्दों का आकलन कर इनका निपटारा किया जा सके। समिति को बताया गया कि भारतीय इतिहास से जुड़ी पाठ्य पुस्तकों में प्राचीन भारत के इतिहास से जुड़ी चीजों को शामिल किया जाना चाहिए। इसमें प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास को शामिल करने से छात्रों को बेहतर शिक्षा दी जा सकती है।

एनसीईआरटी महान महिला नेत्रियों की भूमिकाओं को रेखांकित कर रही है, जिसमें गार्गी, मैत्रेयी के अलावा झांसी की रानी, रानी चेन्नमा, चांद बीबी आदि शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार- नई पाठ्य पुस्तकों एवं पूरक सामग्री में भारतीय इतिहास की विभिन्न अवधियों से संबद्ध इतिहास की महान महिलाओं के बारे में विस्तृत जानकारी एवं ई सामग्री उपलबध कराई जाएगी।

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