TRP Scam Case: मुंबई पुलिस ने अर्नब को भेजा 68 सवालों का पुलिंदा, अधिकतर में जवाब- रिपब्लिक टीवी के सारे फैसलों की जानकारी नहीं

मुंबई पुलिस ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कहा है कि एआरजी आउटलियर्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक होने के कारण टीआरपी में कथित गड़बड़ी और अवैध पेमेंट के लिए अर्नब गोस्वामी की मंजूरी ली गई थी।

Arnab Goswami, Republic TV
रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को मुंबई पुलिस पूछताछ के लिए बुला चुकी है। (फोटो- PTI)

टेलिविजन रेटिंग पॉइंट्स (टीआरपी) में गड़बड़ी के मामले में मुंबई पुलिस ने अपनी जांच तेज कर दी है। एक महीने पहले ही पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को इस टीआरपी घोटाले केस में आरोपी बनाया था। तब उन्हें 68 सवालों का एक पुलिंदा भेजा गया था, जिसमें उनसे न्यूज चैनल की रेटिंग बढ़ाने से लेकर वॉट्सऐप चैट और टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) से शिकायत से लेकर हेरफेर तक को लेकर सवाल किए गए थे।

अर्नब ने 24 मई को इन सवालों के जवाब में दावा किया था कि रिपब्लिक मीडिया ग्रुप में करीब 1100 कर्मचारी हैं और इस केस से जुड़े जो सवाल पूछे गए हैं, उन्हें डिस्ट्रीब्यूशन टीम देखती है और संपादकीय (एडिटोरियल) टीम का उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं रहता है। बता दें कि अर्नब रिपब्लिक टीम की संपादकीय टीम के ही प्रमुख पद पर हैं।

बता दें कि मुंबई पुलिस ने मंगलवार को ही दायर 1912 पन्ने की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में रिपब्लिक टीवी के कर्मचारियों के वॉट्सऐप चैट्स शामिल किए हैं। रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी के चैनलों को चलाने वाले एआरजी आउटलियर मीडिया के अलावा पुलिस ने नए आरोपपत्र में छह अन्य आरोपियों को भी नामजद किया है, जिनमें रिपब्लिक समूह के चैनलों के कुछ कर्मचारियों को भी नामजद किया गया है।

पुलिस ने कहा है कि एआरजी आउटलियर्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक होने के कारण टीआरपी में कथित गड़बड़ी और अवैध पेमेंट के लिए गोस्वामी की मंजूरी ली गई थी। पुलिस का यह भी कहना है कि गोस्वामी ने रिपब्लिक टीवी चैनल की रेटिंग सुधारने के लिए ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) के तत्कालीन सीईओ पार्थो दासगुप्ता के साथ मिलकर टीआरपी में गैरकानूनी तरीके से छेड़खानी की तथा इस काम में मदद देने के लिए दासगुप्ता को पैसा भी दिया।

मुंबई पुलिस की ओर से अदालत में दायर पूरक आरोप-पत्र में दोनों आरोपियों के बीच वॉट्सऐप पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए इसे ‘महत्वपूर्ण साक्ष्य’ बताया गया है। साथ ही चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि टीआरपी में गड़बड़ी तीन तरह से की गई। पहला पैनल घरों में लगे बैरोमीटर्स में, दूसरा टीआरपी मापने में और तीसरा ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) की रिपोर्ट्स में छेड़छाड़ करवा कर।

अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर दो चैनल दिखाने के मुंबई पुलिस के सवाल पर अर्नब ने कहा कि है कि चैनल के प्लेसमेंट से जुड़े फैसले डिस्ट्रीब्यूशन टीम लेती है। न ही मैं और न ही संपादकीय टीम से इस फैसले में कोई शामिल था। वहीं, डीटीएच और केबल ऑपरेटरों को अवैध पेमेंट के सवाल पर गोस्वामी ने खुद को अलग करते हुए कहा कि यह मामला उनके ज्ञानक्षेत्र के ही बाहर है और उनका मुख्य काम संपादकीय टीम का काम संभालना था।

इसके अलावा कुछ और सवालों को अर्नब ने यह कह कर टाल दिया कि उनकी कंपनी में 1100 से ज्यादा कर्मचारी हैं और वे दूसरे विभागों की ओर से लिए गए फैसलों की जानकारी नहीं रखते। दूसरी ओर रिपब्लिक टीवी कर्मचारियों द्वारा वॉट्सऐप ग्रुप पर टीआरपी से जुड़ी चर्चा को लेकर किए गए सवाल पर अर्नब ने कहा कि वे ऐसे कई ग्रुप्स का हिस्सा हैं। यहां तक कि कई सामाजिक समूहों ने भी उन्हें वॉट्सऐप ग्रुप में शामिल किया है। लेकिन वे इसमें एक्टिव तौर पर शामिल नहीं रहते।

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