दिल्ली दंगे की जांच के नाम पर उत्पीड़न, शिकायतकर्ता को 18 माह में 50 बार तलब करने पर कोर्ट ने जताई हैरानी

कोर्ट ने डीसीपी नार्थ ईस्ट की उस रिपोर्ट को खारिज कर तल्ख टिप्पणी की जिसमें उन्होंने दंगे से मामलों की जांच के लेकर रिपोर्ट दायर की थी। कोर्ट का कहना था कि विवेचना के ब्योरे को लेकर यह रिपोर्ट पूरी तरह खामोश है।

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दिल्ली दंगा सुनियोजित था- हाईकोर्ट (फाइल फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

दिल्ली दंगों की जांच के नाम पर पुलिस ने किस कदर मनमानी की है ये बात दिल्ली कोर्ट की तल्ख टिप्पणी से सहज ही समझी जा सकती है। हालिया मामले में कोर्ट ने उस घटना पर हैरानी जताई जिसमें पुलिस शिकायतकर्ता को ही बार-बार थाने में तलब करती रही। कोर्ट ने खुद माना कि पीड़ित शख्स के आरोपों से साफ है कि एसएचओ ने जांच के नाम पर उसको लगातार और कई बार परेशान करने में कोताही नहीं बरती।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक मौजूदा मामले में पीड़ित के वकील शमशाद ने कोर्ट को बताया था कि दंगों के दौरान उसके मुवक्किल का घर तहस नहस कर दिया गया था। उसे अपना घर छोड़कर जाना पड़ा। उसने किराए पर अपने रहने का जुगाड़ किया। पुलिस को सारी कहानी बताई गई पर पिछले 18 माह में उसके क्लाइंट को ही थाने में 50 बार तलब किया गया। उनका कहना था कि पुलिस बार-बार उसका मौजूदा पता पूछ रही है।

शमशाद का कहना था कि पीड़ित ने पता बता दिया तो पुलिस उसके मकान मालिक को तंग करेगी। ऐसे में उसके क्लाइंट को किराए के घर से भी हाथ धोना पड़ेगा। कोर्ट ने माना कि मकान मालिक के बारे में पड़ताल करने की कोई जरूरत नहीं है। न तो वह मौके पर मौजूद था और न ही उसका इस घटना से कोई लेना देना है। पुलिस के एक्शन से शख्स दिक्कत में आएगा।

चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग की कोर्ट ने इस मामले में ईस्टर्न रेंज के ज्वाइंट कमिश्नर को हिदायत देते हुए कहा कि दो सप्ताह में वह कोर्ट को बताए कि मामले में किस तरह से जांच की गई और आगे की जानी है। कोर्ट ने पुलिस अफसर को ताकीद की कि वह ख्याल रखें कि जांच के नाम पर उन लोगों को ही परेशान न किया जाए तो शिकायत लेकर पुलिस के पास गए हैं। पुलिस असली दोषियों की तलाश में अपनी एनर्जी लगाए।

कोर्ट ने डीसीपी नार्थ ईस्ट की उस रिपोर्ट को खारिज कर तल्ख टिप्पणी की जिसमें उन्होंने दंगे से मामलों की जांच के लेकर दायर की थी। कोर्ट का कहना था कि विवेचना के ब्योरे को लेकर यह रिपोर्ट पूरी तरह खामोश है। अदालत का कहना था कि जांच अधिकारी ने आरोपियों के काल रिकार्ड की जांच करने की जहमत तक नहीं उठाई। वह केवल उन लोगों को परेशान करते रहे जो सच बता रहे हैं।

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