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चुनावी रण: ऐ भाई…घरवालों का बोलबाला

कभी बिहार की राजनीति में नरेंद्र सिंह की तूती बोलती थी। इस बार उनके दो बेटे अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। कई सीटों पर पति-पत्नी में भी मुकाबला है।

बिहार के कैमूर जिले में मंगलवार को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को लेकर एक मतदान केंद्र के लिए जाता सुरक्षाकर्मी।

पूर्व विधायक नरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ सुनील पांडेय और उनके छोटे भाई पूर्व विधान पार्षद हुलास पांडेय इस बार अलग-अलग जिलों से चुनावी अखाड़े में उतरे हैं। चार बार विधायक का चुनाव जीतने वाले सुनील पांडेय भोजपुर के तरारी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय हैं और पूर्व विधान पार्षद हुलास पांडेय सीमावर्ती बक्सर जिले के ब्रह्मपुर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में हैं।

उन्हें लोजपा ने अपने टिकट पर चुनावी अखाड़े में उतारा है। पिछली बार उनकी पत्नी गीता पांडेय तरारी विस क्षेत्र से लोजपा के टिकट पर मैदान में थीं पर कांटे के मुकाबले में महज 272 वोटों से चुनाव हार गईं। हुलास पांडेय आरा-बक्सर स्थानीय निकाय से विधान परिषद का चुनाव जीतकर छह साल विधान परिषद सदस्य रहे। विधान परिषद का पिछला चुनाव हार गए थे।

कभी बिहार की राजनीति में नरेंद्र सिंह की तूती बोलती थी। इस बार उनके दो बेटे अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बड़ा बेटा अजय प्रताप जमुई से रालोसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में है। 2015 का विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर उन्होंने लड़ा था। इस बार टिकट नहीं मिला तो उन्होंने रालोसपा का दामन थाम लिया।

नरेंद्र सिंह के छोटे बेटे सुमित कुमार सिंह उर्फ विक्की बिहार के सबसे आखिरी विधानसभा क्षेत्र चकाई से निर्दलीय चुनाव मैदान में डटे हैं। 2010 के विधानसभा चुनाव में श्री सिंह ने झामुमो के टिकट पर विजय हासिल की थी। बाद में वे जद (एकीकृत) में शामिल हो गए थे। इस बार जद (एकी) से टिकट नहीं मिला तो वे 2020 के चुनाव में जद (एकी) से टिकट नहीं मिलने पर बागी के तौर पर मैदान में हैं।

नवादा जिले में पति-पत्नी की जोड़ी भी चुनाव मैदान में है। नवादा विधानसभा क्षेत्र से जद (एकी) के टिकट पर कौशल यादव और गोविंदपुर विधानसभा क्षेत्र से इसी पार्टी के टिकट पर उनकी पत्नी पूर्णिमा यादव मैदान में हैं। कौशल अपने विधायक पिता युगल किशोर सिंह यादव और विधायक माता गायत्री देवी की विरासत संभाल रहे हैं और यादव बहुल जिले के क्षत्रप माने जा रहे हैं। कौशल खुद चार बार विधानसभा पहुंच चुके हैं, जबकि अपनी पत्नी पूर्णिमा देवी को भी चार बार विधानसभा पहुंचाने में सफल रहे हैं।

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