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राफेल सौदा: मोदी सरकार नहीं चाहती कि दुनिया पढ़े ये 3 दस्तावेज, सीधे पीएमओ पर उठी है अंगुली

Rafel Deal: केंद्र सरकार तीन दस्तावेजों को विशेषाधिकार का हिस्सा मान रही थी और उसका खुलासा नहीं होने देना चाह रही थी। इन दस्तावेजों में सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय पर सवाल खड़े किए गए हैं।

Author Updated: April 11, 2019 2:01 PM
केंद्र सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता दस्तावेजों के चुनिंदा और अधूरी तस्वीर पेश कर रहे हैं। (फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

राफेल सौदा (Rafel Fighter Jet Deal) मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2018 के फैसले की समीक्षा की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं ने उन तीन दस्तावेजों पर भरोसा किया, जिनके संबंध में केंद्र सरकार को आपत्ति थी। दौरान सरकार ने दावा किया कि इन दस्तावेजों पर उनका विशेषाधिकार था और इन्हें अवैध ढंग से हासिल किया गया। हालांकि, बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की आपत्तियों को खारिज कर दिया और समीक्षा याचिकाओं में दस्तावेजों को अनुमति दे दी। वैसे, जिन तीन दस्तावेजों को लेकर मोदी सरकार को आपत्ति थी, उनका ब्यौरा नीचे दिया गया है—

1. जिन तीन दस्तावेजों का जिक्र किया गया उनके मुताबिक 24 नवंबर 2015 को शुरू किए गए रक्षा मंत्रालय के नोट ने तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की चर्चाओं को हरी झंडी दे दी थी। नोट में रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने लिखा, “RM (रक्षा मंत्री) कृपया देख सकते हैं। पीएमओ द्वारा इस तरह की चर्चाओं से बचा जाना चाहिए, क्योंकि यह हमारी बातचीत की पोजिशन को गंभीरता से नज़रअंदाज कर रहा है।”

कुमार उप सचिव (Air- II) एसके शर्मा द्वारा एक नोट का जवाब दे रहे थे, जिन्होंने लिखा था, “हम पीएमओ को सलाह दे सकते हैं कि जो भी अधिकारी भारतीय निगोशिएटिंग टीम का हिस्सा नहीं हैं, वे फ्रेंच के अधिकारियों के साथ समानांतर बातचीत से बच सकते हैं। यदि मामले में पीएमओ रक्षा मंत्रालय द्वारा की जा रही बातचीत के परिणाम के बारे में आश्वस्त नहीं है, तो उचित स्तर पर पीएमओ के नेतृत्व में होने वाली वार्ताओं की संशोधित तौर-तरीके को अपनाया जा सकता है।” रक्षा मंत्रालय की इन चिंताओं के लिए, पर्रिकर ने लिखा: “ऐसा प्रतीत होता है कि PMO और फ्रांसीसी राष्ट्रपति का कार्यालय उस मुद्दे की प्रगति की निगरानी कर रहा है जो शिखर बैठक का एक परिणाम था। पैरा 5 एक तरह ओवर रिएक्शन की तरह मालूम होता है।”

2. रक्षा मंत्रालय का नोट 18, अगस्त 2018: यह 12-13 जनवरी, 2016 को पेरिस में फ्रांसीसी पक्ष के साथ एनएसए अजीत डोभाल की बैठकों को रिकॉर्ड है। रक्षा मंत्रालय की एयर विंग द्वारा तैयार किए गए नोट के मुताबिक पर्रिकर नेगोसिएशन टीम के दायरे से हटकर बातचीत कर रहे डोभाल की अनुसंशाओं को तरजीह देते हैं, जिनमें संप्रभुता और मध्यस्थता कैबिनेट की सुरक्षा समिति करेगी, जबकि यह काम रक्षा अधिग्रहण काउंसिल करने में सक्षम है।

3. 1 जून 2016, भारतीय वर्ता टीम के तीन सदस्यों के विवादास्पद नोट: यह सौदे के विभिन्न पहलुओं पर भारतीय वार्ता टीम के तीन सदस्यों की आपत्तियों को दर्ज करता है। यह नोट, जिसमें दस आपत्तियां थीं, इसे भारतीय वार्ता टीम की अंतिम रिपोर्ट में जोड़ा गया था।

इस बीच रक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बुधवार को एक बयान में कहा कि याचिकाकर्ता दस्तावेजों के चुनिंदा और अधूरी तस्वीर पेश कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ यह बताने में विफल हो रहे हैं कि कैसे मुद्दों को संबोधित किया गया।

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