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परामर्श: महामारी, अवसाद और जज्बा

महामारी से हटकर भी देखें तो अवसाद एक भयंकर मानसिक रोग है जिसके कारण कई अत्यंत साधन संपन्न एवं पढ़े लिखे लोग भी आत्महत्या कर लेते हैं। हाल ही में अवसाद के कारण युवा फिल्म अभिनेता सुशांत राजपूत द्वारा की गयी आत्महत्या इसी क्रम में एक दु:खद घटना है।

Author Published on: July 6, 2020 12:28 AM
consultation, medical, corona virusसपनों के टूटने से अवसाद की स्थिति में जाना अब सामान्य बात होती जा रही है, लोगों को समझना होगा कि सपने जीवन नहीं होते हैं, जिंदगी उसके बाद भी होती है।

साध्वी कमल वैष्णव
कोरोना महामारी से आए दिन मौत के बढ़ते आंकड़े भय पैदा कर रहे हैं और यह स्वाभाविक भी है। किंतु ऐसी स्थिति में स्वयं को नियंत्रित रखना अति आवश्यक है। इस संकट में स्वयं को सकारात्मक रखने से ही इस विषाणु पर आधी विजय प्राप्त हो जाती है। सजग रहने, सावधानियां बरतने से तथा स्वच्छ, पौष्टिक, संतुलित एवं शाकाहारी भोजन करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 के आखिर तक कोरोना महामारी के कारण देश की 20 फीसदी आबादी के मानसिक बीमारियों की चपेट में आने की आशंका है। जो अपने आप में एक चिंता का विषय है। मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या के मामले भी दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं।

महामारी से हटकर भी देखें तो अवसाद एक भयंकर मानसिक रोग है जिसके कारण कई अत्यंत साधन संपन्न एवं पढ़े लिखे लोग भी आत्महत्या कर लेते हैं। हाल ही में अवसाद के कारण युवा फिल्म अभिनेता सुशांत राजपूत द्वारा की गयी आत्महत्या इसी क्रम में एक दु:खद घटना है।

अवसाद के बढ़ते कारण व समाधान
1.अधिक चर्चा : जहां दो लोग परस्पर बात करते हैं चर्चा कोरोना महामारी व मृत्यु आंकड़ों के ही करते हैं। ऐसी चर्चाओंं।
2.सोशल मीडिया : प्रत्येक क्षण टीवी, मोबाइल, गूगल पर कोरोना की खबरें सुनना ,पढ़ना, जानना आदि। यह सोचने समझने की शक्ति को प्रभावित करती हैं। इनका त्याग करके जीवन में आगे क्या नया किया जा सकता है इस और सोचने का प्रयास करना चाहिए।
3. घरों का माहौल सकारात्मक रखें : घर में नीरस बातें व भय का माहौल पैदा नहीं करना चाहिए।

4. आशा बनाए रखें : रोग के साथ औषधि भी होती है। उम्मीद रखें कि शीघ्र ही इस संक्रमण की औषधि बनेगी और सब ठीक होगा ।
5. कार्य क्षेत्र प्रभावित होना लोगों के कार्य, व्यापार और नौकरी प्रभावित हुए हैं , किंतु सकारात्मक सोच रखते हुए इस कठिन चुनौती को सुअवसर जानकर सफलता में बदलने का प्रयास करें।
6. खिलाड़ी जैसा जज्बा रखें : जीवन भी कुश्ती के खेल के जैसा है खिलाड़ी गिरता है और फिर से उठता है। इसी प्रकार हमें भी जज्बा रखना है।

यदि यह कहा जाए कि चुनौतियों का दूसरा नाम ही जीवन है तो अनुचित नहीं होगा । जीवन के प्रति दृष्टिकोण सदैव सकारात्मक रखना चाहिए।
याद रखें
याद रखने योग्य यह है की जीवन अमूल्य है। इसे सकारात्मक दृष्टिकोण से सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में कोई भी शय इतनी कीमती नही होती की उसकी कीमत जीवन देकर चुकाई जाए। विफलता का अर्थ निराशा नही होता। सोचने का अंदाज बदलिये हो सकता है आप किसी दूसरे श्रेष्ठ कार्य के लिए बने हैं और उसी दिशा में अपनी ऊर्जा को लगाइए। एक राह बंद होती है तो दूसरी अवश्य खुलती है।

मानसिक तनाव महसूस करते हैं तो तुरंत अच्छे मनोरोग चिकित्सक से परामर्श करें। मन और मस्तिष्क को मजबूत बनाकर सहज और सादगीपूर्ण जीवन जीएं। अपना व अपनों का ख्याल रखें। जीवन बेहद खूबसूरत है इसे खूबसूरती से जीएं।

आइए सकारात्मक भाव से जानें की ऐसी विकट स्थिति में अवसाद का शिकार होने से कैसे बचें।

सहज भाव से विचार कीजिए:
1. ऐसी महामारी के कारण जीवन को बचाना ही प्राथमिकता होनी चाहिए। जीवन उसी का सुरक्षित होता है जो सकारात्मक सोच रखते हैं, सावधानियां बरतते हैं और संतुलित आहार लेते हैं ।
2. प्रत्येक व्यक्ति को सतर्क व सजग रहना और कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है ।
जैसे : किसी से हाथ न मिलाना, मास्क का उपयोग करना, व्यक्तिगत उचित दूरी बनाए रखना। योगा, प्रणायाम तथा मेडिटेशन करना। गर्म पानी, गर्म भोजन और हल्दी वाला दूध आदि का सेवन करना।

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