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कोरोना के बीच एक साल में मोदी सरकार ने पेट्रोल 22.99₹ और डीजल 20.93₹ बढ़ाया, कांग्रेस ने बताया- “जन लूट सरकार”

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने तेल की कीमतें आसमान में पहुंचाने के लिए मोदी सरकार को जनलूट सरकार करार दिया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा- कोरोना की मार झेल रहे आम लोगों को सरकार कोई राहत देने की बजाए टैक्स का बोझ लाद रही ‘जन लूट सरकार’।

ऑइल मार्केटिंग कंपनियों ने चुनाव खत्म होते ही फिर से बढ़ाने शुरू कर दिए दाम। (Indian Express)।

कोरोना संकट के बीच भी मोदी सरकार पेट्रोल डीजल के जरिए मुनाफाखोरी करने से बाज नहीं आ रही है। पांच राज्यों में चुनाव खत्म होते ही सरकार तेल की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी करने लग गई है। रोजाना होने वाली बढ़ोतरी की वजह से दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 92.58 रुपये और डीजल का दाम 83.22 रुपये तक पहुंच गया है।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने तेल की कीमतें आसमान में पहुंचाने के लिए मोदी सरकार को जनलूट सरकार करार दिया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा- कोरोना की मार झेल रहे आम लोगों को सरकार कोई राहत देने की बजाए टैक्स का बोझ लाद रही ‘जन लूट सरकार’। मोदी सरकार ने पिछले एक साल में पेट्रोल 22.99 व डीज़ल 20.93 रुपये तक बढ़ाया है। पेट्रोल की क़ीमतों में केवल 37.32% व डीज़ल में 44.03% आधार मूल्य है। बाकी टैक्स, मुनाफा और कमीशन है। उनका कहना है कि दो मई को चुनाव परिणाम आए थे। 4 मई से अब तक नौ बार दाम बढाए जा चुके हैं।

तेल कंपनी इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार 17 मई को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 92.58 रुपये और डीजल का दाम 83.22 रुपये पर स्थिर रही। मुंबई में पेट्रोल 98.88 रुपये और डीजल 90.40 रुपये, कोलकाता में पेट्रोल 92.67 रुपये और डीजल 86.06 रुपये है। जबकि चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 94.34 रुपये और डीजल 88.07 रुपये रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आज बढ़ोतरी नहीं की है। इसे पिछले दिन के रेट पर स्थिर रखा है। 16 मई को कंपनियों ने पेट्रोल 24 पैसे प्रति लीटर तो डीजल 27 पैसे प्रति लीटर महंगा कर दिया था।

गौरतलब है कि सरकार और इसके नुमाइंदे लगातार ये बात कहते आ रहे हैं कि तेल कंपनियों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। लेकिन उनकी ये बात तब एक जुमला साबित हो जाती है जब देश के किसी भी हिस्से में चुनावी बिगुल बज जाए। तब कंपनियां सरकारी नियंत्रण में आ जाती हैं। उस दौरान तेल के दाम नहीं बढ़ते।

विपक्ष आरोप लगाता है कि सरकार के नियंत्रण अगर तेल कंपनियों पर नहीं है तो चुनाव के दौरान दाम क्यों नहीं बढ़ते। साफ है कि सरकार लोगों को जुमलेबाजी में फंसा रही है। जब वोट लेने होते हैं तब दामों पर सरकारी नियंत्रण दिखने लग जाता है। चुनाव परिणाम घोषित होते ही सरकार को जनता से सरोकार नहीं रहता और रोजाना तेल के दाम में बढ़ोतरी शुरू होने लग जाती है। एक तरफ कोरोना संकट से बहुत से लोगों की आजिविका छिन गई वहीं काम धंधा चौपट होने के कगार पर है। ऐसे में तेल के दाम बढ़ने से आम जन बुरी तरह से परेशान है। सरकार केवल अपना ही मुनाफा देख रही है।

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