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महाराष्ट्र सरकार की कोशिशों को झटका, सिर्फ 28 पर्सेंट किसानों को दे पाई कृषि लोन!

महाराष्ट्र में कुल 78 प्रतिशत किसान छोटे और मध्यम दर्जे के हैं, जिनके पास खेती का रकबा काफी कम है। फसल नुकसान की वजह से ये किसान काफी ज्यादा प्रभावित होते हैं।

Author मुंबई | June 12, 2019 3:38 PM
तस्वीर का प्रयोग प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Express Photo)

महाराष्ट्र के सभी 100 प्रतिशत किसानों को ‘संस्थागत ऋण तंत्र’ के तहत लाने की राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजना को बड़ा झटका लगा है। वजह ये है कि वित्तिय वर्ष 2018-19 में मात्र 28.64 प्रतिशत किसानों को ही कृषि लोन मिला है। महाराष्ट्र में किसानों की कुल संख्या 1.36 करोड़ है। वर्ष 2018-19 में रबी और खरीफ फसल के मौसम में कुल 38.95 लाख किसान ही कृषि लोन का लाभ उठा सके। काफी कम संख्या में लोन मिलना, राज्य के किसानों के लिए खतरे की घंटी है क्योंकि महाराष्ट्र में कई बार सूखे की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। राज्य में कुल 78 प्रतिशत किसान छोटे और मध्यम दर्जे के हैं, जिनके पास खेती का रकबा काफी कम है। फसल नुकसान की वजह से ये किसान काफी ज्यादा प्रभावित होते हैं।

किसानों को लोन दिए जाने के लिए किसी तरह की आर्थिक बाधा नहीं थी क्योंकि सरकार ने कई वित्तिय संस्थानों के माध्यम से विदर्भ, मराठावाड़ा, उत्तर महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र के किसानों के लिए 58,324 करोड़ रुपये दिए थे। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की रिपोर्ट के अनुसार, “वर्ष 2018-19 के लिए जारी कुल 58,324 करोड़ में से मात्र 54 प्रतिशत 31,237 करोड़ लोन के रूप में बांटे गए।”

विदर्भ के पिछड़े क्षेत्रों (46.9 प्रतिशत), मराठवाड़ा (43 प्रतिशत), उत्तरी महाराष्ट्र (45.4 प्रतिशत) में फसलों की कटाई पश्चिमी महाराष्ट्र (75.6 प्रतिशत) और कोंकण (82 प्रतिशत) की तुलना में कम थी। एसएलबीसी ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि राज्य में अत्यधिक सूखे के कारण कम कृषि लोन वितरित किया गया है।

इस मामले पर राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने कहा, “जिला कॉपरेटिव बैंक सहित अन्य वित्तिय संस्थान किसानों तक पहुंचने में नाकाम रहे।” राज्य सरकार ने कहा कि बैंक किसानों को कृषि लोन देने से मना नहीं कर सकते। पिछले 19 महीने में राज्य सरकार ने 51 लाख किसानों के 23,000 करोड़ लोन माफ किए। इसलिए, वर्ष 2018-19 में कम से कम 51 लाख किसानों को कृषि लोन लेना चाहिए था। इसके बदले केवल 38.95 लाख किसानों को ही लोन मिला।

महाराष्ट्र कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेज के चेयरमैन पाशा पटेल ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों को फसल लोन देने की बात आती है तो वित्तिय संस्थानों को सहूलियत दी जाती है लेकिन उनकी पहली चिंता लोन की वसूली होती है। तकनीकी और थकाऊ प्रक्रिया की वजह से छोटे किसान लोन नहीं ले पाते हैं।”

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