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Lockdown: भूख के डर से पैदल सफर

राज मिस्त्री का काम करने वाले नीरज कुमार ने बताया कि उन्हें सुबह ही आनंद विहार में बस अड्डे से दूसरे राज्यों के लिए बसें जाने की जानकारी मिल गई थी। उन्हें हरदोई जाना है। दिल्ली में अब कोई काम नहीं है और यहां पर उनके आर्थिक हालात ठीक नहीं है। वह अपनी पत्नी व बच्चों के साथ पैदल ही आनंद विहार के लिए निकले हैं।

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मजदूरों को कोरोना विषाणु से ज्यादा भूख का डर है। काम बंद है इसलिए वे पैदल ही अपने गांव के लिए निकल पड़े हैं। आनंद विहार में बसों की सूचना मिली तो शनिवार को सुबह से ही लोनी रोड, गोल चक्कर के पास से लोगों के काफिले निकलते नजर आए। घर जाने लिए निकले इन लोगों में इटावा, लखनऊ, मैनपुरी, हरदोई, आजमगढ़ जैसे क्षेत्रों के लोग थे। जो परिवहन निगम की बस नहीं मिलने की स्थिति में पैदल ही 300-400 किलोमीटर के सफर का मन बनाकर निकले थे।

राज मिस्त्री का काम करने वाले नीरज कुमार ने बताया कि उन्हें सुबह ही आनंद विहार में बस अड्डे से दूसरे राज्यों के लिए बसें जाने की जानकारी मिल गई थी। उन्हें हरदोई जाना है। दिल्ली में अब कोई काम नहीं है और यहां पर उनके आर्थिक हालात ठीक नहीं है। वह अपनी पत्नी व बच्चों के साथ पैदल ही आनंद विहार के लिए निकले हैं।

लोनी रोड से पैदल गुजर रहे योगेंद्र ने बताया कि वे एटा के रहने वाले हैं। दिल्ली में भजनपुरा में रहते हैं। घर में राशन नहीं है और कोई काम भी नहीं मिल रहा है। घर में खाली बैठे हैं। गांव में होंगे तो खाना तो मिलेगा। गुरुग्राम से चलकर लोनी बार्डर पहुंचे हारून को गोरखपुर पहुंचना था। इसलिए जब कोई सवारी नहीं मिली तो पैदल ही वहां से निकल गए।

गोकुलपुर के दीपू ने बताया कि बंद कि वजह से एक सप्ताह से कोई काम नही हैं। बंद के दौरान दिल्ली में रुके तो भूख से मर जाएंगे। इसलिए जाना जरूरी नहीं मजबूरी है। शमशाद जो कि मुस्तफाबाद के रहने वाले हैं, यहां रहकर सिलाई का काम करते हैं। उन्होंने भी पांच अन्य साथियों के साथ सिकंदराबाद जाने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि से दिल्ली बंद हुई है़, तभी से कोई काम नहीं है।

पुलिस ने रोका तो गलियों से रास्ता तलाशा
संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से पैदल निकले चालकों ने गलियों के मार्गों का ही अपना रास्ता बना लिया। चालक योगेंद्र सिंह ने बताया कि प्रमुख मार्ग पर पुलिस का सख्त पहरा है। इसलिए गलियों के मार्ग से प्रमुख मार्ग तक जा रहे है। संबंधित ट्रांसपोर्ट दुकान के मालिक ने दुकान बंद कर दी है। वहीं ठहरने का इंतजाम है। बस भी नहीं मिली तो करीब 500 किलोमीटर आजमगढ़ तक पैदल ही जाना होगा।

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