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मुलायम सिंह यादव का शाही बर्थडे कल, लंदन से आई बग्घी

अंशुमान शुक्ल समाजवादियों के बीच छोटे लोहिया कहे जाने वाले जनेश्वर मिश्र की जयंती पर एक शब्द पैदा हुआ मुलायमवाद। इस शब्द के जनक थे अमर सिंह जिनकी मुलायम भक्ति किसी दौर में सर्वविदित थी। जनेश्वर मिश्र की जयंती पर मुलायमवाद को परिभाषित करना कठिन जान पड़ रहा था लेकिन इस कठिनाई को मुलायम के […]

Author Updated: November 21, 2014 5:15 PM

अंशुमान शुक्ल

समाजवादियों के बीच छोटे लोहिया कहे जाने वाले जनेश्वर मिश्र की जयंती पर एक शब्द पैदा हुआ मुलायमवाद। इस शब्द के जनक थे अमर सिंह जिनकी मुलायम भक्ति किसी दौर में सर्वविदित थी। जनेश्वर मिश्र की जयंती पर मुलायमवाद को परिभाषित करना कठिन जान पड़ रहा था लेकिन इस कठिनाई को मुलायम के दूसरे बेहद करीबी आजम खां ने अपने रफीकुल मुल्क का जन्मदिन मनाने का एलान कर दूर कर दिया। विरोधी कहते हैं, धरतीपुत्र के जन्मदिन पर बग्घी की सवारी और केक का कटना समाजवादी सोच तो किसी भी हाल में नहीं हो सकती। खास तौर पर डा. राममनोहर लोहिया के सोच से तो यह हरगिज मेल नहीं खाता। जाहिर है ये समाजवाद की चाशनी में पिरोया वो मुलायमवाद है जिसकी पटकथा अमर सिंह ने लिखी और उसे मूर्त रूप आजम खां दे गए।

उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आज भी डा. राम मनोहर लोहिया शिद्दत से याद किए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भले ही किस्सागोई की शक्ल में ही सही, उनके चर्चे आज भी आम हैं। डा. लोहिया से जुड़ा एक वाकया 1964 का है। फर्रुखाबाद संसदीय सीट पर उपचुनाव हो रहे थे और डा. राम मनोहर लोहिया इस चुनाव में उम्मीदवार थे। वे अपने समर्थकों के साथ मोहम्मदाबाद से फर्रुखाबाद वापस आ रहे थे। वहां सभा थी। यशवंत सिंह कटियार को डा. लोहिया की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। रास्ते में कटियार ने डा. लोहिया के लिए भोजन का प्रबंध किया था। चट्टान समाचार पत्र के संपादक राजनारायण मिश्र और सबल समाचार पत्र के संपादक रमेश चंद्र शर्मा डा. लोहिया के साथ थे। मेज पर सफेद कपड़ा बिछा कर डा. लोहिया के भोजन का बंदोबस्त किया गया था और सामने फर्श पर स्कूल की दरियां बिछा कर जनता के भोजन की व्यवस्था थी। डा. लोहिया ने मेज पर अपने लिए भोजन सजा देखा तो बोले हम गैर बराबरी के खिलाफ लड़ रहे हैं। अगर हम लोग ही ऐसे दृश्य पेश करेंगे तो हमारी लड़ाई का क्या होगा? यह कह कर उन्होंने भोजन नहीं किया। यह वो उपचुनाव था जिसमें पहली बार डा. लोहिया जीत कर सांसद बने।
घटना के चश्मदीद एक वरिष्ठ समाजवादी कहते हैं, यह घटना बेहद साधारण दिखती जरूर है लेकिन इसका असर बहुत गहरा है। इसीलिए यह लोगों को अब तक याद है। लेकिन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव का जिस शाही अंदाज में जन्मदिन मनाया जा रहा है, उससे साफ है कि अब बहुतों को बहुत कुछ बिसर गया है। यदि बिसरा न होता तो 75 किलो का केक दिल्ली से क्यों मंगाया गया होता। वे कहते हैं, बग्घी की सवारी क्यों उन मुलायम सिंह यादव को कराई जा रही है जो कभी किसी गरीब को ठिठुरता देखकर अपने गर्म कपड़े उतार कर उसे पहना दिया करते थे।

रामपुर में पूरा सरकारी अमला हफ्ते भर पहले से जमा है। आजम खां ने जश्न की खास तैयारियां की हैं। इंग्लैंड से मंगाई गई बग्घी पर सवार होकर मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र अखिलेश यादव निकलेंगे। दोनों के ठहरने का बंदोबस्त रामपुर के सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर में किया गया है जहां से मौलाना अली जौहर विश्वविद्यालय की दूरी 12 किलोमीटर है। इस पूरे रास्ते पर लाल रंग की आलीशान कालीन बिछाई जाएगी और सड़क के दोनों किनारों को विदेशी फूलों से सजाया जाएगा। राजशाही के प्रतीक इस सुर्ख लाल कालीन पर इंग्लैंड से आई बग्घी गुजरेगी और उस पर मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सवार होंगे। जौहर विश्वविद्यालय के परिसर में रात को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। इसमें हंसराज हंस और साबरी ब्रदर्स जैसे कलाकार माहौल को और खुशगवार बनाएंगे। रात 12 बजे मुलायम सिंह के जन्मदिन पर 75 फुट का केक काटा जाएगा।

पूरे प्रदेश में समाजवादी अपने नेताजी के जन्मदिन को समता दिवस के तौर पर मनाएंगे। लेकिन रामपुर में होने वाला खास आयोजन प्रदेश भर में आयोजित होने वाले समता दिवस को ढक लेगा। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस समाजवाद की परिकल्पना के तहत समाजवादी नेता के जन्मदिन को इतना भव्य बनाने की तैयारी है। खुद को सियासत का माहिर करार देने वाले नेता ऐसा आयोजन कर पार्टी की कौन सी छवि जनता के बीच उकेरने की कोशिश में हैं? क्या उन्हें लगता है कि बीमारू राज्य में शुमार उत्तर प्रदेश के रहने वाले लोग इस तरह के आयोजन से खुश हो जाएंगे। क्या ऐसे आयोजनों से समाजवादी पार्टी का वोट बैंक मजबूत होगा? ये वो सवाल हैं जिनका उत्तर सवा दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में मिलेगा।

लेकिन इतना तय है कि नेताजी के जन्मदिन का आयोजन अगले सवा दो साल तक विरोधियों के हमलों की शक्ल में पूरी पार्टी के लिए परेशानी का सबब जरूर बना रहेगा।

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