पंजाब के आढ़तियों ने अपने स्टाफ को लेकर किया था आंदोलन, प्रदेश सरकार ने केंद्र के खिलाफ खड़ाकर बचा ली थी अपनी जान- बोले BKS चीफ

भारतीय जनता पार्टी ने भी मुजफ्फरनगर में हुई ‘किसान महापंचायत’ को रविवार को ‘‘चुनाव रैली’’ करार दिया और इसके आयोजकों पर उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीति करने का आरोप लगाया।

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मंडी में बेचने के लिए फसल को ट्रैक्टर में लोड करते श्रमिक (एक्सप्रेस फोटोः गुरमीत सिंह)

किसानों की तरफ से रविवार को मुजफ्फरनगर में महापंचायत का आयोजन किया गया। किसानों के मुद्दे को लेकर आजतक चैनल पर चल रहे एक शो में भारतीय कृषक समाज के अध्यक्ष कृष्ण वीर चौधरी ने गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब के आढ़ती अपने स्टाफ को लेकर आंदोलन कर रहे थे। पंजाब सरकार ने अपनी जान बचाने के लिए इन्हें खड़ा कर दिया।

एंकर ने कृष्ण वीर चौधरी से पूछा कि ये जो किसान दिल्ली बॉर्डर पर बैठे हैं आप उन्हें किसान मानते हैं या आप भी मानते हैं कि राजनीतिक दलों ने इन्हें बैठा दिया है। कृष्ण वीर चौधरी ने कहा कि पंजाब के आढ़तियों ने सरकार के विरोध में आंदोलन किया था लेकिन अपनी जान बचाने के लिए सरकार ने इन्हें कृषि कानून के खिलाफ खड़ा कर दिया। ये किसान नहीं हैं।

बताते चलें कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी मुजफ्फरनगर में हुई ‘किसान महापंचायत’ को रविवार को ‘‘चुनाव रैली’’ करार दिया और इसके आयोजकों पर उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीति करने का आरोप लगाया। केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा रविवार को आयोजित ‘किसान महापंचायत’ में उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों से हजारों किसानों ने भाग लिया।

भाजपा के किसान मोर्चा प्रमुख एवं सांसद राजकुमार चाहर ने एक बयान में दावा किया कि ‘महापंचायत’ के पीछे का एजेंडा राजनीति से जुड़ा है, न कि किसानों की चिंताओं से। उन्होंने कहा कि यह किसान महापंचायत नहीं, बल्कि राजनीतिक एवं चुनावी बैठक थी तथा विपक्ष और संबंधित किसान संगठन राजनीति करने के लिए किसानों का इस्तेमाल कर रहे हैं। चाहर ने दावा किया कि किसी अन्य सरकार ने किसानों के लिए इतना काम नहीं किया है, जितना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले सात साल में किया है। केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले नौ महीने से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हुए हैं।

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