जज से बोले लालू- बड़ी ठंड है, ठंडे दिमाग से काम लीजिए, वकील होने की धौंस दी तो मिला कड़क जवाब

अदालत में लालू और जज के बीच मजेदार बात जरूर हुई। अदालत में लालू ने जज से यहां तक कह दिया कि कमरे में बड़ी ठंड है इसलिए थोड़ी ठंड रखिए।

गुरुवार (4 जनवरी) को रांची में सीबीआई अदालत में पेशी के लिए जाते राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (फोटो सोर्स- पीटीआई)

चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर सजा का एलान गुरुवार को भी नहीं हो सका। अब अदालत शुक्रवार को अपना फैसला सुनाएगी। लेकिन अदालत में लालू और जज के बीच मजेदार बात जरूर हुई। अदालत में लालू ने जज से यहां तक कह दिया कि ठंड बहुत है इसलिए थोड़ी ठंड रखिए। लालू ने अपने बेटे तेजस्वी यादव और तीन अन्य साथियों शिवानंद तिवारी, मनीष तिवारी और रघुवंश प्रसाद सिंह को अदालत की अवमानना के आरोप में मिले नोटिस को वापस लेने की गुहार कोर्ट से लगाई। लालू ने अपने वकील होने की धौंस भी दी।

लालू ने जज से कहा- क्या हमें कल अदालत में हाजिर होना है? जज ने कहा- अगर आपको कोई समस्या हो तो बताइए, अपने साथियों से कहिए कोई प्रदर्शन न करें। लालू ने कहा कि अगर कोई ऐसा करेगा तो वह उसे पार्टी से निकाल देंगे। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ अदालत का कहना मानेंगे।

लालू ने फिर जज से कहा कि उन्हें वीडियो कॉन्फ्रिंग के बजाय अदालत में प्रत्यक्ष तौर पर बुलाया जाए। जज ने कहा कि इसके लिए जगदीश शर्मा, विजिलेंस और बिहार के पूर्व डीजीपी डीपी ओझा जिम्मेदार हैं। जज ने कहा उन्होंने उनके फैसले की जाति के आधार पर आलोचना की थी। लालू ने कहा- जिन्हें आपने अवमानना का नोटिस दिया है, उन्होंने कुछ नहीं कहा है। वे कह चुके हैं कि कानून का पालन करेंगे। जज  ने कहा कि उन्होंने मेरे फैसले को जाति आधारित कहा।

लालू ने कहा- यह राजनीति की भाषा है। आपके खिलाफ कुछ भी नहीं कहा। जाति मायने नहीं रखती है। अब तो अंतरजातीय विवाह भी हो रहे हैं। इसी के साथ लालू ने उनके साथियों के नोटिस वापिस लेने की गुहार लगाई। जज ने कहा कि उन्हें 23 तारीख को अदालत में आना होगा। लालू बोले- मैं सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट का वकील हूं। इस पर जज ने कहा कि आपको जेल में डिग्री कर लेनी चाहिए। लालू यहीं नहीं रुके और बोले कि यहां बहुत ठंड है, आप अपना दिमाग ठंडा रखें। जज ने कहा- मैं अपने दिमाग से काम करता हूं। आपके साथियों ने कहा कि मैं पक्षपात करता हूं।

इस बहुचर्चित मामले में लालू के अलावा 15 अन्य लोगों के खिलाफ शुक्रवार को सजा का एलान होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जज शिवपाल सिंह ने अदालत में खुलासा किया कि सुनवाई से पहले लालू के लोगों ने उन्हें फोन किया था। एएनआई के मुताबिक जज ने लालू से कहा कि आपके कई रेफरेंसेज आए हैं मगर चिंता मत कीजिए, मैं सिर्फ कानून का पालन करूंगा।

मामले में एजेंसी के वकील ने अदालत से दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा की दरख्‍वास्‍त की ताकि कोई ऐसा भयंकर अपराध करने का दुस्‍साहस न कर सके।

गुरुवार (4 जनवरी) को रांची में सीबीआई अदालत में पेशी के लिए जाते राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (फोटो सोर्स- पीटीआई)

क्या है मामला? 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, आर के राणा, जगदीश शर्मा और तीन वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारियों समेत 16 दोषियों को सजा होनी है। सजा का एलान गुरुवार को होना था, जो अब शुक्रवार को होगा। अदालत ने 23 दिसंबर को मामले के सभी दोषियों को बिरसा मुंडा जेल भेज दिया था। इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, बिहार विधानसभा की लोक लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत समेत छह लोग निर्दोष करार दिए गए थे।

लालू के लोगों ने अदालत पर पक्षपात करते हुए फैसला करने का आरोप लगाया था। अदालत ने फैसले के खिलाफ कथित बयानबाजी पर संज्ञान लेते हुए लालू के बेटे तेजस्वी यादव, लालू की पार्टी के नेता नेता रघुवंश प्रसाद सिंह, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी और शिवानंद तिवारी को अवमानना नोटिस जारी किया और उन्हें 23 जनवरी को अदालत के में हाजिर होने का आदेश दिया।

लालू प्रसाद यादव ने जेल जाने से पहले कहा था कि राजनीतिक साजिश के तहत उन्हें फंसाया गया है। वह उच्च न्यायालय का रुख करेंगे। उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है।

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