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सदन में सबसे ज्यादा कार्यवाही की बात करती है सरकार, 2020 में सबसे कम दिन चली राज्यसभा

इससे पहले साल 1999, 2004 और 2008 में राज्यसभा की कार्यवाही 50 दिन से कम रही थी। 1999 में 48 दिन, 2004 में 46 दिन और 2008 में भी 46 दिन काम हुआ था।

चौपाल
संसद भवन। फाइल फोटो।
केंद्र सरकार ने इस बार संसद का शीतकालीन सत्र बुलाने से इंकार कर दिया। इसके साथ साल 2020 में राज्यसभा में सिर्फ 33 दिन ही काम हुआ। संसद के इतिहास में एक साल में राज्यसभा में इससे कम काम आज तक नहीं हुआ है। इससे पहले सिर्फ तीन मौके ऐसे रहे हैं जिस साल राज्यसभा की कार्यवाही 50 दिन से कम रही है।

हालांकि 2020 में कोविड महामारी के चलते संसद के बजट सत्र और मानसून सत्र में भी कटौती की गई थी। बजट सत्र में 31 दिन कामकाज होना था जिसे सीमित कर सिर्फ 23 दिन कर दिया गया। इसी तरह मानसून सत्र में 18 दिन कार्यवाही होनी थी और सिर्फ 10 दिन ही कामकाज हुआ।

बता दें कि इससे पहले साल 1999, 2004 और 2008 में राज्यसभा की कार्यवाही 50 दिन से कम रही थी। 1999 में 48 दिन, 2004 में 46 दिन और 2008 में भी 46 दिन काम हुआ था।

राज्यसभा में इस समय बीजेपी के सबसे ज्यादा सदस्य हैं। फिलहाल भगवा पार्टी के 93 सदस्य हैं। हालांकि मोदी सरकार के इस कार्यकाल में बीजेपी के लिए ऊपरी सदन से कानून पारित करना अब इतना मुश्किल नहीं रह गया है। सितंबर महीने में पारित कृषि कानून इसकी एक बानगी है कि राज्यसभा में भी अब बीजेपी का ही बोलबाला है।

संसद के इतिहास में 36 साल पहले 1984 में शीतकालीन सत्र रद्द किया गया था। 1979 और 1975 में भी तत्कालीन सरकारों ने शीतकालीन सत्र नहीं बुलाया था। राज्यसभा सचिवालय के मुताबिक, ”राज्यसभा में कम दिन हुए कामकाज से ज्यादा असर नहीं पड़ा है। 2020 में, राज्यसभा के काम करने का प्रतिशत 82.7% रहा। पिछले 11 सालों में राज्यसभा में सबसे ज्यादा काम 2020 में हुआ है।”

पिछले साल राज्यसभा से 39 विधेयकों को पारित किया गया। बजट सत्र में 12 तो मानसूत्र सत्र में 27 विधेयक पारित कराए गए। विपक्ष का आरोप है कि बीते साल मानसून सत्र में केंद्र ने विवादित तीन नए कानून बिना किसी चर्चा के पारित कराए। इस दौरान 8 राज्यसभा सदस्यों को निलंबित करने का मामला भी सामने आया था।

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