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2011 में बीजेपी ने रिपोर्ट में कहा था- देश का काला धन फिर भी काम का है, विदेश में रखना गद्दारी है, इसलिए बाहर जमा पैसे पर चोट करना ज्यादा जरूरी

इस रिपोर्ट को तैयार करने वाली टीम में अजीत डोभाल, एस गुरुमूर्ति, महेश जेठमलानी और आईआईएम-बैंगलोर के प्रोफेसर आर वैद्यनाथन शामिल थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) के साथ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह। (फोटो-पीटीआई)

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा 2011 में कराए गए एक शोध में कहा गया था कि विदेशों में रखा काला धन देशद्रोह है क्योंकि इससे भारतीयों को कोई लाभ नहीं होता। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि देश में रखा हुआ काला धन कम से कम काम तो आता है। इस शोध रिपोर्ट को तैयार करने वाली टीम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और स्वदेशी जागरण मंच के सह-संयोजक एस गुरुमुर्ति भी शामिल थे। आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में छिप हुए काले धन को बाहर लाने के लिए 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने की घोषणा की थी।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस रिपोर्ट को तैयार करने वाली टीम में अजीत डोभाल, गुरुमूर्ति के अलावा वकील महेश जेठमलानी, आईआईएम-बैंगलोर के प्रोफेसर आर वैद्यनाथन भी शामिल थे। “इंडियन ब्लैक मनी अब्रॉड इन सीक्रेट बैंक्स एंड टैक्स हैवेंस” नाम की इस शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार द्वारा विदेशों में पड़ा काला धन वापस लाना सबसे अहम है। ईटी के अनुसार डोभाल के कार्यालय से उसे इस बाबत कोई जवाब नहीं मिला। वहीं गुरुमूर्ति ने कहा कि ये रिपोर्ट साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और टैक्स हैवेन फ्रांस और जर्मनी के रुख के संदर्भ में तैयार की गई थी।

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गुरुमूर्ति ने अखबार से कहा कि साल 2004 में 500 और 1000 के नोटों का प्रचलन बढ़ने के साथ ही काले धन में बढ़ोतरी होने लगी। साल 2004 में कांग्रेस गठबंधन ने सत्ता में वापसी की थी। गुरुमूर्ति के अनुसार केंद्र की मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार घरेलू काले धन कर अंकुश लगाने के लिए जो कर सकती है वो कर रही है, विदेशों से काला धन लाने के लिए दूसरे देशों के सहयोग की जरूरत होगी। वहीं वैद्यनाथन ने अखबार से कहा कि वो अभी भी अपनी रिपोर्ट में कही बात पर कायम हैं। वैद्यनाथन मानते हैं कि विदेशों में पड़ा कालाधन ज्यादा समस्यामूलक है। वैद्यनाथन के अनुसार सरकार को विदेश में जमा काला धन वापस लाने की पूरी कोशिश करनी चाहिए और आधे-अधूरे मन से की गई कोशिश से काम नहीं चलेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि “देश में कालाधन रखना सरकार में अविश्वास का सूचक है जबकि विदेश में काला धन रखना भारत देश में अविश्वास दिखाता है इसलिए ये देशद्रोह है।” रिपोर्ट के अनुसार “देश में पड़ा काला धन या अघोषित संपत्ति कम से कम हमारी अर्थव्यवस्था में काम तो आती है और इसलिए ये एक हद तक उत्पादक होती है। लेकिन स्विस बैंक में रखा गया पैसा न ही भारत के काम आता है और न भारतीयों को इसका कोई लाभ मिलाता है।”

इस रिपोर्ट में विदेशों में जमा काला धन बाहर लाने के लिए “स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम” बनाने का सुझाव दिया गया था। नरेंद्र मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद ऐसी एसआईटी का गठन भी किया। रिपोर्ट में आतंकवाद को बढ़ावा देने में काले धन की भूमिका बताई गई है। हालांकि रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि आतंकवादियों को विदेशों में रखे काले धन से वित्तीय मदद मिलती है।

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