देश के 100 शहरों को ‘स्मार्ट सिटी’ में बदलने के लिए 2016 में पांच साल के लिए एक परियोजना शुरू की गई थी लेकिन दस साल बीतने और तीन बार परियोजना की समयसीमा बढ़ाए जाने के बावजूद केवल 31 शहर ही ‘स्मार्ट’ बन पाए हैं तथा 26 शहरों को अभी खुद को ‘स्मार्ट’ कहलाने में कुछ और वक्त लगेगा।

RTI कैसे दिखाया सच्चाई का आईना?

सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत दायर एक आवेदन के जवाब में केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने बताया है कि 43 शहरों में परियोजनाएं लगभग पूरी होने को हैं जबकि 26 शहरों में अब भी इनके पूरा होने में समय है। मंत्रालय ने पहले मिशन की समयसीमा को जून 2023 तक बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके बाद इसे दोबारा बढ़ाकर 30 जून 2024 और फिर 31 मार्च 2025 कर दिया गया। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, परियोजना के तहत लगभग दस साल में 59,385 करोड़ रुपए की मदद से 31 शहरों को स्मार्ट सिटी में तब्दील किया गया है।

आरटीआइ के जरिए मिली जानकारी में कहा गया कि ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ के तहत चार चरणों में देश के 28 राज्यों व आठ केंद्र शासित प्रदेशों के चुनिंदा सौ शहरों को ‘स्मार्ट सिटी’ में तब्दील करने के लिए चुना गया था। पहले चरण के तहत जनवरी 2016 में 20, दूसरे चरण के तहत मई से सितंबर 2016 में 40, तीसरे चरण के तहत जून 2017 में 30 और जनवरी 2018 तक 10 शहरों को ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ के लिए चुना गया था। इसका उद्देश्य पूरे शहर का विकास करना नहीं बल्कि क्षेत्र-आधारित विकास करना था।

इस योजना के अंतर्गत पुरानी संरचनाओं को तोड़े बिना उन्हें नए मानकों के अनुरूप तैयार करना, पुनर्विकास और हरित क्षेत्र तैयार करने सहित एक ऐसा माडल विकसित करना है जिसे अन्य शहरों द्वारा भी अपनाया जा सके। मंत्रालय ने बताया कि 24 जून 2025 तक मिशन के अंतर्गत इन 100 शहरों में 1.64 लाख करोड़ की लागत से 8067 परियोजनाएं (कुल परियोजनाओं का 94 फीसद) पूरी हो चुकी हैं।

कौन से शहर बने हैं स्मार्ट?

‘स्मार्ट सिटी’ बने 31 शहरों में अगरतला (77 परियोजनाएं), आगरा (62), अटल नगर (52), बरेली (88), भोपाल (82), चंडीगढ़ (97), कोयंबटूर (72), दाहोद (36), इरोड (55), इंदौर (231), जबलपुर (130), झांसी (78), कोहिमा (40), मदुरै (16), मुरादाबाद (41), पटना (34), पुणे (55), राजकोट (71), रांची (26), सालेम (114), शिवमोगा (112), सोलापुर (49), सूरत (87), तुतूकोरिन (75), तिरुचिरापल्ली (83), तिरुनवेली (81), त्रिप्पुर (28), तुमकुरु (217), उदयपुर (143), वडोदरा (52) और वाराणसी (117) शामिल हैं।

मंत्रालय के मुताबिक, इन 31 स्मार्ट शहरों में जिन शहरों पर सबसे ज्यादा राशि खर्च की गई है उनमें इंदौर, त्रिप्पुर, सूरत, वाराणसी, भोपाल और राजकोट शामिल हैं। इंदौर में 3751 करोड़ रुपए की मदद से 231 योजनाएं, त्रिप्पुर में 2833 करोड़ रुपए की मदद से 28, सूरत में 2694 करोड़ रुपए की मदद से 87, वाराणसी में 3,342 करोड़ रुपए की मदद से 117, सालेम में 1,861 करोड़ रुपए की मदद से 114 और शिवमोगा में 1,381 करोड़ की मदद से 112 परियोजनाएं पूरी हुई हैं।

अभी कहां काम होना बाकी है?

मंत्रालय ने बताया कि जिन शहरों में काम 100 फीसद पूरा होने को है, उनमें विशाखापत्तनम (दो), गुवाहाटी (एक), भागलपुर (एक), पणजी (चार), अहमदाबाद (एक), गांधीनगर (दो), शिमला (तीन), जम्मू (चार), बेंगलुरु (एक), दावणगेरे (एक), हुब्बली-धारवाड़ (दो), कोच्चि (दो), तिरुवनंतपुरम (तीन), कावारट्टी (चार), ग्वालियर (चार), सागर (दो), उज्जैन (तीन), औरंगाबाद (दो), कल्याण डोंबिविली (तीन), नासिक (दो), पिंपरी-चिंचवड (एक), ठाणे (दो), इंफाल (चार) और शिलांग (तीन) शामिल हैं।

आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने बताया कि इनके अलावा भुवनेश्वर (एक), राउरकेला (दो), अमृतसर (तीन), जलंधर (चार), अजमेर (एक), जयपुर (दो), कोटा (एक), गांतोक (तीन), नामची (दो), चेन्नई (एक), तंजावुर (एक), वेल्लूर (एक), अलीगढ़ (एक), कानपुर (एक), लखनऊ (एक), प्रयागराज (एक), सहारनपुर (दो), देहरादून (एक), न्यू टाउन कोलकाता (एक) में ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ पूरा होने को है। जिन शहरों में परियोजनाओं को अभी पूरा होने में समय लगेगा उनमें पोर्ट ब्लेयर (नौ), काकीनाडा (12), तिरुपति (12), ईटानगर (सात), पासीघाट (पांच), बिहारशरीफ (पांच), श्रीनगर(पांच), बिलासपुर (11), रायपुर (छह), सिलवासा (17), दीव (नौ), दिल्ली का एनडीएमसी (छह), फरीदाबाद (12), करनाल (10), धर्मशाला (16), मंगलुरु (नौ), सतना (पांच), नागपुर में (सात), आइजोल (13), पुडुचेरी (10), लुधियाना (आठ), ग्रेटर वारांगल (16) और करीमनगर (12) शामिल हैं।