India LPG Cylinder Shortage News: नई दिल्ली के यूसुफ सराय में सड़क किनारे खाने का स्टॉल चलाने वाले दो दोस्तों को राहत और ठगी दोनों का मिला-जुला एहसास हुआ। तीन दिन की खोज के बाद आखिरकार उन्हें एक गैस सिलेंडर मिल गया। लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर ने उन्हें जो कीमत बताई उससे वह चौंक गए। इसकी कीमत 2500 रुपये थी। यह पहले से चुकाई गई कीमत से चार गुना ज्यादा थी। पश्चिम एशिया के रेगिस्तानों और जलडमरूमध्य में हजारों किलोमीटर दूर लड़ा जा रहा युद्ध अब उनके स्टॉल तक पहुंच गया था। वे अकेले नहीं हैं।
ऊर्जा के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत की आपूर्ति व्यवस्था पर अचानक बहुत बड़ा असर पड़ा है। गुजरात में टाइल कारखाने ठप हो गए हैं। देशभर के रेस्टोरेंट या तो बंद हो गए हैं या उन्होंने सीमित मेनू के साथ अपना कारोबार समेट लिया है और भारतीय शहरों की गलियों और फूड कोर्ट में खाना पकाने की गैस का काला बाजार चुपचाप अपनी पकड़ बना चुका है।
एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी
दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गई है यानी 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कीमतों में 115 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और इनकी कीमत 19 किलोग्राम के सिलेंडर के लिए 1884.50 रुपये हो गई है। केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी उत्पादन में 25% की बढ़ोतरी का हवाला देते हुए परिवारों को आश्वस्त किया है कि एलपीजी की कमी की कोई आशंका नहीं है।
लेकिन शहरी भारत को भोजन उपलब्ध कराने वाले रेस्टोरेंट, ढाबों और क्लाउड किचन के लिए, उन आश्वासनों से जमीनी स्तर पर स्थितियों में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए, सिलेंडर आधिकारिक चैनलों के माध्यम से नहीं पहुंच रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने जिन भोजनालयों से बात की, उन्होंने बताया कि अब काला बाजार ही सिलेंडर खरीदने का एकमात्र व्यवहार्य तरीका है और वो भी निर्धारित दर से दोगुने से भी ज्यादा दामों पर।
यूसुफ सराय में दो दोस्तों द्वारा चलाए जा रहे छोटे व्यवसायों के लिए, घरेलू सिलेंडर ही सबसे ज्यादा उपयोग में हैं और वे सिलेंडर भी 100-150% अधिक कीमत पर बिक रहे हैं। हालांकि व्यावसायिक कार्यों के लिए घरेलू एलपीजी का उपयोग कानूनी रूप से अनुमत नहीं है, फिर भी कई छोटे सड़क किनारे के भोजनालय इनका उपयोग करते हैं क्योंकि ये कमर्शियल एलपीजी से सस्ते होते हैं। उद्योग जगत में एक ही बात बार-बार कही जा रही है कि सरकार की ओर से फिलहाल स्पष्टता का अभाव है।
दोगुनी से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है- कावलजीत सिंह
15 शहरों में 70 से ज्यादा आउटलेट चलाने वाली फूड चेन ‘ खड़क सिंह दा ढाबा’ के सह-संस्थापक कावलजीत सिंह ने कहा, “दिल्ली-एनसीआर में हमें एक कमर्शियल सिलेंडर की निर्धारित कीमत से औसतन 2-2.5 गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। यह ज्यादातर काला बाजार में ही मिलता है, क्योंकि आधिकारिक तरीके से सिलेंडर हासिल करना बहुत मुश्किल है। बेंगलुरु जैसे शहरों में तो हमें एक सिलेंडर के लिए 8000 से 9000 रुपये तक की कीमतें बताई गई हैं।”
इस वजह से सिंह को बेंगलुरु में अपना भोजनालय बंद करना पड़ा। उन्होंने कहा, “वहां का आउटलेट बस किसी तरह चल रहा है, उसके बाद हमारे पास सप्लाई नहीं है क्योंकि कीमतें बहुत ज्यादा हैं।” उन्होंने बताया कि बाकी बचे आउटलेट्स में हमने मेनू कम कर दिया है और सिर्फ चार-पांच ज्यादा बिकने वाले व्यंजन ही परोस रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “हमने Zomato और Swiggy जैसे डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली छूट भी काफी कम कर दी है ताकि कुछ खर्चों की भरपाई हो सके।”
सिंह के आउटलेट्स के लिए, संकट से पहले सिलेंडरों की दैनिक लागत लगभग 30000-50000 रुपये हुआ करती थी। आज यह लगभग 1 लाख रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि पैकेजिंग की लागत में भी 20-25% की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि प्लास्टिक रैप महंगे हो गए हैं। देश भर में रेस्टोरेंट मालिक इसी तरह की समस्याओं की रिपोर्ट कर रहे हैं। गगनदीप सिंह सपरा, जो कई क्लाउड किचन चलाते हैं और मुख्य रूप से ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर व्यंजन बेचते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि एलपीजी की कमी के कारण उनके किचन ब्रांड ‘ तड़का रानी’ को बंद करना पड़ा है और उनके कई अन्य ब्रांड सीमित मेनू परोस रहे हैं।
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने अपने सदस्यों को सलाह दी है कि वे गैस की बचत करें और अपने काम करने के तरीकों में बदलाव करें। एनआरएआई ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाक्रम से उपलब्धता और भी कम हो सकती है, जिससे देश भर के रेस्टोरेंट के लिए परिचालन संबंधी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं और अगर स्थिति बनी रहती है तो फूड सर्विस सेक्टर को रसोई संचालन को बनाए रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
इसके दूरगामी परिणाम होते हैं। हर वह रेस्टोरेंट जो बंद हो जाता है या अपनी सेवाओं में कटौती करता है, उससे डिलीवरी सिस्टम के माध्यम से आने वाले ऑर्डर कम हो जाते हैं और इस सिस्टम पर निर्भर कर्मचारियों के लिए इसका असर तत्काल और व्यक्तिगत रूप से पड़ता है। दिल्ली के वसंत कुंज में एक डिलीवरी वर्कर ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में ऑर्डर की संख्या में कमी आने के कारण उसे उतने ही घंटों के काम के लिए सामान्य से 20-25% कम कमाई मिल रही है।
इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री में भारी उछाल
बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि ईंधन संकट को लेकर फैली दहशत के चलते इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री में भारी उछाल आया है। फ्लिपकार्ट का कहना है कि अब ये सिर्फ एक किचन अपग्रेड नहीं, बल्कि जीवन-मरण की जरूरत बन गए हैं। ई-टेलर ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री चार गुना बढ़ गई है और दिल्ली, कोलकाता और उत्तर प्रदेश जैसे शहरों से इनकी मांग बढ़ रही है। अमेजन के एक प्रवक्ता ने बताया कि इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री 30 गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है, जबकि मल्टी-यूज केतली की बिक्री दोगुनी हो गई है। वहीं, राइस कुकर और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर की बिक्री में चार गुना बढ़ोतरी हुई है।
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ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने पद संभालने के बाद अपने पहले संदेश में कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहना चाहिए। खामेनेई ने कहा कि वह उन बहादुर लड़ाकों को धन्यवाद देना चाहते हैं जो ऐसे समय में बेहतरीन काम कर रहे हैं जब उनका देश दबाव और हमलों से घिरा हुआ है। पढ़ें पूरी खबर…
