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आईएमएफ का अनुमान- ब्र‍िटेन को टॉप 5 से बाहर कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बनेगा भारत

आईएमएफ के मुताबिक भारत 9.9% की सालाना ग्रोथ रेट से आगे बढ़ेगा। इस तरह यह 2022 तक जर्मनी को पीछे छोड़ देगा।

भारत की अर्थव्यवस्था अभी खुद को रिकवर कर रही है। नोटबंदी के बाद 86 प्रतिशत करेंसी को चलन से बाहर कर दिया गया था।

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) की माने तो साल 2022 तक भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकती है। आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक भारत ब्रिटेन को दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से बाहर कर देगा। आईएमएफ के मुताबिक भारत 9.9% की सालाना ग्रोथ रेट से आगे बढ़ेगा। इस तरह यह 2022 तक जर्मनी को पीछे छोड़ देगा। भारत दुनि‍या की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के साथ ही 2017 के बाद ब्रि‍टेन को टॉप 5 से बाहर कर देगा। इसके विपरीत ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था इस साल महज 2 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ेगी, जबकि 2018 में 1.8 फीसदी की दर से आगे बढ़ेगी। आईएमएफ ने कहा है कि 5वें स्थान पर काबिज ब्रिटेन भी एक रैंक पीछे खिसककर छठें स्थान पर पहुंच जाएगा। यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलने के कारण ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। आईएमएफ ने 2017 और 2022 के लि‍ए सकल घरेलु उत्पाद (जीएसटी) पर देशों की रैंकिंग की है।

रिपोर्ट के मुताबिक इसमें साउथ एशियाई देशों को कुछ चुनौति‍यों का समाना करना पड़ेगा। जिसमें  टैक्‍स सि‍स्‍टम की पूरी तरह से जांच करते हुए उसे लागू करना। इसके अलावा इन देशों में मौजूद बेकार पड़े असेट्स को नि‍पटाना, धीमी पड़ी उत्पादकता को सुधारना, नौकरी के अवसरों को बढ़ाना, कॉर्पोरेट निवेश को बढ़ावा देना और बड़े पैमाने पर मूलभूत सुविधाओं की कमी को पूरा करना भी शामि‍ल हैं। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था अभी खुद को रिकवर कर रही है। नोटबंदी के बाद 86 प्रतिशत करेंसी को चलन से बाहर कर दिया गया था। वहीं जीएसटी को देशभर में लागू करने से कुछ समय के लिए इकोनॉमी प्रभावि‍त होगी।

सरकार पहले ही जीएसटी के लि‍ए अप्रैल की डेडलाइन को पूरा नहीं कर पाई है और अब नए 1 जुलाई के लक्ष्‍य को पूरा करने के लि‍ए काम कर रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबि‍क कंपनि‍यों के खराब लोन, पुनर्गठित लोन और पहले लिया गया कर्ज कुल कर्ज का करीब 16.6% हैं। इससे फंसे कर्ज की संख्‍या में इजाफा हुआ है और बैंकों को कर्ज रि‍कवर करने पर फोकस करना पड़ रहा है। इसकी वजह से लोन ग्रोथ रि‍कॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के करीब है। यह मोदी सरकार के लि‍ए बड़ी चुनौती है क्‍योंकि वह निवेश सुधारना और नई नौकरियों के लिए अवसर पैदा करना चाहती है।

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