IMF में पहली महिला डिप्टी एमडी होंगी गीता गोपीनाथ, पढ़िए उनकी कामयाबी की कहानी

मूल रूप से केरल की रहने वाली गीता गोपीनाथ ने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई भारत में ही की। उन्होंने साल 1992 में दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से अर्थशास्त्र में ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की।

अगले साल की शुरुआत में गीता गोपीनाथ आईएमएफ के डिप्टी एमडी का पद संभालेंगी। (फोटो: रायटर्स)

अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ जल्दी ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पहली महिला डिप्टी एमडी बनने जा रही हैं। मौजूदा डिप्टी एमडी जेफ्री ओकामोटो के आईएमएफ छोड़ने के बाद वे इस पद को संभालेंगी। डिप्टी एमडी बनने के बाद आईएमएफ में गीता की हैसियत नंबर 2 की हो जाएगी। गीता वर्तमान में आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री का दायित्व संभाल रही हैं। आइये जानते हैं गीता गोपीनाथ के कामयाबी की कहानी जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से आईएमएफ तक का सफ़र तय किया।

गीता गोपीनाथ को आईएमएफ का डिप्टी एमडी बनाए जाने का फैसला तब आया है जब पिछले दिनों अक्टूबर के महीने में उन्होंने वापस से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ज्वाइन करने का फैसला किया था। आईएमएफ की पहली महिला मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने करीब तीन साल अपनी सेवा देने के बाद दोबारा से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में फैकल्टी के तौर पर ज्वाइन करने का फैसला किया था।

आईएमएफ की डिप्टी एमडी बनाए जाने के बाद गीता गोपीनाथ निगरानी और उससे संबंधित नीतियों का नेतृत्व करेंगी। साथ ही वे अनुसंधान और प्रमुख प्रकाशनों की भी देखरेख करेंगी। इसके अलावा फंड प्रकाशनों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मानकों को बढ़ावा देने में भी अपना योगदान देंगी। आईएमएफ का सबसे बड़ा शेयरधारक अमेरिका ही डिप्टी एमडी को नामित करता है और इसके बाद आईएमएफ के द्वारा उसकी नियुक्ति की जाती है। 

अमेरिका और भारत की दोहरी नागरिकता रखने वाली गीता गोपीनाथ अगले साल 21 जनवरी से अपने नए जिम्मेदारी को संभालेंगी। आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री रहते हुए भी गीता गोपीनाथ ने रिसर्च विभाग की भूमिका को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पूंजी बहाव और महामारी को ख़त्म करने के लिए आईएमएफ के प्लान को तैयार में करने में भी अहम योगदान दिया है।

मूल रूप से केरल की रहने वाली गीता गोपीनाथ ने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई भारत में ही की। उन्होंने साल 1992 में दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से अर्थशास्त्र में ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में ही मास्टर्स किया। मास्टर्स के बाद वे वाशिंगटन यूनिवर्सिटी चली गईं। उन्होंने 1996 से 2001 तक प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी पूरी की। 

पीएचडी पूरी करने के बाद गीता ने 2005 तक शिकागो यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के रूप में अध्यापन कार्य किया। इसके बाद वे हार्वर्ड चली गईं। गीता 2015 में इंटरनेशनल स्टडीज़ एंड इकोनॉमिक्स की प्रोफ़ेसर बन गईं। गीता को 2018 में आईएमएफ का मुख्य अर्थशास्त्री नियुक्त किया गया। इससे पहले साल 2017 में उन्हें केरल सरकार का वित्तीय सलाहकार भी बनाया गया था।

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