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लीची नहीं है जापानी इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौत की मुख्य वजह, IMA ने बताए दूसरे कारण

उच्चतम न्यायालय ने इन्सेफेलाइटिस की बीमारी से मुजफ्फरपुर में 100 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में सोमवार को केन्द्र और बिहार सरकार को सात दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

Author नई दिल्ली | June 24, 2019 8:44 PM
बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित अस्पताल में भर्ती चमकी बुखार से पीड़ित बच्चे। (Photo: REUTERS)

आईएमए के एक दल ने कहा है कि बिहार के मुजफ्फरपुर में ऐन्सेफ्लाइटिस बीमारी से होने वाली मौतों में ‘‘लीची’’ को खाना मुख्य वजह नहीं है क्योंकि इससे नवजात भी प्रभावित हुये हैं। बीमारी से हुयी मौतों की जांच करने वाले इस दल ने कहा कि इनमें कुपोषण और मौजूदा गर्मी व उमस का पर्याप्त योगदान है। आईएमए के एक दल ने कहा कि पानी की कमी(डिहाइड्रेशन), खून में चीनी की अत्याधिक कमी (हाइपोग्लूकोमिया) और गर्मी लगने की भी खासी भूमिका है।

उन्होंने कहा कि गुनगुने पानी से स्पंज, अधिक मात्रा में पानी पीने और पर्याप्त भोजन लेने से इस बीमारी में फायदा मिल सकता है।
चार सदस्यों वाले इस दल ने कहा कि स्वास्थ्य जागरूकता पर केंद्रित एक कार्यक्रम चलाने के साथ बच्चों को मुफ्त में खाना देना होगा खासकर रात का खाना। इसके अलावा ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का घोल सार्वजनिक रूप से मुहैया किया जाना चाहिये। इससे इस बीमारी के फैलाने का रोकने में मदद मिलेगी।

रविवार को बिहार के मुजफ्फरपुर में दो और बच्चों की एक्यूट ऐन्सेफिलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से मौत हो गई। इसे स्थानीय लोग ‘चमकी बुखार’ भी कहते हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस बीमारी की वजह से राज्य के 20 जिलों में 152 मौतें हो चुकी हैं। आईएमए टीम ने कहा कि इस बीमारी की वजह के बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन अधिक गर्मी, नमी और उमस इसमें एक भूमिका निभाते हैं लेकिन लीची खा लेना इसकी मुख्य वजह नहीं हो सकती है क्योंकि इसकी चपेट में नवजात भी आये हैं।

वहीं, दूसरी ओर उच्चतम न्यायालय ने इन्सेफेलाइटिस की बीमारी से मुजफ्फरपुर में 100 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में सोमवार को केन्द्र और बिहार सरकार को सात दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। न्यायामूर्ति संजीव खन्ना और न्यायामूर्ति बी. आर. गवई की अवकाश पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस बीमारी से राज्य में हुयी मौतों के बारे में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

पीठ ने बिहार सरकार को चिकित्सा सुविधाओं, पोषण एवं स्वच्छता और राज्य में स्वच्छता की स्थिति के बारे में एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान एक वकील ने न्यायालय को बताया कि उत्तर प्रदेश में भी पहले इसी तरह से कई लोगों की जान जा चुकी है। न्यायालय ने इस तथ्य का संज्ञान लेते हुये उप्र सरकार को भी इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामले में अब 10 दिन बाद आगे सुनवाई की जायेगी।

अधिवक्ता मनोहर प्रताप ने बिहार में इन्सेफेलाइटिस की बीमारी से बड़ी संख्या में बच्चों की मौत की घटनाओं को लेकर न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि पिछले सप्ताहों मं इस बीमारी से 126 से अधिक बच्चों, जिनमें अधिकांश एक से दस साल की आयु के हैं, की मृत्यु होने से याचिकाकर्ता व्यथित है क्योंकि मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। याचिका में कहा गया है कि बच्चों की मौत इस महामारी की स्थिति से निबटने के प्रति बिहार और उप्र सरकार के साथ ही केन्द्र सरकार की प्रत्यक्ष लापरवाही का परिणाम है। याचिका में कहा गया है कि यह बीमारी हर साल होती है और इसे जापानी बुखार भी कहा जाता है। याचिका में दावा किया गया है कि इस बीमारी की वजह से हजारों बच्चे अपनी जान गंवा रहे हैं लेकिन सरकारें इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिये कुछ नहीं कर रही हैं।

याचिका के अनुसार, ‘‘ इस साल इस बीमारी का केन्द्र बिहार में मुजफ्फरपुर जिला है जहां पिछले एक सप्ताह में 126 से अधिक बच्चों की मृत्यु हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आसपास के अस्पतालों में चिकित्सकों, चिकित्सा सुविधाओं, सघन चिकित्सा केन्द्रों और दूसरे मेडिकल उपकरणों की बहुत अधिक कमी है और इन सुविधाओं की कमी की वजह से बच्चों की लगातार मौत हो रही है।’’ याचिका में इस बीमारी का पिछले साल केन्द्र रहे उप्र के गोरखपुर जिले में इसकी रोकथाम और प्राथमिक उपचार के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिये सभी संभव कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

मनोहर प्रताप ने सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण इस बीमारी से अपनी संतान खोने वाले प्रत्येक परिवार को दस दस लाख रूपए मुआवजा दिलाने का अनुरोध भी न्यायालय से किया है। इसके अलावा, याचिका में तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक बोर्ड गठित करने और उसे मुजफ्फरपुर भेजने का केन्द्र को निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि केन्द्र और बिहार सरकार को इस बीमारी से ग्रस्त जिले में बच्चों के इलाज के लिये आवश्यक संख्या में चिकित्सकों के साथ तत्काल 500 सघन चिकित्सा इकाईयों की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि इस रोग से प्रभावित बच्चों का प्रभावी तरीके से उपचार हो सके। इंडियन जर्नल आफ मेडिकल रिसर्च में 2017 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार 2008 से 2014 के दौरान इन्सेफेलाइटिस के 44,000 से अधिक मामले सामने आये और इस दौरान करीब 6,000 लोगों की मृत्यु हुयी।

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