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CAA के खिलाफ विरोध- प्रदर्शनों में IIT Madras के छात्र को छोड़ना पड़ा भारत, FRRO द्वारा मिले थे कॉल व इमेल

IIT Madras CAA Protest: मामले में जैकोब ने कहा कि मैं आईआईटी-एम कैंपस से प्यार करता हूं, मैं भारत से प्यार करता हूं, लेकिन मैं देश में असमानता के चरम सीमाओं के बारे में चिंतित हूं। जर्मनी में किसी को भी कानूनी प्रदर्शन में भाग लेने के लिए कभी भी इस तरह से बेदखल नहीं किया जाता है।

जर्मन छात्र जैकोब लिंडेंथल , फोटो सोर्स – सोशल मीडिया

IIT Madras CAA Protest: IIT मद्रास से भौतिक विज्ञान में मास्टर करने आए जर्मन छात्र को कॉलेज परिसर में हो रहे नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ प्रदर्शन में भाग लेने के बाद उसे तुरंत देश छोड़कर वापस जाने को कहा गया है। बता दें कि यह छात्र एक साल के लिए एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत आईआईटी मद्रास आया था। इस छात्र का नाम जैकब लिंडेंथल है। सोमवार (23 दिसंबर) की रात को अपने निर्धारित उड़ान से कुछ देर पहले द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जैकब ने बताया कि उसे चेन्नई फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस से दोपहर के आसपास कॉल आया था और उन्होंने मुझे मौखिक रूप से वापस जाने को कहा है।

‘1933 से 1945; वी हैव देयर ‘: गौरतलब है कि जैकब पिछले कुछ दिनों से एक ‘स्पोर्ट्स टूर्नामेंट’ में भाग लेनें के लिए बेंगलुरु में रह रहा था। उसे इसी दौरान फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन (FRRO) से पहले ईमेल मिला था। सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने एक प्‍लेकार्ड हाथ में लिया था। इसमें यहूदियों पर नाजियों के अत्‍याचार की ओर इशारा किया गया था। एक पोस्टर में लिखा पर गया था कि : “1933 से 1945; वी हैव देयर ”(इस पोस्टर के द्वारा जर्मनी के नाजी शासन का संदर्भ दे रहे थे।)

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मुझे कोई लिखित पत्र नहीं मिला है: जैकब ने बताया कि, “जब मैं सोमवार (23 दिसंबर) की सुबह चेन्नई पहुंचा तो वहां मेरे कोर्स के कोऑर्डिनेटर ने मुझे तुरंत इमिग्रेशन के अफसरों से मिलने की सलाह दी। जब मैं वहां पहुंचा तो उन्होंने मेरे आवासीय परमिट से संबंधित कुछ प्रशासनिक मुद्दों का हवाला दिया। जब मैंने उनके प्रश्नों का जवाब दे दिया और यह स्पष्ट हो गया कि मेरे आवासीय परमिट में कोई समस्या नहीं थी। इसके बाद अचानक से वह मेरी राजनीति और शौक के बारे में सवाल करने लगे। उन्होंने मेरे से सीएए और उसके विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बारे में पूछा। इसके बाद हमने प्रदर्शन संस्कृति पर चर्चा की । इस पूछाताछ के दौरान तीन अधिकारी शामिल थे। उनमे से किसी के नाम के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र वीजा के उल्लघंन के कारण तुरंत देश छोड़ना पड़ सकता है। जब मैंने उनसे लिखित पत्र मांगा तो उन्होंने मेरा पासपोर्ट वापस करते हुए कहा कि आपको लिखित पत्र मिल जाएगा। लेकिन मुझे एक भी पत्र नहीं मिला है। इसके बाद मैं आईआईटी गया और टिकट बुक किया अपना सामान पैक किया और हवाई अड्डे के लिए निकल गया”।

मार्क्सवादी और चिंता बार समूह द्वारा आयोजित किया गया था: लिंडेंथल ने कहा कि उन्हें डीन के कार्यालय के एक अधिकारी का कॉल आया था। उसने सुझाव दिया कि मैं कल कॉलेज छोड़कर जा सकता हूं। हालांकि कल क्रिसमस की रात है इसलिए मैने तुरंत जाने का फैसला किया। इसके बारे में मैंने अपने माता-पिता को कोई जानकारी नहीं दी है। आईआईटी के कार्यक्रम को आधें में छोड़कर जा रहे इस दक्षिण जर्मनी के छात्र ने कहा कि उनकी भागीदारी पर सवाल इसलिए किया जा रहा है क्योकि वह प्रोटेस्ट मार्क्सवादी और चिंता बार समूह द्वारा आयोजित किया गया था।

बुनियादी मानवाधिकारों के बारे में था प्रदर्शन: मैंने ऐसे समूहों से खुद को दूर कर लिया, मैने सभी अधिकारियों को यह बात समझाया लेकिन उन्होंने मेरे विरोध प्रदर्शन मे शामिल होने पर सवाल करते हुए कहा कि आप बिना सूचना के वहां पर गए थे। विरोध प्रदर्शन में आपको भाग नहीं लेना चाहिए था जब आपको पता ही नहीं है कि किस बात को लेकर प्रदर्शन हो रहा है। मैंने उनके इस बात पर असहमति जताई और कहा कि यह प्रदर्शन सभी लोगों के बुनियादी मानवाधिकारों के बारे में था। बातचीत के दौरान मैं आक्रामक नहीं था मै बस उन्हें अपने विचारों को समझाने की कोशिश कर रहा था।

 “मैं आईआईटी-एम कैंपस से प्यार करता हूं, मैं भारत से प्यार करता हूं”: जैकोब ने कहा कि मैं आईआईटी-एम कैंपस से प्यार करता हूं, मैं भारत से प्यार करता हूं, लेकिन मैं देश में असमानता के चरम सीमाओं के बारे में चिंतित हूं । जर्मनी में किसी को भी कानूनी प्रदर्शन में भाग लेने के लिए कभी भी इस तरह से बेदखल नहीं किया जाता है।

डीन ने कहा इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है: आईआईटी के निदेशक भास्कर राममूर्ति से जब इसके बारे में संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल वह इस समय बाहर है। जब ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने भौतिकी विभाग के प्रमुख के केठुपति और छात्रों के डीन एस. शिवकुमार से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि वे इस “घटना” से अनजान थे। सूत्रों ने कहा कि आईआईटी के एक अधिकारी ने विरोध प्रदर्शनों में लिंडेनथल की भागीदारी के बारे में एक रिपोर्ट भेजी थी, शिवकुमार ने कहा कि उन्हें इस तरह की रिपोर्ट के बारे में पता नहीं था।

वीजा जल्द ही रद्द हो सकता है: एफआरआरओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वह लिंडेंथल के मामले से अनजान थे, द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अगर जर्मन छात्र ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था, तो यह भारत में रहने वाले विदेशियों के लिए वीजा नियमों का उल्लंघन करने का “स्पष्ट मामला” था। “यदि कोई उल्लंघन होता है, तो संस्था अधिकारियों को मामले की रिपोर्ट करने के लिए बाध्य हैं। उनका वीजा जल्द ही रद्द हो सकता है।

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