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IIT प्रोफेसर ने मैनेजमेंट और भ्रष्टाचार पर उठाये थे सवाल, दे दिया गया जबरन रिटायरमेंट

मई 2019 में राय ने परिसर में बन रहे एक शिव मंदिर के खिलाफ पीआईएल दायर की थी। राय का कहना था कि यह 'शैक्षणिक संस्थान की धर्मनिरपेक्ष छवि' के खिलाफ है।

Author Edited By रवि रंजन गुवाहाटी | January 8, 2020 11:55 AM
आईआईटी गुवाहाटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बृजेश राय

आईआईटी गुवाहाटी के एक प्रोफेसर ने मैनेजमेंट और संस्थान में कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए थे। इसके बाद संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने असिस्टेंट प्रोफेसर को ‘गलत व्यवहार’ के आधार पर ‘अनिवार्य सेवानिवृति’ दे दी। असिस्टेंट प्रोफेसर का नाम बृजेश राय है। वे इलेक्ट्रोनिक्स एंड इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट में कार्यरत थे। एक जनवरी को उन्हें ‘अनिवार्य सेवानिवृति’ आदेश का पत्र प्राप्त हुआ। इसी दिन उन्हें एक और पत्र मिला जिसमें उन्हें कैंपस में मिले आवास को 31 जनवरी तक खाली करने का आदेश दिया गया है।

इस पूरे मामले पर आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक प्रोफेसर टी जी सीताराम ने कहा कि जांच समिति और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने डॉ. राय को खुद के बचाव के लिए पर्याप्त मौके दिए गए और फैसले से पहले उनकी सभी दलीलों पर ध्यान दिया गया। दूसरी ओर राय ने कहा कि उन्हें खुद के बचाव के लिए ‘उचित मौका’ नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि वे कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देंगे। उन्होंने कहा, “सिस्टम ने मुझे हरा दिया है। इन दिनों जो कोई भी पारदर्शिता के बारे में बात करता है उसे ‘राष्ट्र-विरोधी’ या ‘कम्युनिस्ट’ करार दे दिया जाता है।

इंडियन एक्सप्रेस को ई-मेल के माध्यम से प्रोफेसर सीताराम ने बताया, “बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने डॉ. राय को दंड के रूप में ‘अनिवार्य सेवानिवृत्ति’ दी है। उनके ऊपर लगे आरोप जांच के बाद सही साबित हुए और इसके बाद बोर्ड ने अपना फैसला सुनाया।” मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले 41 वर्षीय राय ने 2011 में आईआईटी गुवाहाटी ज्वाइन किया था। 2017 के बाद से उन्हें चार बार कारण बताओ नोटिस मिल चुका है और तीन बार उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। हर बार उनके ऊपर अलग आरोप लगे।

प्रशासन के साथ उनका विवाद 2015 में ही शुरू हो गया था। उस समय उन्होंने एक आरटीआई के माध्यम से इस बात को उजागर किया था कि एक एकेडमिक ईयर के बाद ही संस्थान छोड़ने के बावजूद डिपार्टमेंट का एक फैकल्टी कथित रूप से ईईई विभाग के एक छात्र को डिग्री लेने में गलत तरीके से मदद कर रहा था। राय कहते हैं, “वह बिहार में काम कर रहा था। मेरी शिकायत के बाद उस छात्र को तो डिग्री नहीं मिली लेकिन जो प्रोफेसर इसमें संलिप्त थे, उनके ऊपर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

साल 2017 में उन्होंने आरोप लगाया कि आईआईटी गुवाहाटी ने इसरो के साथ मिलकर एक प्रोजेक्ट किया था, इसमें ‘कर्मचारियों की भर्ती में भ्रष्टाचार’ में “कर्मचारियों की भर्ती में भ्रष्टाचार” हुआ था। इस आरोप के बाद पहली बार उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। राय कहते हैं, “उन्होंने मेरे खिलाफ अन्य बेबुनियाद आरोप भी लगाए। एक साथी प्रोफेसर के साथ विवाद करने का और दूसरा काम में कोताही बरतने को लेकर।”

ये तीन आधार हैं जिन पर राय को सेवानिवृत्त होने के लिए कहा गया है: एक इसरो को एक ईमेल शिकायत लिखना और “आधिकारिक प्रोटोकॉल के चैनल को नहीं बनाए रखना”, दूसरा सहकर्मी डॉ. बी आनंद के साथ “विवाद” और और तीसरा एकेडमिक ड्यूटी में लापरवाही बरतना।

राय कहते हैं, “आरोप यह है कि मैंने इसरो परियोजना के बारे में ‘सार्वजनिक डोमेन’ में जानकारी दी है। इसरो को एक ईमेल लिखना जो परियोजना का हिस्सा है, ‘पब्लिक डोमेन’ कैसे हो सकता है? सितंबर 2017 में मेरे पास एक सहकर्मी प्रोफेसर आनंद के साथ विवाद हुआ था। यह एक बाताबाती थी, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि मैंने ‘हाथापाई’ की और उन्हें पीटा। अगस्त 2017 में मैंने एक छात्र के लिए एक क्लास नहीं लिया, क्योंकि वे जानबूझकर गलत तरीके से मुझसे ज्यादा काम करवा रहे थे। मुझे हटाने का औचित्य साबित करने के लिए ये सभी बेवजह के आरोप लगे हैं।”

मई 2019 में राय ने परिसर में बन रहे एक शिव मंदिर के खिलाफ पीआईएल दायर की थी। राय का कहना था कि यह ‘शैक्षणिक संस्थान की धर्मनिरपेक्ष छवि’ के खिलाफ है।” सीताराम ने लिखा, “दुर्व्यवहार और गंभीर अनुशासनात्मक उल्लंघनों सहित डॉ. राय के खिलाफ लगे आरोप साबित हुए हैं। उचित प्रक्रियाओं के तहत पारदर्शी तरीके से मामले की जांच के बाद फैसला सुनाया गया है। फैसले के अवैध होने का कोई सवाल ही नहीं है।”

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