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टीपू सुल्‍तान की तुलना शिवाजी से करने पर गिरीश कर्नाड के खिलाफ सड़क पर उतरे भाजपाई

गिरिश कर्नाड ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया कि यदि टीपू सुल्तान हिंदू होते तो उन्हें भी छत्रपति शिवाजी की तरह दर्जा दिया जाता। उन्होंने मंगलवार को कहा..

Author बेंगलुरु | Updated: November 11, 2015 8:39 PM
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित गिरिश कर्नाड। (फाइल फोटो)

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित नाटककार और अभिनेता गिरीश कर्नाड के खिलाफ भाजपाइयों ने बुधवार को कर्नाटक में जगह-जगह प्रदर्शन किया। कर्नाड ने मंगलवार को बेंगलुरु में कहा था कि 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान अगर हिंदू होते तो उन्हें मराठा शासक छत्रपति शिवाजी के समान दर्जा मिलता। कर्नाड ने यह भी कहा कि उचित होता अगर यहां के पास देवनहल्ली में बंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम केंपेगौड़ा के बदले टीपू सुल्तान के नाम पर होता। केंपेगौड़ा विजयनगर साम्राज्य के तहत जागीरदार थे जिन्होंने 1537 में बंगलुरु की स्थापना की थी।

कर्नाड ने टीपू सुल्तान की जयंती पर आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में यह बात कही थी मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की मौजूदगी में यहां राज्य सचिवालय में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भाजपा और उसकी सहयोगी संगठनों ने पूरे राज्‍य में टीपू सुल्‍तान की जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों का बहिष्‍कार किया था। इस दौरान एक विहिप कार्यकर्ता की मौत भी हो गई थी। (देखें- हिसा की तस्‍वीरें)। कर्नाड ने कहा-‘मैं महसूस करता हूं कि अगर टीपू सुल्तान मुसलिम नहीं हिंदू होते तो उन्हें कर्नाटक में वही दर्जा मिलता जो महाराष्ट्र में शिवाजी महाराज को हासिल है।’ उन्होंने कहा कि टीपू को उनकी धार्मिक आस्था के कारण यह सम्मान नहीं मिला। क्योंकि आज यह हो रहा है कि हमारे विद्वान और नेता किसी का धर्म और जाति पहले देखते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मूल्यांकन के कारण टीपू सुल्तान के साथ अन्याय हुआ है।

टीपू सुल्तान को ‘कन्नड़ विरोधी और हिंदू विरोधी’ कहने वालों पर निशाना साधते हुए कर्नाड ने कहा कि आज हम यह दिन दीपावली और टीपू सुल्तान दिवस के रूप में मना रहे हैं, हम इसे बिहार दिवस के तौर पर भी मना सकते हैं।’ बिहार दिवस संबंधी उनकी टिप्पणी स्पष्ट रूप से भाजपा पर निशाना था जिसे बिहार विधानसभा चुनाव में भारी हार का सामना करना पड़ा है। कर्नाड भाजपा का वैचारिक विरोध करते रहे हैं। कर्नाड की राय के समान ही विचार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा कि टीपू सुल्तान अगर हिंदू के रूप में पैदा होते तो कर्नाटक और पूरे देश में उन्हें वही सम्मान मिलता जो शिवाजी को मिलता है। उन्होंने कहा कि हमें किसी व्यक्ति को उसके धर्म या जाति के नजरिए से नहीं बल्कि लोगों के लिए उनके द्वारा कराए गए अच्छे कार्य को ध्यान में रखकर देखना चाहिए।

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