ताज़ा खबर
 

‘आंदोलन न होता तो ये रेट घटा रहे थे’, केंद्र पर टिकैत का दावा- जिस दिन प्रदर्शन हो गया कमजोर ये किसान को मार देंगे…

बकौल टिकैत, "हमें राजनीतिक लाइन पर नहीं जाना है। सरकार किसी की भी होगी वहां, अगर नीति खराब होगी और उस पर आंदोलन होगा तो किसान आंदोलन पर जिंदा रहेगा। राजनीतिक पार्टी से नहीं।"

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली/सोनीपत | Updated: February 28, 2021 9:48 PM
Rakesh Tikait, BKU, India Newsयूपी के सहारनपुर में किसानों की महापंचायत के दौरान सिर पर साफा/पगड़ी बांधते हुए Bharatiya Kisan Union (BKU) के प्रवक्ता राकेश टिकैत। (फोटोः पीटीआई)

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने दावा किया है कि एमएसपी पर जब देशभर में खरीद होगी, तभी किसान को लाभ होगा। नहीं तो गन्ने पर भी हाल खराब होने वाले हैं आने वाले समय में। अगर आंदोलन न होता, तो ये रेट घटाने वाले थे। बढ़ाने के तो छोड़ दो…। गन्ने का 40 रुपए करीब रेट घटता। जिस दिन किसानों का आंदोलन कमजोर हो जाएगा, उस दिन ये उसे मार देंगे।

रविवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा- यह आर-पार की लड़ाई है। अगर अब हार गए तो किसानों के पास जमीन भी नहीं बचेगी। सरकार ने फसलों के रेट तय किए हैं, उस पर कानून बना दिया जाए। अगर किसी व्यापारी को नुकसान है, तो वह न खरीदे। देश के किसान ने तय कर लिया है। गोदाम पहले बने हैं और बिल बाद में, इसका मतलब है कि व्यापारियों की सांठ-गांठ से गोदाम बने हैं। सरकार मान जाए…या तो वह उन गोदामों का अधिग्रहण कर ले या फिर जनता उन्हें तोड़ेगी और वहां छप्पर बनेंगे।

बकौल टिकैत, “हमें राजनीतिक लाइन पर नहीं जाना है। सरकार किसी की भी होगी वहां, अगर नीति खराब होगी और उस पर आंदोलन होगा तो किसान आंदोलन पर जिंदा रहेगा। राजनीतिक पार्टी से नहीं।”

ये आर-पार की लड़ाई है, अगर अब हार गए तो किसानों के पास जमीन भी नहीं बचेगी- @RakeshTikaitBKU #FarmersProstests #RakeshTikait pic.twitter.com/sjTi2aOmxd

— News24 (@news24tvchannel) February 28, 2021

‘किसानों को कंपनी-निर्भर बनाना चाहता है केंद्र’: कांग्रेस सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने रविवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार आत्मनिर्भरता के नाम पर जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भूलकर निजी कंपनियों के पोषण में लगी हुई है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि पूरी सरकार ही निजी हाथों में चली गयी है, जो सरकार खुद ही आत्मनिर्भर नहीं है, वो खेती को क्या आत्मनिर्भर बनायेगी। हुड्डा ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)और मंडी प्रणाली की वजह से ही खेती आत्मनिर्भर है।

सांसद हुड्डा राई क्षेत्र के गांव हलालपुर में ग्राम पंचायत द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से एमएसपी और मंडी प्रणाली छीनकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाडऩा चाहती है और किसान को कंपनी-निर्भर बनाना चाहती है, इससे न केवल किसान बर्बाद होगा अपितु राष्ट्र रसातल में चला जाएगा। हुड्डा ने कहा,‘‘ तीन महीने से भी ज्यादा समय से किसान सडक़ों पर बैठे हैं, लेकिन सरकार जिद कर बैठी हुई है। इस गतिरोध को समाप्त करने के लिये सरकार पहल करे।’’

एक सवाल के जवाब में सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा, ‘‘हरियाणा सरकार तीन टांगों वाली कुर्सी के समान है, जिसमें एक भाजपा, एक जजपा और एक निर्दलीय शामिल हैं। इस कुर्सी की तीनों टांगें हिल रही हैं, लगतार असंतोष के स्वर सुनाई दे रहे हैं। प्रदेश सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। मौजूदा सरकार में सिर्फ घोटाले हो रहे हैं, कोई काम नहीं हो रहा।’’ उन्होंने कहा कि हरियाणा विधान सभा में आने वाले अविश्वास प्रस्ताव से स्पष्ट हो जायेगा कि कौन सा विधायक जनता के साथ है और कौन तीन टांगों वाली हिलती कुर्सी के साथ है।

Next Stories
1 COVID-19: अगले चरण के टीकाकरण को पंजीकरण को-विन 2.0 पोर्टल पर 1 मार्च से
2 नीता अंबानी और प्रियंका गांधी समेत 200 महिलाएं ‘टाइटैनिक इंडियन ब्यूटीज 2020’ में
3 कोरोना संकट नहीं हुआ खत्म, और खतरनाक हो सकती है तीसरी लहर- CSIR ने चेताया
ये पढ़ा क्या?
X