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यशवंत सिन्हा के साथ अखिलेश यादव के मंच पर पहुंचे शत्रुघ्न सिन्हा, बताया खुद को ‘बागी’

बीजेपी सांसद बोले, 'नोटबंदी का फैसला पार्टी का नहीं था, क्या इस बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी से पूछा गया था? क्या इस बारे में मुरली मनोहर जोशी, अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा को कुछ पता था?'

जेपी की जयंती में गुरुवार को सपा मुख्यालय में पूर्व केंद्रीय मंत्री व सपा मुखिया के साथ बीजेपी सांसद। (फोटोः पीटीआई)

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा एक बार फिर से नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर हुए हैं। गुरुवार (11 अक्टूबर) को वह दिवंगत समाजवादी नेता और चिंतक जयप्रकाश नारायण की 116वीं जयंती पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा मुख्यालय) पहुंचे। जेपी की जयंती पर हुए कार्यक्रम में उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ मंच साझा किया। शॉटगन शत्रुघ्न ने वहां खुद को बागी बताया और राफेल डील को लेकर कहा, “केंद्र सरकार को इस पर जवाब देना होगा।” वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री भी बोले कि फिलहाल देश के हालात आपातकाल से भी खराब हैं।

सिन्हा ने बताया, “सत्ता सेवा का माध्यम है, मेवा का नहीं। अगर सच बोलना बगावत है तो मैं बागी हूं। जुमलेबाजी और खोखले वादे नहीं चलेंगे। नोटबंदी का फैसला पार्टी का नहीं था, क्या इस बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी से पूछा गया था? क्या इस बारे में मुरली मनोहर जोशी, अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा को कुछ पता था? अचानक नोटबंदी लागू कर दी गई और गरीबों के बारे में कुछ नहीं सोचा गया। उसके बाद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू कर व्यापारियों की कमर तोड़ी गई। जीएसटी, पूजा के सामान, प्रसाद और लंगर पर भी लागू कर दिया गया। पर पेट्रोल-डीजल को उससे बाहर रखा गया।”

पटनासाहिब से बीजेपी सांसद आगे बोले, “राफेल डील पर देश जवाब मांग रहा है। जनता इस डील के बारे में जानना चाहती है। आखिर एक साल पुरानी कंपनी एचएल को क्यों हटाया गया? और एक ऐसी कंपनी को यह सौदा क्यों दिया गया जो इसके बारे में जानती भी नहीं है?” शत्रु का कहना था कि कुछ दिन पहले यशवंत जी से अटल सरकार और वर्तमान की मोदी सरकार के बीच तुलना करने को कहा गया था तो उन्होंने कहा था- अटल सरकार में लोकतंत्र था और आज तानाशाही है। शॉटगन इस पर बोले, “आज वन मैन शो है और दो आदमियों (नरेंद्र मोदी-अमित शाह) की सेना है। न तो इस वक्त ईमानदारी है और न ही पारर्दिशता।”

बकौल बीजेपी सांसद, “मैं हर दल का प्रिय हूं। सभी लोग मुझे मानते हैं। अखिलेश मुझे मौका दें या मैं अखिलेश को मौका दूं, बात एक ही है। हम सब एक परिवार की तरह है।” वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना था, “देश में मौजूदा हालात इमरजेंसी से भी बदतर हैं। सबको एकजुट होकर लड़ना पड़ेगा। शत्रुघ्न और मैं देश भर में घूम कर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। देश में लोकतंत्र खतरे में है। अगर हम चेते नहीं तो देश का बहुत नुकसान होगा। देश में लोकतांत्रिक संस्थाएं खतरे में हैं।”

(भाषा इनपुट के साथ)

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